लाइव, बीजेपी ने 'वंदे मातरम' को लेकर प्रस्ताव पारित किया, महात्मा गांधी का क्यों दिया हवाला

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 22 अगस्त 2026 को 'वंदे मातरम' को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया है.

सारांश

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  • नैश कीन अपनी माँ के साथ
  • राहुल संसद मार्ग थाने के बाहर धरने पर बैठे
  • आशुतोष रांका से जयपुर में मारपीट
  • इमरान ख़ान को जेल शिफ्ट किया गया
  • खदान धंसने से 100 से ज़्यादा की मौत
  • अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
  • गृह मंत्री अमित शाह
  • इस मिड-डे मील को लेकर क्या बोले स्कूल के बच्चे

लाइव कवरेज

अरशद मिसाल, चंदन कुमार जजवाड़े

  1. बीजेपी ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर प्रस्ताव पारित किया, महात्मा गांधी का क्यों दिया हवाला

    नितिन नबीन

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    इमेज कैप्शन, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने एक्स पर पोस्ट कर इस प्रस्ताव की जानकारी दी (फ़ाइल फ़ोटो)

    भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 22 अगस्त 2026 को 'वंदे मातरम' को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया है.

    बीजेपी ने कांग्रेस कार्यसमिति के 19 अगस्त के उस फैसले की कड़ी निंदा की, जिसमें कांग्रेस के कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के केवल पहले दो अंतरों के गायन को लेकर 1937 के प्रस्ताव को दोहराया गया था.

    बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी.

    बीजेपी के प्रस्ताव के मुताबिक, "‘वंदे मातरम’ भारत का राष्ट्रीय गीत है और यह स्वतंत्रता आंदोलन की भावना और देश की राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है. पार्टी ने पूरे ‘वंदे मातरम’ के सम्मान, गरिमा और राष्ट्रीय दर्जे को बनाए रखने का संकल्प लिया."

    प्रस्ताव में बीजेपी ने कहा, "वंदे मातरम की संवैधानिक और वैधानिक स्थिति को बनाए रखा जाना चाहिए. पार्टी ने दावा किया कि संविधान सभा की 1950 की घोषणा और 2026 में संसद द्वारा किए गए संशोधन ने राष्ट्रीय गीत को क़ानूनी संरक्षण दिया है."

    बीजेपी ने कांग्रेस पर ''सांप्रदायिक दबाव, राजनीतिक तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीत'' के आगे झुकने का आरोप लगाया. पार्टी ने कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति का कोई प्रस्ताव देश की संवैधानिक संस्थाओं या संसद द्वारा बनाए गए कानून से ऊपर नहीं हो सकता.

    प्रस्ताव में बीजेपी ने 'वंदे मातरम' को लेकर 1937 में हुए विवाद के ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भ को भी लोगों के सामने रखने की बात कही. पार्टी ने मुस्लिम लीग की आपत्तियों और उसके बाद की सांप्रदायिक और अलगाववादी राजनीति का भी ज़िक्र किया.

    बीजेपी ने दावा किया कि महात्मा गांधी ने 'वंदे मातरम' को 'साम्राज्यवाद विरोधी नारा' और 'शुद्धतम राष्ट्रीय भावना' से जुड़ा बताया था.

  2. राजस्थान: सीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट मामले में क्रॉस एफ़आईआर दर्ज, मोहर सिंह मीणा, बीबीसी हिन्दी के लिए जयपुर से

    आशुतोष रांका

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    इमेज कैप्शन, आशुतोष रांका और उनकी टीम के साथ शुक्रवार को हुई 'मारपीट के वीडियो' सोशल मीडिया पर कई लोगों ने शेयर किए

    जयपुर के शिवदासपुरा पुलिस थाने में शनिवार सुबह कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और रामपुरा-कंवरपुरा के ग्रामीणों ने एक दूसरे के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करवाई है. दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर मारपीट के आरोप लगाए हैं.

    शिवदासपुरा पुलिस थाना प्रभारी राजेश गौतम ने बीबीसी हिन्दी को फ़ोन पर बताया, "ग्रामीणों और सीजेपी की शिकायत पर आज क्रॉस एफ़आईआर दर्ज की गई है."

