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ट्रंप को कैपिटल हिल दंगा मामले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर मुकदमे की सुनवाई के दौरान अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है.

सारांश

  • हंगामे के साथ हुई संसद सत्र की शुरुआत, राहुल गांधी के 'हिंदुओं' पर दिए बयान पर हंगामा
  • एनआईए ने दी इंजीनियर राशिद को शपथ लेने की मंज़ूरी, अफ़ज़ाल अंसारी को स्पीकर ने दिलाई शपथ
  • भारत में एक जुलाई से लागू हुए तीन नए आपराधिक कानून, शीतकालीन सत्र में हुए थे पास
  • फ़्रांस के संसदीय चुनाव में पिछड़े राष्ट्रपति मैक्रों, धुर दक्षिणपंथी दल को बढ़त

लाइव कवरेज

मुकुन्द झा, संदीप राय

  1. ट्रंप को कैपिटल हिल दंगा मामले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत

    अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर मुकदमे की सुनवाई के दौरान अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है.

    कैपिटल हिल दंगा मामले में सुनवाई करते हुए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कुछ हद तक इम्युनिटी (छूट) होने की बात कही है.

    जजों ने 6-3 से फ़ैसला दिया कि 'ट्रंप को उनके आधिकारिक कृत्यों के लिए अभियोजन से छूट' प्राप्त है और उनके अनाधिकारिक कामों के लिए कोई भी छूट नहीं है.

    क्या आधिकारिक है और क्या नहीं इसे तय करने के लिए सर्वोच्च अदालत ने मामले को निचली अदालत में भेज दिया.

    लेकिन इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिशा निर्देश भी तय किए हैं.

    हालांकि जजों ने कहा कि ट्रंप के निजी दस्तावेजों को सबूत के रूप में पेश नहीं किया जा सकता.

    असहमति व्यक्त करने वाले तीन लिबरल जजों में से एक सोनिया सोटोमेयर ने लिखा कि ‘इस फ़ैसले से राष्ट्रपति अब क़ानून से ऊपर राजा हो गए हैं.’

    राष्ट्रपति चुनावों से पहले आए इस फैसले को ट्रंप एक बड़ी जीत के रूप में देख रहे हैं.

    कैपिटल हिल दंगा और 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों को पलटने की कथित कोशिश के मामले में ट्रंप के ख़िलाफ़ मामले की अब निचली अदालत में सुनवाई होगी.

    रिपब्लिकन पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ख़ुशी ज़ाहिर की है.

    एरिज़ोना से रिपब्लिकन सीनेटर मार्शा ब्लैकबर्न ने लिखा, “शानदार ख़बर, क़ानून ने एक अवैध राजनीतिक उत्पीड़न को धाराशाई कर दिया.”

    डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

    वर्जीनिया से डेमोक्रेटिक रिप्रेजेंटेटिव गैरी कोनोली ने कहा, “यह एक शर्मनाक फैसला है और यह आने वाले सालों तक हमें सताएगा.”

    फ़ैसले पर बाइडन की ओर से प्रतिक्रिया

    बाइडन के प्रचार अभियान ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ‘6 जनवरी को जो कुछ हुआ, इससे वे तथ्य बदल नहीं जाएंगे.’

    बाइडन कैंपेन ने एक बयान जारी कर कहा, “2020 चुनाव हारने के बाद डोनाल्ड ट्रंप आपा खो बैठे और उन्होंने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के नतीजों को धता बताने के लिए भीड़ को उकसाया.”

    असल में बाइडन का प्रचार अभियान मतदाताओं को लगातार ये बताने की कोशिश कर रहा है कि ‘ट्रंप लोकतंत्र के लिए ख़तरा हैं.’

    अमेरिका में पांच नवंबर को राष्ट्रपति का चुनाव होने वाला है.

  2. मेधा पाटकर को दो दशक पुराने मानहानि मामले में पांच महीने की सज़ा

    सामाजिक कार्यकर्ता और नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर को 20 साल पहले के एक मामले में दिल्ली की एक कोर्ट ने पांच महीने की सज़ा सुनाई है.

    यह मामला क़रीब 20 साल पहले का है जब तत्कालीन खादी और ग्रामोद्योग आयोग चेयरमैन वीके सक्सेना (मौजूदा दिल्ली एलजी) ने उनके ख़िलाफ़ मानहानि का एक आपराधिक मामला दर्ज कराया था.

