बीजेपी ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर प्रस्ताव पारित किया, महात्मा गांधी का क्यों दिया हवाला

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भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 22 अगस्त 2026 को 'वंदे मातरम' को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया है.
बीजेपी ने कांग्रेस कार्यसमिति के 19 अगस्त के उस फैसले की कड़ी निंदा की, जिसमें कांग्रेस के कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के केवल पहले दो अंतरों के गायन को लेकर 1937 के प्रस्ताव को दोहराया गया था.
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी.
बीजेपी के प्रस्ताव के मुताबिक, "‘वंदे मातरम’ भारत का राष्ट्रीय गीत है और यह स्वतंत्रता आंदोलन की भावना और देश की राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है. पार्टी ने पूरे ‘वंदे मातरम’ के सम्मान, गरिमा और राष्ट्रीय दर्जे को बनाए रखने का संकल्प लिया."
प्रस्ताव में बीजेपी ने कहा, "वंदे मातरम की संवैधानिक और वैधानिक स्थिति को बनाए रखा जाना चाहिए. पार्टी ने दावा किया कि संविधान सभा की 1950 की घोषणा और 2026 में संसद द्वारा किए गए संशोधन ने राष्ट्रीय गीत को क़ानूनी संरक्षण दिया है."
बीजेपी ने कांग्रेस पर ''सांप्रदायिक दबाव, राजनीतिक तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीत'' के आगे झुकने का आरोप लगाया. पार्टी ने कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति का कोई प्रस्ताव देश की संवैधानिक संस्थाओं या संसद द्वारा बनाए गए कानून से ऊपर नहीं हो सकता.
प्रस्ताव में बीजेपी ने 'वंदे मातरम' को लेकर 1937 में हुए विवाद के ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भ को भी लोगों के सामने रखने की बात कही. पार्टी ने मुस्लिम लीग की आपत्तियों और उसके बाद की सांप्रदायिक और अलगाववादी राजनीति का भी ज़िक्र किया.
बीजेपी ने दावा किया कि महात्मा गांधी ने 'वंदे मातरम' को 'साम्राज्यवाद विरोधी नारा' और 'शुद्धतम राष्ट्रीय भावना' से जुड़ा बताया था.




















