कर्नाटक के बेलगावी में एक बुज़ुर्ग दंपति की मौत हो गई. शुरुआती तौर पर मामला ख़ुदकुशी का बताया जा रहा है क्योंकि पुलिस ने घटनास्थल से दंपति का सुसाइड नोट बरामद किया है.
पुलिस के मुताबिक़ इस सुसाइड नोट में लिखा है कि दंपति को दो व्यक्तियों, सुमित बिर्रा और अनिल यादव, ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर धमकी दी थी.
82 साल के डियागो सांता नाज़रेथ और 79 साल की उनकी पत्नी फ्लावियाना ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि ‘किसी की दया पर नहीं जीना’.
नाज़रेथ से कथित तौर पर दिल्ली के साइबर जालसाजों ने संपर्क किया था, उन लोगों ने ख़ुद को दूरसंचार विभाग का प्रतिनिधि बताया था.
जालसाजों ने कथित तौर पर नाज़रेथ पर सिम कार्ड के ज़रिए ‘आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने’ का आरोप लगाया था.
नाज़रेथ को सबसे पहले सुमित बिर्रा नाम के व्यक्ति का फ़ोन आया था. इस व्यक्ति ने नाज़रेथ को उनके फोन का इस्तेमाल अवैध विज्ञापनों के लिए होने की बात कही.
इसके बाद नाज़रेथ को एक दूसरे नंबर पर संपर्क करने के लिए कहा गया, इस नंबर पर बात करने वाले व्यक्ति ने ख़ुद को साइबर पुलिस का अधिकारी का बताया.
अनिल यादव के नाम से बात करने वाले इस व्यक्ति ने नाज़रेथ को उनके फोन के अवैध इस्तेमाल को लेकर डराया.
जानकारी के मुताबिक़ दंपति को कथित तौर पर तीन महीने तक लगातार परेशान किया गया. बुज़ुर्ग दंपति ने जालसाजों को पहले पांच लाख रुपये दिए और इसके बाद और रकम ट्रांसफर की.
बेलगावी के पुलिस अधीक्षक भीमाशंकर गुलेड ने बीबीसी हिंदी को बताया, "हमें अभी भी नहीं पता कि दंपति से कुल कितनी रकम लूटी गई. अभी तक हमें पता है कि 50 लाख रुपये से अधिक की रकम ट्रांसफर की गई.”
इस मामले में जालसाजों को दी गई रकम की पुष्टि न होने की एक वजह शुरुआती जांच में सामने आए सबूत भी हैं.
पुलिस अधीक्षक भीमाशंकर गुलेड ने बताया, “कुछ पेमेंट संदिग्ध खातों में किए गए. धोखाधड़ी करने वालों के पास कितना पैसा गया और ऑनलाइन जुए में कितना पैसा गया, इसका पता लगाना अभी बाकी है.”
दंपति ने साइबर जालसाजों की धमकियों से बचने के लिए दोस्तों से कर्ज भी लिया था. पुलिस को लिखे गए नोट में उन्होंने घर और सोने की चूड़ियां जैसी अपनी संपत्ति बेचकर जुटाए गए पैसे से कर्ज चुकाने की बात लिखी है.
नाज़रेथ महाराष्ट्र सरकार के सेवानिवृत्त अधिकारी थे. वो बेलगावी के खानपुर तालुका में रह रहे थे. नाज़रेथ और फ्लावियाना की कोई संतान नहीं है.
कर्नाटक में यह पहला मामला है, जिसमें साइबर धोखाधड़ी के शिकार पक्ष की ख़ुदकुशी की बात सामने आई है. हालांकि, देश के दूसरे हिस्सों से ऐसे मामले सामने आ चुके हैं.
नाम न बताने की शर्त पर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बीबीसी हिंदी को बताया, "हमें नहीं पता कि देश में कितने लोगों ने साइबर धोखाधड़ी के कारण ख़ुदकुशी की है. हमें उन मामलों के बारे में पता है जो हमारे संज्ञान में आए हैं, लेकिन हमें नहीं पता कि साइबर जालसाजों से ठगे जाने के कारण कितने लोगों की मौत दिल के दौरे या दूसरी समस्याओं के कारण हुई है.”
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