    पुलिस थाना प्रभारी ने बताया है कि पहली एफ़आईआर ग्रामीणों ने सीजेपी के ख़िलाफ़ दर्ज करवाई है. इसके बाद सीजेपी की शिकायत पर ग्रामीणों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है.

    राजेश गौतम ने बताया, "दोनों ही पक्षों ने एक दूसरे पर मारपीट के आरोप लगाए हैं. हमने मारपीट की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और जांच कर रहे हैं."

    सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका अपने कार्यकर्ताओं के साथ शुक्रवार सुबह बगरू विधानसभा क्षेत्र के रामपुरा-कंवरपुरा गांव के स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे थे. सीजेपी ने इस दौरान एकजुट हुए ग्रामीणों ने कार्यकर्ताओं पर पथराव कर पीटने के आरोप लगाए हैं."

    घटना के बाद देर रात आशुतोष रांका कार्यकर्ताओं के साथ डीसीपी साउथ कार्यालय भी पहुंचे थे.

    गांव में संचालित सरकारी स्कूल की हालत को लेकर हुए विवाद के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारी भी मौक़े पर पहुंचे थे. जिसके बाद नज़दीक ही एक अन्य घर में फिलहाल स्कूल को शिफ्ट किया गया है.

  3. अब मुझे यानी बीबीसी संवाददाता अरशद मिसाल को इजाज़त दीजिए. अब से रात दस बजे तक बीबीसी संवाददाता चंदन कुमार जजवाड़े आप तक अहम ख़बरें पहुंचाएंगे.

    बीबीसी हिन्दी के पेज पर मौजूद कुछ बड़ी ख़बरों को पढ़ने के लिए नीचे दिए हुए लिंक्स पर क्लिक करें.

  4. एस. जयशंकर 23 अगस्त को रूस जाएंगे, विदेश मंत्री लावरोव से करेंगे मुलाक़ात

    विदेश मंत्री एस. जयशंकर

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    विदेश मंत्री एस. जयशंकर 23 और 24 अगस्त को रूस के आधिकारिक दौरे पर जाएंगे.

    विदेश मंत्रालय ने एक्स पर प्रेस रिलीज़ जारी कर इसकी जानकारी दी.

    रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव के निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा के दौरान जयशंकर इंडिया-रूस इंटर-गवर्नमेंटल कमीशन की 27वीं बैठक की सह-अध्यक्षता करेंगे.

    यह आयोग दोनों देशों के बीच व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर काम करता है.

    दौरे के दौरान जयशंकर रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से भी मुलाक़ात करेंगे. दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे.

    विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जयशंकर का यह दौरा भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ अहम क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा.

  5. इसराइल की सेटलमेंट नीति के ख़िलाफ़ यूएई, क्या दोनों देशों के बीच बढ़ रही हैं दूरियां?

    मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान

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    इमेज कैप्शन, यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान (फ़ाइल फ़ोटो)

    संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) समेत आठ देशों के विदेश मंत्रियों ने इसराइल की बस्तियां बसाने की नीतियों और कब्जे वाले फ़लस्तीनी इलाक़ों में जारी गतिविधियों की निंदा की है.

    दरअसल, इसराइल ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक में करीब 12 सौ नए सेटलमेंट घर बनाने के लिए टेंडर जारी करने की योजना बनाई है.

    यूएई के इस रुख़ को इसराइल के साथ उसके रिश्तों के संदर्भ में अहम माना जा रहा है.

    यूएई, सऊदी अरब, कतर, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान में ‘ई1’ सेटलमेंट प्लान को साफ तौर पर ख़ारिज किया.

    इन देशों ने बयान में कहा कि इससे वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम के बीच फ़लस्तीनी इलाक़े की भौगोलिक निरंतरता प्रभावित होगी और भविष्य में एक स्वतंत्र फ़लस्तीन देश के गठन की संभावना कमज़ोर होगी.

    बयान में इसराइली बस्तियों के विस्तार और उन्हें कब्जे वाले इलाक़ों में बढ़ाने की कोशिशों को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन बताया गया.

    मंत्रियों ने इसराइली बस्तियों में रहने वाले लोगों की ओर से फ़लस्तीनियों और उनकी संपत्ति के ख़िलाफ़ हिंसा की भी निंदा की.

