ट्रंप ने जिन देशों पर टैरिफ़ का ऐलान किया, उसमें रूस का नाम क्यों नहीं है?

अमेरिका ने बीते बुधवार को कई देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ़ की घोषणा की. इसमें जिन देशों की लिस्ट जारी की गई, उसमें रूस का नाम नहीं है.

सारांश

लाइव कवरेज

कीर्ति रावत और सुरभि गुप्ता

  1. अब इस लाइव पेज को विराम देने का वक़्त आ गया है. बीबीसी संवाददाता सुरभि गुप्ता को दीजिए इजाज़त.

    कल हम बीबीसी लाइव पेज के ज़रिए दिन भर की बड़ी ख़बरों को लेकर फिर हाज़िर होंगे.

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  2. ट्रंप ने जिन देशों पर टैरिफ़ का ऐलान किया, उसमें रूस का नाम क्यों नहीं है?, विटाली शेवचेंको, रूस संपादक, बीबीसी मॉनिटरिंग

    ट्रंप और पुतिन

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    अमेरिका ने बीते बुधवार को कई देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ़ की घोषणा की. इसमें जिन देशों की लिस्ट जारी की गई, उसमें रूस का नाम नहीं है.

    अमेरिकी आउटलेट एक्सियोस ने व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट के हवाले से कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि रूस पर मौजूदा अमेरिकी प्रतिबंध 'व्यावहारिक तौर पर किसी भी व्यापार को रोकते हैं'.

    लेविट ने कहा कि क्यूबा, ​​बेलारूस और उत्तर कोरिया भी टैरिफ़ वाली लिस्ट शामिल नहीं हैं.

    बता दें कि अमेरिका ने 2022 में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद रूस पर बड़े पैमाने पर प्रतिबंध लगाए थे. हालांकि, ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के बाद रूस के प्रति दोस्ताना रवैया दिखाया है.

  3. टैरिफ़ की घोषणा के बाद ट्रंप का पहला पोस्ट, कहा- ऑपरेशन पूरा हुआ

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत समेत 100 देशों पर टैरिफ़ बढ़ाने की घोषणा की थी.

    रेसिप्रोकल टैरिफ़ की घोषणा के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहला सोशल मीडिया पोस्ट किया है. 'ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म' पर ट्रंप ने लिखा कि 'ऑपरेशन पूरा'.

    ट्रंप ने पोस्ट किया, "ऑपरेशन पूरा हो गया है! मरीज़ बच गया है, और ठीक हो रहा है. ऐसा लग रहा है कि मरीज़ पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत, बड़ा, बेहतर और समर्थ होगा. अमेरिका को फिर से महान बनाएं!!!"

    बता दें कि ट्रंप ने अमेरिका में आयात पर टैरिफ़ की एक लंबी लिस्ट की घोषणा की है.

    अमेरिकी समयानुसार, 5 अप्रैल से ज़्यादातर देशों, जिसमें ब्रिटेन भी शामिल है, पर 10 प्रतिशत का बेसलाइन टैरिफ़ भी लागू होगा. वहीं 9 अप्रैल से अमेरिका के कुछ सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों पर ऊंचे आयात शुल्क लागू होंगे.

  4. वरिष्ठ जेडी(यू) नेता मोहम्मद कासिम अंसारी ने छोड़ी पार्टी, नीतीश कुमार को दिए इस्तीफ़े में क्या वजह बताई?

    जेडी(यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार

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    जेडी(यू) के वरिष्ठ नेता मोहम्मद कासिम अंसारी ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और दूसरी जिम्मेदारियों से त्याग पत्र दे दिया है.

    जेडी(यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को लिखे त्याग पत्र में मोहम्मद कासिम अंसारी ने वक़्फ़ संशोधन विधेयक को लेकर पार्टी के रुख पर नाराज़गी जताई है.

    मोहम्मद कासिम अंसारी का इस्तीफ़ा

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    मोहम्मद कासिम अंसारी ने लिखा, "वक़्फ़ बिल हम भारतीय मुसलमानों के विरुद्ध है. हम किसी भी सूरत में इसे स्वीकार नहीं कर सकते. यह बिल कई मौलिक अधिकारों का हनन करता है. इस बिल से भारतीय मुसलमानों को ज़लील और रुसवा किया जा रहा है."