    समाचार एजेंसी एएनाई के अनुसार, अदालत ने पाटकर से हर्जाने के रूप में 10 लाख रुपये वीके सक्सेना को देने का आदेश दिया.

    इस फैसले को लेकर समाचार एजेंसी एएनआई से मेधा पाटकर ने कहा, "सत्य पराजित नहीं होता है. हम लोग जो काम कर रहे हैं, वो हमारी दृष्टि से दलितों, आदिवासियों, ग़रीबों के लिए है और इसलिए विकास के नाम पर विनाश, विस्थापन और विषमता नहीं चाहते हैं. ये हमारा काम है, हमने किसी को बदनाम करने की कोई मंशा नहीं रखी."

    उन्होंने कहा कि इस मामले में आगे क़ानून के तहत चुनौती दी जाएगी.

    दिल्ली कोर्ट ने सज़ा के ख़िलाफ़ अपील के लिए मेधा पाटकर को 30 दिन का समय दिया है.

    वीके सक्सेना के वकील ने कोर्ट से कहा कि वो कोई हर्जाना नहीं चाहते हैं और वो इसे दिल्ली स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी को दे सकती हैं.

    लेकिन कोर्ट ने कहा कि यह राशि शिकायतकर्ता को दी जाएगी उसके बाद वो इसे अपनी मर्ज़ी से किसी को भी दे सकते हैं.

    बीते 24 मई को कोर्ट ने मेधा पाटकर को मानहानि के मामले दोषी ठहराया था.

  3. राहुल के 'हिंदू' वाले बयान पर अरुण गोविल और फ़ैज़ाबाद सांसद अवधेश प्रसाद ने क्या कहा?

    संसद सत्र के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से 'हिंदू' से जुड़ी टिप्पणी को लेकर बीजेपी के सांसद अरुण गोविल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.

    अरुण गोविल ने कहा, “राहुल गांधी ने बहुत ग़लत बयान दिया जिसे उन्हें नहीं देना चाहिए था. मैं एक हिंदू हूं और गर्व से कहता हूं कि हिंदू हूं. और उन्हें सारे हिंदुओं से माफ़ी मांगनी चाहिए.”

    उन्होंने कहा,“उन्होंने आज काफ़ी ड्रामा करने की कोशिश की लेकिन माफ़ करिए उन्हें ड्रामा करने आता नहीं है. ड्रामा के लिए कंटेंट की समझ होनी चाहिए. उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाया गया है लेकिन तकलीफ़ हुई देख कर कि विपक्ष का नेता कैसा होना चाहिए.”

    अरुण गोविल रामायण सीरियल में भगवान राम की भूमिका अदा करते मशहूर हुए थे और उन्हें इस बार बीजेपी ने मेरठ से टिकट दिया था.

    उधर, फ़ैज़ाबाद सीट से बीजेपी को हराने वाले समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा,"राहुल गांधी ने हिंदुओं के बारे में नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी की मानसिकता के बारे में कहा. आरएसएस की मानसिकता और विचारधारा के बारे में कहा."

    इंडिया गठबंधन की ओर से डिप्टी स्पीकर के लिए अपने नाम की चर्चा पर उन्होंने कहा “मुझे इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है.”

  4. राहुल के 'हिंदू' वाले बयान पर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा?

    संसद सत्र के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 'हिंदू' वाले बयान पर बीजेपी की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आ रही है.

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, "हम मानते थे कि नेता प्रतिपक्ष होने के बाद राहुल गांधी परिपक्व होंगे, लेकिन मुझे खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि उनका बयान बचकाने से उभर नहीं पाया है. एक अपरिपक्व व्यक्ति ही ऐसी बात करेगा."

    उन्होंने कहा, "हिंदू भारत का मूल समाज है, भारत की आत्मा है."

    उन्होंने कहा, "हिंदू कोई जाति सूचक या साम्प्रदायिक सूचक शब्द नहीं है, मत और पंथ से अलग भारत की मूल आत्मा है. हिंदू धर्म के बारे में राहुल गांधी की टिप्पणी सत्य से परे भारत की मूल आत्मा को लहूलुहान करने जैसी है."

    उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिए.

    केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, "कांग्रेस के मन में हिंदू विरोधी मानसिकता अभी भी है और यह फिर से साबित हुआ है. हिंदू धर्म के ख़िलाफ़ कितनी नफ़रत उनके मन में है यह पूरी दुनिया के सामने यह सिद्ध हो गया है."