    क्या यूएई इसराइल से दूरी बना रहा है?

    यूएई और इसराइल ने 2020 में अब्राहम अकॉर्ड्स के तहत राजनयिक संबंध स्थापित किए थे.

    इसके बाद दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और दूसरे क्षेत्रों में रिश्ते तेजी से आगे बढ़े. लेकिन ग़ज़ा युद्ध के बाद यूएई का इसराइल की नीतियों पर सार्वजनिक रूप से आलोचनात्मक रुख ज़्यादा स्पष्ट हुआ है.

    हालिया संयुक्त बयान में यूएई ने सिर्फ फ़लस्तीनी मुद्दे पर चिंता नहीं जताई, बल्कि इसराइल की सेटलमेंट नीति को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेही और प्रतिबंधों का भी समर्थन किया है.

    बयान में उन संस्थाओं और व्यक्तियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की गई है, जो अवैध बस्तियों के विस्तार या उन्हें मज़बूत करने में मदद कर रहे हैं.

  6. सीजेपी के स्कूल निरीक्षण पर राजस्थान के शिक्षा मंत्री का रुख़ बदला

    मदन दिलावर

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    इमेज कैप्शन, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने अपने पोस्ट में कहा, “सरकारी विद्यालय मजबूत होंगे, तो राजस्थान का भविष्य मजबूत होगा” (फ़ाइल फ़ोटो)

    राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का रुख़ कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर नरम होता दिख रहा है.

    सीजेपी के लोग राजस्थान में सरकारी स्कूलों की कमियां पहले उजागर कर रहे थे तो दिलावर आक्रामक थे लेकिन अब वह इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया बता रहे हैं.

    मदन दिलावर ने कहा, "राजस्थान में सरकारी स्कूलों को बेहतर, सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है. स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं, भवन निर्माण और मरम्मत, स्मार्ट क्लास, प्रयोगशालाओं और कक्षा-कक्ष समेत छात्रों की ज़रूरी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है."

    उन्होंने कहा, “विद्यालयों की कमियों को सामने लाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, लेकिन समाधान का रास्ता संवाद, सहयोग और सकारात्मक सहभागिता से ही निकलता है.”

    शिक्षा मंत्री ने अपने पोस्ट में कहा, “सरकारी विद्यालय मजबूत होंगे, तो राजस्थान का भविष्य मज़बूत होगा.”

    लेकिन शुक्रवार को शिक्षा मंत्री ने एक्स पर पोस्ट कर सीजेपी से विद्यालयों को राजनीति का अखाड़ा न बनाने की बात कही थी.

    शनिवार को उन्होंने कहा कि कुछ कथित राजनीतिक दलों से जुड़े लोग विद्यालयों में जाकर अनावश्यक रूप से माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है.

  7. विवाद के बाद सोमालिया ने साइप्रस को लेकर अपना रुख़ साफ़ किया

    अब्दिसलाम अब्दी अली

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    इमेज कैप्शन, सोमालिया के विदेश मंत्रालय ने कहा कि साइप्रस को लेकर सोमालिया की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है (सोमालिया के विदेश मंत्री अब्दिसलाम अब्दी अली)

    सोमालिया के विदेश मंत्रालय ने साइप्रस के मुद्दे पर अपने रुख़ को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया है.

    मंत्रालय ने कहा कि साइप्रस को लेकर सोमालिया की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है और यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों पर आधारित है.

    सोमालिया ने साइप्रस की संप्रभुता, स्वतंत्रता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपना पूरा सम्मान दोहराया.

    दरअसल, सोमालियाई संसद के हाउस ऑफ़ पीपल्स के स्पीकर अब्दुल कादिर मोहम्मद नूर ने स्पीकर बनने पर बधाई देने के लिए टर्किश रिपब्लिक ऑफ नॉर्दर्न साइप्रस की संसद के स्पीकर को धन्यवाद दिया था.

    हालांकि, उनका यह पोस्ट अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मौजूद नहीं है.

    अब्दुल कादिर मोहम्मद नूर 10 अगस्त को हाउस ऑफ़ पीपल्स के स्पीकर चुने गए थे.