    उन्होंने आगे लिखा,"मुझे अफसोस हो रहा है कि अपनी ज़िंदगी के कई वर्ष पार्टी को दिए."

  5. ट्रंप की टैरिफ़ घोषणा के बाद गिरावट के साथ खुले अमेरिकी शेयर बाज़ार

    न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेडर्स

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    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दुनिया भर के देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ़ की घोषणा के बाद अमेरिकी शेयर बाज़ार गिरावट के साथ खुले.

    कारोबार के शुरुआत में अमेरिका के स्टॉक एक्सचेंजों में लिस्टेड 30 प्रमुख कंपनियों के शेयर बाजार सूचकांक डॉव जोन्स में 2.8% की गिरावट दर्ज की गई.

    वहीं एसएंडपी 500 में 3.3% की गिरावट दर्ज की गई. एसएंडपी 500, एक शेयर बाजार सूचकांक है, जो अमेरिका के स्टॉक एक्सचेंजों में लिस्टेड 500 अग्रणी कंपनियों के स्टॉक प्रदर्शन पर नज़र रखता है.

    जिन घरेलू नामों के मूल्य में गिरावट आई है, उनमें नाइकी (एक वक्त पर 11% की गिरावट), गैप (18%) और अमेज़ॅन (7%) शामिल हैं.

    सोलर एनर्जी से जुड़ी कंपनियों के शेयर मूल्यों में भी शुरुआती कारोबार में गिरावट देखी गई. सनरन में 7% की गिरावट, जबकि मैक्सियन में 3% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई.

    बता दें कि शेयर मूल्य दिन भर में वापस बढ़ सकते हैं, इसलिए ज़रूरी नहीं है कि ये गिरावट स्थायी हो.

  6. संजय राउत बोले- ट्रंप के टैरिफ़ से ध्यान हटाने के लिए वक़्फ़ (संशोधन) विधेयक ले आई मोदी सरकार

    शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत

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    शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने मोदी सरकार की ओर से वक़्फ़ (संशोधन) विधेयक पारित करने को 'ध्यान भटकाने की रणनीति' बताया है.

    उन्होंने अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए गए टैरिफ़ का ज़िक्र करते हुए कहा, "कल ही राष्ट्रपति ट्रंप ने हिंदुस्तान पर 26 प्रतिशत टैरिफ़ का आक्रमण किया. उसी दिन आप ये (वक़्फ़) बिल लेकर आए."

    राज्यसभा में संजय राउत ने कहा, "चर्चा होनी चाहिए थी कि ट्रंप ने जो टैरिफ़ लगाया, उससे हमारे देश पर क्या प्रभाव पड़ेगा? हमारी अर्थव्यवस्था गिरेगी. रुपया गिर जाएगा. इन बातों से आपने ध्यान हटा दिया और हिंदू-मुसलमान पर ध्यान ला दिया."

    उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी बेरोज़गारी, महंगाई जैसे आर्थिक मुद्दे आते है, मोदी सरकार धार्मिक मुद्दे ले आती है.

    शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने कहा कि कल से दोनों सदनों में अचानक गरीब मुसलमानों की बहुत चिंता हो रही है, इतनी चिंता हो रही है कि मुझे डर लगने लगा है.

  7. टैरिफ़ पर भारत सरकार के जवाब को कांग्रेस ने बताया- 'कायराना प्रतिक्रिया'

    सुप्रिया श्रीनेत

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    इमेज कैप्शन, कांग्रेस की सुप्रिया श्रीनेत ने मोदी सरकार को घेरा

    अमेरिका की ओर से भारत पर टैरिफ़ लगाए जाने के फ़ैसले पर भारत सरकार की ओर से जो जवाब जारी किया गया है, उस पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.

    कांग्रेस की सुप्रिया श्रीनेत ने अमेरिकी टैरिफ़ पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी जवाब को 'कमज़ोर और कायराना प्रतिक्रिया' कहा है.

    सुप्रिया श्रीनेत ने एक्स पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति शेयर करते हुए लिखा, "टैरिफ़ निर्णय, जिससे हमारी अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों के तबाह होने का ख़तरा है, उस पर भारत सरकार की यह कितनी निरीह, ​​कमज़ोर और कायराना प्रतिक्रिया है."

    उन्होंंने आगे लिखा, "मोदी जी और उनकी टीम, अब बोलने का समय है, खुशामद करने का नहीं!"

    बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत पर टैरिफ़ की घोषणा की गई है. इस पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है.

    इसमें कहा गया, "वाणिज्य विभाग अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से की गई घोषणाओं की सावधानी से जांच कर रहा है. विकसित भारत के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए, विभाग भारतीय उद्योग और निर्यातकों सहित सभी हितधारकों के साथ मिलकर टैरिफ़ पर उनके आकलन का फीडबैक ले रहा है."

    आगे बताया गया, "वाणिज्य विभाग अमेरिकी व्यापार नीति में इस नए घटनाक्रम से बनने वाले अवसरों का भी अध्ययन कर रहा है."

  8. ममता बनर्जी का आरोप- देश को बांटने के लिए वक़्फ़ (संशोधन) विधेयक लेकर आई है भाजपा

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी

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    इमेज कैप्शन, वक़्फ़ (संशोधन) विधेयक पर सीएम ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वक़्फ़ (संशोधन) विधेयक को लेकर गुरुवार को मोदी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा देश को बांटने के लिए वक़्फ़ (संशोधन) विधेयक लेकर आई है.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि मोदी सरकार को हटाने के बाद जब नई सरकार बनेगी, तो इस विधेयक को निरस्त करने का संशोधन लाया जाएगा.

    उन्होंने कहा, "जब मौजूदा सरकार को हटाने के बाद नई सरकार बनेगी, तो हम भाजपा द्वारा लाए गए वक़्फ़ विधेयक को निरस्त करने के लिए नया संशोधन लाएंगे."

    बता दें कि लोकसभा में वक़्फ़ (संशोधन) विधेयक पर 12 घंटे की लंबी बहस के बाद गुरुवार को इसे पारित कर दिया गया. लोकसभा में ये विधेयक पास होने के बाद इसे राज्यसभा में पेश किया गया, जिस पर फिलहाल चर्चा चल रही है.

  9. लोकसभा में वक़्फ़ संशोधन बिल पास होने पर बोले सीएम योगी- वक़्फ़ बोर्ड की मनमानी पर लगी लगाम

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

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    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वक़्फ़ संशोधन बिल को 'वक़्फ़ बोर्ड की मनमानी पर लगाम' बताया है.

    योगी आदित्यनाथ ने कहा, "जब हम महाकुंभ का आयोजन कर रहे थे, तो वक़्फ़ बोर्ड ने मनमाने ढंग से बयान दिया कि प्रयागराज में कुंभ की भूमि भी वक़्फ़ की भूमि है. यह वक़्फ़ बोर्ड है या 'भू-माफिया' बोर्ड है?"

    उन्होंने आगे कहा, "हम प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के आभारी हैं कि उन्होंने लोकसभा में इस महत्वपूर्ण अधिनियम को पारित करके वक़्फ़ बोर्ड की मनमानी पर लगाम लगाई है."

    बता दें कि वक्फ़ संशोधन बिल लोकसभा में पास हो गया है. बिल के पक्ष में 288 और विरोध में 232 वोट पड़े. वहीं गुरुवार को इसे राज्यसभा में भी पेश किया गया और इस पर बहस चल रही है

  10. लोकसभा में राहुल गांधी का सवाल- अमेरिकी टैरिफ़ के मुद्दे पर क्या करेगी मोदी सरकार?

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी

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    कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सवाल किया है कि मोदी सरकार अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए जाने वाले टैरिफ़ के मुद्दे पर क्या करने जा रही है.

    लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत पर 26 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ़ (जवाबी शुल्क) लगाए जाने का मुद्दा बृहस्पतिवार को लोकसभा में उठाया.

    राहुल गांधी ने कहा, "हमारे एक मित्र देश ने अचानक हम पर 26 प्रतिशत टैरिफ़ लगाने का फैसला किया, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से तबाह कर देगा."

    टैरिफ़ पर राहुल गांधी

    इस दौरान राहुल गांधी ने भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का ज़िक्र किया. उन्होंने कहा, "एक बार किसी ने इंदिरा गांधी से पूछा था कि विदेश नीति के मामले में आप बायीं ओर झुकेंगी या दायीं ओर, इंदिरा जी ने जवाब दिया था कि मैं बायीं या दायीं तरफ नहीं झुकूंगी, मैं सीधी खड़ी रहूंगी, मैं भारतीय हूं और मैं सीधी खड़ी रहूंगी."

