दिल्ली के राजेंद्र
नगर हादसे के बाद दिल्ली में कई कोचिंग सेंटर को प्रशासन ने सील कर दिया है,
जिनमें दृष्टि आईएएस भी शामिल है.
टीम दृष्टि की तरफ़ से
घटना और उसके बाद की परिस्थितियों पर खेद व्यक्त किया गया है. साथ ही अपना पक्ष
देरी से रखने के लिए माफ़ी मांगी गई है.
राजेंद्र नगर में एक यूपीएससी कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने की वजह से तीन छात्रों की मौत हुई थी. इस घटना के बाद कुछ छात्र मुखर्जी नगर में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
दृष्टि आईएएस की प्रेस विज्ञप्ति में
छात्रों के ग़ुस्से को न्यायसंगत बताते हुए कहा गया है कि, "इस रोष को सही दिशा
मिलनी चाहिए. और सरकार कोचिंग सेंटरों के लिए दिशा-निर्देश जारी करे."
विज्ञप्ति में कहा गया
है, "इस समस्या के कई पक्ष हैं. इनके तार क़ानूनों की अस्पष्टता से जुड़े हैं.
डीडीए, एमसीडी और दिल्ली फ़ायर
डिपार्टमेंट के नियमों में अंतर हैं. दिल्ली मास्टरप्लान-2021, नेशनल बिल्डिंग कोड, दिल्ली फ़ायर रूल्स और
यूनिफ़ाइड बिल्डिंग बाई-लॉज़ के प्रावधानों में भी काफी अंतर्विरोध हैं.
"दिल्ली मास्टरप्लान-2021 को छोड़कर बाकी किसी भी दस्तावेज़ में कोचिंग सेंटरों
के लिए स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं. हमें उम्मीद है कि जब एक महीने में केंद्रीय गृह
मंत्रालय की तरफ से नियुक्त समिति रिपोर्ट पेश करेगी, तब यहां बताई गई
अधिकतर बातों का समाधान मिल सकेगा."
दृष्टि आईएएस ने प्रेस
विज्ञप्ति में कहा, "हम छात्रों की सुरक्षा को लेकर सतर्क हैं. इसके लिए मैनेजमेंट में फ़ायर एंड
सेफ्टी ऑफ़िसर का विशेष पद है. जो सभी इमारतों में नियमित सेफ्टी ऑडिट करते हैं.
साथ ही प्रत्येक इमारत के लिए एक-एक अधिकारी भी रोज़ाना सुरक्षा के 16 बिंदुओं की
जांच करता है. इसकी सूचना बिल्डिंग मैंटेनेंस ग्रुप पर अपडेट होती है."
दृष्टि आईएएस ने आगे
कहा, "हमारे क्लासरूम जहां भी हैं, उन इमारतों में आने-जाने के लिए कम से कम दो रास्ते हैं. ताकि इमरजेंसी के
हालात में छात्र सुरक्षित निकल सकें."
"समस्या का स्थायी समाधान यही है कि सरकार दिल्ली में 3-4 स्थानों को कोचिंग
सेंटरों के लिए चुने. अगर सरकार क्लासरूम, लाइब्रेरी, हॉस्टल खुद तैयार
कराएगी, तो अधिक किराए और
सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों की समस्या नहीं रहेगी."