    विदेश मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि सोमालिया संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में साइप्रस विवाद के शांतिपूर्ण, बातचीत के जरिए और स्थायी समाधान का समर्थन करता है.

    दरअसल साइप्रस 1974 से बंटा हुआ है. दक्षिण में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त साइप्रस गणराज्य है, जबकि उत्तर में टर्किश रिपब्लिक ऑफ नॉर्दर्न साइप्रस है, जिसे सिर्फ़ तुर्की मान्यता देता है.

    संयुक्त राष्ट्र साइप्रस के एकीकरण के लिए दोनों पक्षों के बीच बातचीत का समर्थन करता है.

    संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत साइप्रस की संप्रभुता, स्वतंत्रता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए.

    साइप्रस के मामले में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव 541 (1983) और प्रस्ताव 550 (1984) के जरिए उत्तरी साइप्रस में घोषित अलग राज्य को मान्यता न देने और साइप्रस की एकता बनाए रखने की स्थिति दोहराई है.

  8. अमेरिका ने कनाडा के ख़िलाफ़ लगाया 50 फ़ीसदी टैरिफ़, बढ़ी तनातनी

    मार्क कार्नी

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    इमेज कैप्शन, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि कनाडा अमेरिकी सामान पर उतना ही टैरिफ लगाएगा, जितना अमेरिका कनाडाई सामान पर लगाएगा (फ़ाइल फ़ोटो)

    अमेरिका ने शनिवार को कनाडा से आने वाले 20 अरब डॉलर की क़ीमत के उत्पादों पर 50 फ़ीसदी टैरिफ़ लगा दिया. इसके तुरंत बाद कनाडा ने भी जवाबी कार्रवाई की घोषणा की.

    दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंधों को सामान्य करने के लिए आख़िरी दौर की बातचीत नाकाम होने के बाद यह क़दम उठाया गया है.

    समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए आयात शुल्क से हर साल कनाडा से अमेरिका भेजे जाने वाले कुल सामान के क़रीब पाँच फ़ीसदी हिस्से पर असर पड़ेगा.

    इसमें हॉकी स्टिक से लेकर मेडिकल इस्तेमाल में आने वाले टंग डिप्रेसर तक कई तरह के उत्पाद शामिल हैं. कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने एक बयान में कहा, “हम अपने कर्मचारियों और कारोबारों की रक्षा के लिए इन टैरिफ का डॉलर-के-बदले-डॉलर जवाब देंगे.”

    कनाडा की जवाबी कार्रवाई से दोनों देशों के बीच व्यापार विवाद और बढ़ गया है. इससे अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के बीच उत्तर अमेरिकी व्यापार समझौते के भविष्य पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.

    यह समझौता तीनों देशों के उद्योगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पत्रकारों को बताया कि कनाडा ने स्टील, एल्युमिनियम, ऑटोमोबाइल और लकड़ी पर लगाए गए ट्रंप के टैरिफ़ में रियायत की मांग की थी, लेकिन अमेरिका इन मुद्दों पर कोई रियायत देने को तैयार नहीं था.

  9. राहुल गांधी के पुणे कार्यक्रम से पहले एबीवीपी-एनएसयूआई कार्यकर्ता आपस में भिड़े, प्राची प्रतिभा शिरीष, बीबीसी संवाददाता

    पुणे में भिड़े एबीवीपी और एनएसयूआई के कार्यकर्ता

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    इमेज कैप्शन, यह विवाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से ठीक पहले हुआ है

    पुणे के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (सीओईपी) में छात्र संगठनों एबीवीपी और एनएसयूआई के बीच विवाद सामने आया है. दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर धमकी देने और हिंसा करने के आरोप लगाए हैं.

    अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी बीजेपी का छात्र संगठन है और एनएसयूआई कांग्रेस की स्टूडेंट यूनिट है.

    ऐसा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से ठीक पहले हुआ है.

    कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक हलचल के बीच एक छात्रा की स्कॉलरशिप और फीस रीइंबर्समेंट को लेकर दिए गए इंटरव्यू ने विवाद को और बढ़ा दिया है.

    एबीवीपी और एनएसयूआई ने एक-दूसरे पर डराने-धमकाने, ग़लत जानकारी फैलाने और हिंसा के आरोप लगाए हैं.