    राहुल गांधी ने बीजेपी और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा, "वहीं बीजेपी और आरएसएस का अलग सिद्धांत है, ये कहते हैं कि हम सामने आने वाले हर विदेशी के आगे नतमस्तक हो जाएंगे. ये उनकी संस्कृति और इतिहास में है."

  11. रात भर चली ओडिशा विधानसभा की कार्यवाही, सुब्रत कुमार पति, भुवनेश्वर से बीबीसी हिंदी के लिए

    ओडिशा विधानसभा

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    ओडिशा विधानसभा की कार्यवाही बुधवार को पूरी रात चली. आज सुबह 4.29 बजे ओडिशा विधानसभा में विश्वविद्यालय (संशोधन) बिल 2024 पारित हुआ.

    रातभर चली विधानसभा की इस कार्यवाही में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने हिस्सा लिया.

    बिल पारित होने के कुछ समय बाद ही, 17वीं ओडिशा विधानसभा का बजट सत्र अपने निर्धारित समापन से तीन दिन पहले अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया.

    विधानसभा का कार्य बुधवार सुबह 10:30 बजे शुरू हुआ था, जो गुरुवार सुबह 7 बजे तक बिना किसी रुकावट के चलता रहा.

    विधानसभा में काम करने का नियम रात 9 बजे तक है. लेकिन बुधवार को इसमें कुछ बदलाव किए गए, जिसकी वजह से गुरुवार सुबह 7 बजे तक विधानसभा की कार्यवाही चली.

    ओडिशा विधानसभा में बिल पारित होने के बाद, उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यबंशी सूरज ने चर्चा में भाग लेने के लिए विधानसभा के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया.

  12. राज्यसभा में पेश हुआ वक़्फ़ संशोधन बिल, किरेन रिजिजू ने क्या कहा?

    केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू

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    इमेज कैप्शन, केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू

    केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को राज्यसभा में वक़्फ़ संशोधन विधेयक पेश किया.

    राज्यसभा में किरेन रिजिजू ने कहा, "जब हम ये वक़्फ़ (संशोधन) बिल लेकर आए उससे पहले हमारे अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने व्यापक रूप से देश भर में जितने स्टेकहोल्डर्स हैं, सबसे बातचीत करने के बाद ये बिल तैयार करके हमने सदन में पेश किया."

    किरेन रिजिजू ने बताया कि इस विधेयक को सदन में पेश किए जाने से पहले इसे लेकर राज्य सरकारों से, राज्यों के अल्पसंख्यक कमीशन से, वक़्फ़ बोर्ड और वहां के अधिकारियों और धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों से बातचीत की गई.

    रिजिजू ने कहा, " फिर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का गठन हुआ. इस जेपीसी ने जो काम किया है, इससे ज़्यादा, इतना लंबा और इतना व्यापक काम आजतक नहीं हुआ है."

    रिजिजू ने कहा कि कुल मिलाकर 284 संगठन, अलग-अलग क्षेत्र के लोगों ने इस पर अपनी बातें रखीं, ज्ञापन सौंपा.

    उन्होंने कहा, "इस पर 1 करोड़ से ज़्यादा लोगों ने ज्ञापन सौंपा है. किसी बिल की सदन में चर्चा से पहले 1 करोड़ से ज़्यादा सुझाव मिलना, अपने आप में ऐतिहासिक है."

    बता दें कि वक़्फ़ संशोधन बिल लोकसभा में पास हो चुका है. इसके पक्ष में 288 और विरोध में 232 वोट पड़े.

  13. अभी तक बीबीसी संवाददाता कीर्ति रावत आप तक ख़बरें पहुंचा रही थीं.

    अब से रात 10 बजे तक बीबीसी संवाददाता सुरभि गुप्ता आप तक अहम ख़बरें पहुंचाएंगी.

    बीबीसी हिंदी के पन्ने पर लगी कुछ अहम ख़बरें नीचे दिए लिंक्स पर क्लिक करके आप पढ़ सकते हैं.

    - ट्रंप के टैरिफ़ से किन उत्पादों को मिली छूट, किन पर गिरी गाज

    - क्या वयस्कों के लिए ब्रेस्ट मिल्क पीना फायदेमंद है?