    न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पुणे पुलिस ने शनिवार को कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की है.

    विवाद की शुरुआत गुरुवार को हुई, जब एक छात्रा ने एक न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में आरोप लगाया कि छात्रों को सरकारी स्कॉलरशिप और फीस रीइंबर्समेंट का पैसा नहीं मिल रहा है.

    कांग्रेस और एनएसयूआई नेताओं का आरोप है कि बाद में छात्रा को कथित तौर पर रोककर रखा गया और उस पर दबाव बनाकर एक और वीडियो रिकॉर्ड कराया गया, जिसमें उसने अपने पहले बयान को वापस लिया या उसमें बदलाव किया.

    हालांकि, एबीवीपी ने इस आरोप से इनकार किया है. संगठन ने उल्टा एनएसयूआई पर छात्रा पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है.

    शुक्रवार रात मामला तब और बढ़ गया, जब दोनों संगठनों के सदस्य सीओईपी कैंपस में जुट गए. कांग्रेस और एनएसयूआई ने आरोप लगाया कि इस दौरान उनके कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई और दो कांग्रेस कार्यकर्ता घायल हो गए. बताया गया है कि घायलों को संचेती अस्पताल ले जाया गया, जहां महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने उनसे मुलाकात की.

    घटना के बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सीओईपी कैंपस में प्रदर्शन किया. उन्होंने एबीवीपी पर डराने-धमकाने और हिंसा का आरोप लगाया. सपकाल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि एबीवीपी सदस्यों ने छात्रों के साथ मारपीट की और छात्राओं को हॉस्टल के कमरों में कथित तौर पर बंद रखा.

    उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से जुड़े सोशल मीडिया स्टेटस को लेकर छात्रों को धमकाने का भी आरोप लगाया और इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया.

    एबीवीपी ने इन आरोपों को खारिज किया है. संगठन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और एनएसयूआई कार्यकर्ता छात्रों पर ग़लत जानकारी फैलाने का दबाव बना रहे थे. एबीवीपी का दावा है कि छात्रों ने खुद स्थिति स्पष्ट की और एनएसयूआई कार्यकर्ता छात्राओं के हॉस्टल परिसर में घुसकर डराने-धमकाने में शामिल थे. संगठन ने कांग्रेस और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं की कथित “गुंडागर्दी” की कड़ी निंदा की.

    फिलहाल दोनों पक्ष एक-दूसरे पर डराने-धमकाने, मारपीट और छात्रों पर दबाव बनाने के आरोप लगा रहे हैं. इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि का इंतजार है.

  10. कनाडा: गुरुद्वारे में चाकू लगने से दो लोग घायल, क्या बोले प्रधानमंत्री मार्क कार्नी?

    सिख गुरुद्वारा

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    इमेज कैप्शन, पुलिस के मुताबिक, यह घटना शुक्रवार सुबह करीब 5 बजे एडमंटन के बड़े नानकसर गुरुद्वारे में हुई

    कनाडा के एडमंटन में एक गुरुद्वारे में शुक्रवार सुबह चाकूबाजी की घटना में दो लोग घायल हो गए. पुलिस ने बताया कि इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है.

    पुलिस के मुताबिक, यह घटना शुक्रवार सुबह करीब 5 बजे एडमंटन के बड़े नानकसर गुरुद्वारे में हुई.

    पुलिस ने आरोपी की पहचान या हमले की वजह के बारे में जानकारी नहीं दी है.

    कनाडा स्थित वर्ल्ड सिख ऑर्गेनाइजेशन ने इस घटना को चिंताजनक बताया है. संगठन का कहना है कि यह हमला देश में बढ़ती "सिख विरोधी नफ़रत" के बीच हुआ है.

    कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने एक्स पर पोस्ट कर इस हमले को दुखद और चौंकाने वाला बताया.

    उन्होंने लिखा, "एडमंटन के नानकसर गुरुद्वारे में आज सुबह हुआ हमला चिंताजनक है. मेरी संवेदनाएं इस घटना में घायल उन दो लोगों के साथ हैं. साथ ही मेरी संवेदनाएं उस पूरी समुदाय के साथ भी हैं, जो इस घटना से सदमे में है."