    - भारत पर 26% टैरिफ़ लगाने के बाद बोले ट्रंप 'मोदी मेरे दोस्त', जानिए दस अहम बातें

    - आरसीबी से हटाए गए सिराज ने लिया 'बदला', गुजरात को दिलाई शानदार जीत

  14. ट्रंप के टैरिफ़ पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री स्टार्मर बोले- मैं भी ब्रिटेन के हित में फ़ैसला लूंगा

    ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर
    इमेज कैप्शन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने कहा टैरिफ़ से जुड़ा कोई भी फ़ैसला जल्दबाज़ी में नहीं लिया जाएगा.

    ट्रंप की ओर से लगाए गए टैरिफ़ पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने प्रतिक्रिया दी है.

    उन्होंने कहा, "कल रात अमेरिका के राष्ट्रपति ने अपने देश के हित में फ़ैसला लिया. आज मैं ब्रिटेन के हित में फ़ैसला लूंगा."

    "आने वाले दिनों और हफ़्तों में हम जो भी फ़ैसला लेंगे वह सिर्फ़ और सिर्फ़ हमारे राष्ट्रीय, अर्थव्यवस्था, बिजनेस और कामकाजी लोगों के हित में होगा."

    किएर स्टार्मर कहते हैं, "यह साफ़ है कि अमेरिका के इस फ़ैसले का असर हमारी और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. लेकिन मैं साफ़ कहना चाहता हूं, हम इसके लिए पूरी तरह से तैयार हैं. हमारी सबसे बड़ी ताक़त है कि हम हर स्थिति में शांत और समझदारी से काम लेते हैं."

    किएर स्टार्मर ने यह भी कहा, "ट्रेड युद्ध कोई जीतता नहीं है और यह हमारे हित में नहीं है."

    किएर स्टार्मर ने बताया कि वो डोनाल्ड ट्रंप के साथ कोई भी समझौता तभी करेंगे, जब वह ब्रिटेन के लिए फ़ायदेमंद होगा.

  15. लोकसभा में वक़्फ़ संशोधन बिल पारित होने पर क्या बोले ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य

    ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली

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    इमेज कैप्शन, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने वक़्फ़ संशोधन बिल को अदालत में चुनौती देने की बात कही है.

    बुधवार को लोकसभा में वक़्फ़ संशोधन बिल पास होने पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने समाचार एजेंसी एएनआई को बयान दिया है.

    उन्होंने कहा, "हम लोगों को कहीं ना कहीं ये उम्मीद थी कि जेडीयू और टीडीपी इस बिल का विरोध करेंगे क्योंकि इन दोनों राजनीतिक दलों को उनके राज्यों में मुसलमानों ने काफ़ी सहयोग दिया है. लेकिन अफ़सोस की बात ये है कि इन दोनों दलों ने इस बिल का विरोध नहीं किया. इससे मुसलमानों में बड़े पैमाने पर मायूसी पैदा हुई हैं."

    मौलाना खालिद ने भी बताया कि अगर वक़्फ़ संशोधन बिल राज्यसभा में पास हो गया तो ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इस बिल को अदालत में चुनौती देगा.

    मौलाना खालिद कहते हैं, "हमें उम्मीद हैं कि इस बिल में जो संवैधानिक कमियां है उसकी बुनियाद पर हमें अदालत से राहत और इंसाफ़ मिलेगा."

    लोकसभा में बुधवार को वक्फ़ संशोधन बिल के पक्ष में 288 और विरोध में 232 वोट पड़े. बुधवार को अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने ये संशोधन बिल पेश किया था.

    लोकसभा से हरी झंडी मिलने के बाद अब ये बिल गुरुवार को राज्य सभा में पेश किया जाएगा.

  16. शिक्षकों की नियुक्ति रद्द करने वाले कलकत्ता हाई कोर्ट के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रखा बरक़रार, उमंग पोद्दार, बीबीसी संवाददाता

    सुप्रीम कोर्ट

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    इमेज कैप्शन, सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता के 25,000 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती को रद्द कर दिया है

    सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कलकत्ता हाई कोर्ट के उस फ़ैसले को बरकरार रखा, जिसमें साल 2016 में पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग की ओर से की गई 25,000 शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया था.

    कलकत्ता हाईकोर्ट ने इन नियुक्तियों को रद्द करने का फ़ैसला इसलिए लिया क्योंकि इन भार्तियों में धोखाधड़ी और ओएमआर शीट्स में हेरफेर की गई थी.

    सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के फ़ैसले को सही ठहराने के साथ- साथ इसमें कुछ बदलाव भी किए.

    कोर्ट ने कहा, “भर्ती की पूरी प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है, जिससे विश्वसनीयता ख़त्म हो गई है. ऐसे उम्मीदवार, जिनकी नियुक्ति में धांधली हुई है, उन्हें हटाया जाना चाहिए क्योंकि ये भर्ती प्रक्रिया धोखाधड़ी पर आधारित थी.”

    कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फ़ैसले को बदल दिया है जिसमें कहा गया था कि गड़बड़ी से भर्ती हुए उम्मीदवारों को अब तक मिली सैलरी वापिस करनी होगी.

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उन्हें अब तक मिली सैलरी वापस नहीं करनी होगी.

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि नई भर्ती की प्रक्रिया 3 महीने के अंदर पूरी होनी चाहिए.

    साथ में कोर्ट ने यह भी कहा, "जो उम्मीदवार इस घोटाले में शामिल नहीं थे, उन्हें नई भर्ती प्रक्रिया में कुछ छूट दी जा सकती है."

    इस मामले में सीबीआई जांच अभी भी जारी है.

    कोर्ट के इस फ़ैसले की अभी लिखित कॉपी जारी नहीं हुई है.

  17. यूरोपीय संघ ने टैरिफ़ को बताया दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका

    यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन

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    इमेज कैप्शन, यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि ट्रंप के लगाए गए टैरिफ़ से कमजोर वर्ग को काफ़ी नुकसान होगा

    अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ़ को यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बहुत बड़ा झटका बताया है.

    उन्होंने कहा, “यह साफ है कि इसके गंभीर परिणाम होंगे, वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचेगा, अनिश्चितता बढ़ेगी और लाखों लोगों को इसका नुकसान झेलना पड़ेगा.”

    वॉन डेर लेयेन ने यह भी कहा कि टैरिफ़ का असर तुरंत दिखेगा और टैरिफ़ से खासकर कमजोर वर्ग को नुकसान होगा.

    अपने बयान के अंत में वॉन डेर लेयेन ने यूरोप की एकजुटता पर जोर दिया.

    उन्होंने कहा, “हम सब (यूरोप) इसमें एक साथ खड़े हैं. अगर आप हममें से किसी एक को निशाना बनाते हैं, तो आप हम सभी को चुनौती दे रहे हैं. हमारी एकता ही हमारी ताकत है.”

  18. ट्रंप के टैरिफ़ एलान के बाद चीन ने अमेरिका से टैरिफ़ वापिस लेने की अपील

    चीन के वाणिज्य मंत्री

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    इमेज कैप्शन, चीन के वाणिज्य मंत्री वांग वेन्ताओ (फ़ाइल फ़ोटो)

    चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने अमेरिका से अपील की है कि वो इन एकतरफ़ा लगाए गए टैरिफ़ को तुरंत वापिस ले और अपने साझेदारों के साथ मिलकर बातचीत के जरिए ट्रेड से जुड़े विवादों का सही समाधान निकाले.

    वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, "चीन इस फ़ैसले का कड़ा विरोध करता है और अपने अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए मज़बूत कदम उठाएगा."

    इससे पहले चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ़ पर टिप्पणी की.

    समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने कहा कि ट्रंप ट्रेड को एक 'बदले की लड़ाई' बना रहे हैं.

    ट्रंप के टैरिफ़ के एलान का सबसे ज्यादा असर चीन पर हुआ है क्योंकि अब सभी चीनी सामानों पर 34 फ़ीसदी और टैरिफ़ लगा दिया गया है.

    इससे पहले अमेरिका ने चार मार्च को चीन से आने वाले सामान पर 20 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाया था.

  19. ट्रंप ने इन एशियाई देशों पर लगाया भारी टैरिफ़, क्या होगा असर?, निखिल इनामदार, बीबीसी न्यूज़, मुंबई

    जापान का शेयर बाज़ार

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    इमेज कैप्शन, ट्रंप के टैरिफ़ एलान के बाद जापान के शेयर बाज़ार पर दिखता असर

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ़ के एलान के बाद से एशियाई देशों पर ख़ासा असर पड़ा है. ट्रंप ने चीन पर 34 फ़ीसदी, वियतनाम पर 46 फ़ीसदी और कंबोडिया पर 49 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाया है.