    "किसी भी व्यक्ति को अपने धार्मिक स्थल पर कभी भी असुरक्षित महसूस नहीं करना चाहिए. मैं एडमंटन पुलिस सर्विस का तेजी से कार्रवाई करने के लिए धन्यवाद करता हूं."

    पुलिस ने बताया कि एक व्यक्ति गुरुद्वारे में दाखिल हुआ और वो प्रार्थना वाले हिस्से में जाने की कोशिश कर रहा था. कर्मचारियों ने उसे रोकने की कोशिश की, जिसके बाद मामला बढ़ गया और उसने गुरुद्वारे में मौजूद दो पुरुष श्रद्धालुओं पर चाकू से हमला कर दिया.

    कार्यवाहक इंस्पेक्टर एरिक स्टीवर्ट ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वहां मौजूद लोगों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को पकड़ लिया.

    पुलिस के मुताबिक, घायल दोनों लोगों की उम्र 75 और 51 साल है. दोनों को गंभीर चोटें नहीं आई हैं और उनकी हालत स्थिर है.

  11. इसराइल के पीएम नेतन्याहू ने तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन को लेकर कही कई बातें

    बिन्यामिन नेतन्याहू

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    इमेज कैप्शन, इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू

    इसराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने शुक्रवार को बयान जारी कर तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन को "यहूदी-विरोधी और तानाशाह" बताया है.

    एक्स पर जारी बयान में इसराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा है, "अर्दोआनएक यहूदी-विरोधी तानाशाह हैं, जिन्होंने कुर्दों का जनसंहार किया है. हमास के आतंकवादियों को पनाह दी है, साइप्रस के आधे हिस्से पर क़ब्ज़ा कर रखा है, और उसका विरोध करने वाले रिकॉर्ड संख्या में पत्रकारों और राजनेताओं को जेल में डाल दिया है."

    इसराइली प्रधानमंत्री कार्यालय ने आरोप लगाया कि "अर्दोआन अब इसराइल के ख़िलाफ़ अपनी आक्रामकता को सीरिया तक बढ़ाना चाहते हैं, जिसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे."

    बयान में कहा, “इसराइल के नेताओं और सैनिकों को डराने-धमकाने की अर्दोआन की यह कोशिश किसी काम नहीं आएगी.”

  12. स्मृति इरानी ने राहुल गांधी के थाने पहुँचने पर क्या कहा?

    स्मृति ईरानी

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    इमेज कैप्शन, बीजेपी नेता ने राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या उन्होंने कभी अर्धसैनिक बलों और पुलिस पर हमला करने वालों के ख़िलाफ़ जांच की मांग की (फ़ाइल फ़ोटो)

    लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पर प्रदर्शन को लेकर बीजेपी नेता स्मृति इरानी ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बात करते हुए राहुल गांधी से कुछ सवाल पूछे.

    स्मृति ईरानी ने कहा, "राहुल गांधी ने कब खुद को अदालतों के अधिकार के अधीन माना है? गांधी परिवार खुद को संसद, सुप्रीम कोर्ट और देश के कानून से भी ऊपर समझता है. ऐसे में उनकी नज़र में एक पुलिस थाने की क्या हैसियत है?"

    उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने राहुल गांधी से बार-बार इस मुद्दे पर चर्चा करने और सवाल पूछने के लिए आने को कहा था.

    स्मृति ईरानी के मुताबिक, गृह मंत्री ने राहुल गांधी के हर सवाल का जवाब देने की बात कही थी.

    बीजेपी नेता ने राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या उन्होंने कभी अर्धसैनिक बलों और पुलिस पर हमला करने वालों के ख़िलाफ़ जांच की मांग की. उन्होंने यह भी पूछा कि क्या राहुल गांधी ने सेना का अपमान करने वालों के ख़िलाफ़ जांच की मांग की थी.

    उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता ने इस मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक फ़ायदा उठाने के लिए किया, जबकि मामले की जांच पहले से ही चल रही थी.

    दरअसल, राहुल गांधी शुक्रवार को साहिल लोचब को 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान लगी चोट को लेकर एफ़आईआर दर्ज कराने पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचे थे. आरोप है कि साहिल 20 जुलाई को पैलेट गन से घायल हुए थे.