    लेकिन इन देशों की तुलना में भारत की स्थिति काफ़ी बेहतर है.

    एशिया डिकोडेड की प्रियंका किशोर के मुताबिक़, भारत के लिए 26 फ़ीसदी टैरिफ़ काफ़ी ज़्यादा है और इससे भारत के कामगार बुरी तरह से प्रभावित होंगे.

    प्रियंका किशोर का कहना है कि इससे भारत के घरेलू बाज़ार की मांग घट सकती है और भारत की आर्थिक वृद्धि पर असर पड़ेगा, ख़ासकर जब अर्थव्यवस्था पहले से ही धीमी हो रही है.

    हालांकि, भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को थोड़ा फ़ायदा हो सकता है, क्योंकि वियतनाम जैसे देशों पर ज़्यादा टैरिफ़ लगाने से व्यापार मार्ग बदल सकता है.

    फिर भी, ट्रंप के इस फ़ैसले से भारत की अर्थव्यवस्था को नुक़सान होने की संभावना बनी रहेगी.

    कनाडा, मेक्सिको और यूरोपीय संघ के मुकाबले भारत ने ट्रंप के साथ नरमी बरती है और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा है.

    अब देखना होगा कि इस नए टैरिफ़ के बाद भारत कोई जवाबी कदम उठाता है या नहीं.

    हालांकि, भारत का सबसे बड़ा औद्योगिक निर्यात – फार्मा उद्योग (लगभग 13 अरब डॉलर) राहत की सांस ले सकता है, क्योंकि ट्रंप के लगाए गए टैरिफ़ में दवाओं पर छूट दी गई है.

  20. टैरिफ़ के एलान से दुनिया के कई नेताओं ने जताई चिंता, ऑस्ट्रेलिया बोला - ये दोस्त का काम नहीं

    स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ़ क्रिस्टर्सन और दक्षिण कोरिया के कार्यवाहक राष्ट्रपति हान डक-सू

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    इमेज कैप्शन, स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ़ क्रिस्टर्सन (बाएं) और दक्षिण कोरिया के कार्यवाहक राष्ट्रपति हान डक-सू (दाएं) (फ़ाइल फ़ोटो)

    अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ़ की घोषणा के बाद कई देशों के नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.

    स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ़ क्रिस्टर्सन ने कहा, “हम बढ़ते ट्रेड में रुकावट नहीं चाहते हैं. हम ट्रेड युद्ध नहीं चाहते हैं. हम अमेरिका के साथ व्यापार और सहयोग के रास्ते पर लौटना चाहते हैं, ताकि दोनों देशों के लोग बेहतर जीवन जी सकें.”

    वहीं दक्षिण कोरिया के कार्यवाहक राष्ट्रपति हान डक-सू ने वैश्विक व्यापार युद्ध की वास्तविकता को स्वीकार करते हुए कहा कि सरकार को इस व्यापार संकट से निपटने के लिए अपनी सभी क्षमताओं का उपयोग करना चाहिए.

    कोलंबिया की विदेश मंत्री लौरा साराबिया ने कहा कि हम इस पर गौर कर रहे हैं कि ताकि देश के उद्योग और निर्यातकों की सुरक्षा की जा सकें.

    ब्राज़ील की सरकार ने अमेरिका की ओर से लगाए ट्रैरिफ़ पर एक बयान जारी किया है.

    उन्होंने जारी बयान में कहा कि वह द्विपक्षीय व्यापार में पारस्परिकता सुनिश्चित करने के लिए सभी संभावित कदमों का मूल्यांकन कर रहे हैं, जिसमें विश्व व्यापार संगठन का सहारा लेना भी शामिल है, ताकि वैध राष्ट्रीय हितों की रक्षा की जा सके.

    अमेरिका ने दक्षिण कोरिया पर 25 फ़ीसदी, कोलांबिया और ब्राज़ील पर 10 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाया है.

    इस बीच ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने कहा कि टैरिफ 'अप्रत्याशित नहीं' हैं, लेकिन वे 'पूरी तरह से अनुचित' हैं.

    उन्होंने कहा, "टैरिफ की घोषणा का कोई तर्क नहीं है. ये ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के बीच की साझेदारी के ख़िलाफ़ हैं. यह किसी दोस्त का काम नहीं है."