    एफ़आईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर वह थाने के बाहर धरने पर बैठ गए थे. उनकी मांग थी कि साहिल लोचब की ओर से दी गई लिखित पुलिस शिकायत के आधार पर एफ़आईआर दर्ज की जाए. हालांकि, बाद में एफ़आईआर दर्ज कर ली गई.

  13. डोनाल्ड ट्रंप बोले, 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को मैं अब अमेरिकी क्षेत्र के तौर पर देखता हूं'

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा हुआ तो “बहुत बुरा” होगा

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साउथ कैरोलाइना में एक चुनावी रैली के दौरान कहा कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को अब 'अमेरिकी क्षेत्र' के तौर पर देखते हैं.

    उन्होंने यह भी कहा, "ईरान “समझौता करना चाहता है, लेकिन मेरी राय में वह सही समझौते के लिए अभी तैयार नहीं है."

    ट्रंप ने कहा कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा हुआ तो “बहुत बुरा” होगा.

    उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका ने इलाके में अपनी बड़ी सैन्य मौजूदगी बरकरार रखने के साथ-साथ ईरान पर आर्थिक दबाव भी बढ़ा दिया है.

    अमेरिका सोमवार को ईरान के ख़िलाफ़ नई पाबंदियों की जानकारी देने वाला है. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक़, इन प्रतिबंधों का असर चीन समेत ईरान के कुछ बड़े कारोबारी साझेदारों पर भी पड़ सकता है.

    ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ अब भी प्रमुख केंद्र बना हुआ है. इस जलमार्ग से तेल टैंकरों और दूसरे कारोबारी जहाजों की आवाजाही भी काफ़ी कम हो गई है.

    वहीं शुक्रवार को जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या ईरान के ख़िलाफ़ "आर्थिक युद्ध" का रुख़ यह दिखाता है कि अमेरिका के सैन्य विकल्प सीमित हो गए हैं, तो ट्रंप ने कहा, "नहीं, बिल्कुल नहीं."

    ट्रंप ने कहा कि अमेरिका हालात पर नज़र रख रहा है और “देख रहा है कि क्या होता है.”

  14. यूक्रेन में रूस का डबल-टैप ड्रोन हमला, 15 की मौत, क्या बोले ज़ेलेंस्की

    शॉपिंग सेंटर

    इमेज स्रोत, Oleksandr Hanzha / Dnipropetrovsk regional administration

    इमेज कैप्शन, स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में 130 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 23 बच्चे भी शामिल हैं. कई लोगों के अब भी मलबे में फंसे होने की आशंका है

    रूस के ड्रोन हमले में यूक्रेन के क्रिवी रिह शहर के एक शॉपिंग सेंटर में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई है.

    स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में 130 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 23 बच्चे भी शामिल हैं. कई लोगों के अब भी मलबे में फंसे होने की आशंका है.

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने बताया कि उनके होम टाउन में हुआ यह हमला दिन के वक्त दो चरणों में किया गया. उन्होंने इसे “बेहद निंदनीय और घिनौना” हमला बताया.

    ज़ेलेंस्की के मुताबिक, दूसरे ड्रोन हमले में उन बचावकर्मियों को निशाना बनाया गया, जो पहले हमले के बाद मौक़े पर राहत और बचाव का काम कर रहे थे.

    बीबीसी ने एक वीडियो को वेरीफाई किया है, इस वीडियो में देखा जा सकता है कि दूसरा ड्रोन पहले से जल रहे शॉपिंग सेंटर से टकराता है. यह हमला यूक्रेन के द्निप्रोपेत्रोव्स्क इलाक़े में हुआ. रूस की सेना की ओर से इस हमले पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

    द्निप्रोपेत्रोव्स्क क्षेत्र के प्रमुख ओलेक्ज़ांद्र हांझा ने शुक्रवार शाम बताया कि मरने वालों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है. इनमें दो लोग ऐसे थे, जिनकी बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई.

    अधिकारियों के मुताबिक, 130 लोग घायल हुए हैं और इनमें 29 की हालत गंभीर बनी हुई है. ऐसे में मरने वालों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

    मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए यूक्रेन के चार अन्य इलाक़ों से भी बचाव दलों को तत्काल क्रिवी रिह भेजा जा रहा है.

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