    राहुल गांधी ने क्या कहा था

    सोमवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद सत्र में अपने एक वक्तव्य में भगवान शिव का ज़िक्र करते हुए बीजेपी पर लगातार हिंसा और नफ़रत फैलाने का आरोप लगाया.

    उन्होंने कहा, "शिवजी कहते हैं कि डरो मत डराओ मत, अभय मुद्रा दिखाते हैं और त्रिशूल को ज़मीन में गाड़ देते हैं."

    इसके बाद सत्ता पक्ष की इशारा करते हुए राहुल गांधी ने कहा, "जो लोग खुद को हिंदू कहते हैं, वो 24 घंटे हिंसा और नफ़रत की, असत्य की बात करते हैं."

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी की इस टिप्पणी पर सदन में खड़े होकर आपत्ति दर्ज की.

    उन्होंने कहा, "विषय बहुत गंभीर है, पूरे हिंदू समाज को हिंसक कहना ये गंभीर विषय है."

  5. निष्कासन के बाद संसद पहुंची महुआ मोइत्रा ने अपने पहले भाषण में क्या कहा?

    17वीं लोकसभा में निष्कासित होने के बाद जीत कर वापस पहुंची महुआ मोइत्रा ने संसद में मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला.

    टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, "जब पिछली बार मैं यहां खड़ी हुई थी तो मुझे बोलने नहीं दिया गया था. लेकिन रूलिंग पार्टी ने एक सांसद की आवाज़ दबाने के लिए भारी क़ीमत चुकाई है. मुझे बिठाने की कोशिश में, जनता ने आपके 63 सांसदों को बैठा दिया."

    तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा को 'पैसे लेकर सवाल पूछने' के मामले में 17वीं लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया था.

    यह कार्रवाई संसद की एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर की गई, जिसमें महुआ पर 'अनैतिक आचरण' और 'गंभीर रूप से ख़राब आचरण' का दोषी पाते हुए उनके निष्कासन की सिफ़ारिश की गई थी.

    तब महुआ मोइत्रा ने एथिक्स कमेटी को कंगारू कोर्ट क़रार दिया था और कहा था कि अदानी को बचाने के लिए मोदी सरकार क्या कुछ कर सकती है.'

  6. लोकसभा में राहुल के 'हिंदू' वाले बयान पर हंगामा, पीएम मोदी ने कहा- 'ये गंभीर विषय है'

    सोमवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद सत्र में अपने एक वक्तव्य में भगवान शिव का ज़िक्र करते हुए बीजेपी पर लगातार हिंसा और नफ़रत फैलाने का आरोप लगाया.

    उन्होंने कहा, "शिवजी कहते हैं कि डरो मत डराओ मत, अभय मुद्रा दिखाते हैं और त्रिशूल को ज़मीन में गाड़ देते हैं."

    इसके बाद सत्ता पक्ष की इशारा करते हुए राहुल गांधी ने कहा, "जो लोग खुद को हिंदू कहते हैं, वो 24 घंटे हिंसा और नफ़रत की, असत्य की बात करते हैं."

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी की इस टिप्पणी पर सदन में खड़े होकर आपत्ति दर्ज की.

    उन्होंने कहा, "विषय बहुत गंभीर है, पूरे हिंदू समाज को हिंसक कहना ये गंभीर विषय है."

    राहुल की टिप्पणी पर क्या बोले नेता

    केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा, "राहुल गांधी और कांग्रेस डिप्रेशन में हैं. उन्होंने पूरी तरह झूठ बोला है. हमें राहुल गांधी से सहानुभूति होनी चाहिए क्योंकि बीते 20 सालों से वो प्रधानमंत्री बनना चाहते थे लेकिन जनता ने मौका नहीं दिया."

    कांग्रेस एमपीकेसी वेणुगोपालने कहा, "राहुल गांधी ने बताया कि असली हिंदू कौन है. उन्होंने बताया है कि बीजेपी प्रायोजित हिंदू अलग हैं. वे केवल चुनावों में ध्रुवीकरण के लिए हिंदुओं का इस्तेमाल करते हैं."

  7. राहुल गांधी ने अग्निवीर को बताया ‘यूज एंड थ्रो मजदूर’, राजनाथ सिंह क्या बोले

    सोमवार को संसद सत्र के दौरान अग्निवीर योजना के मुद्दे पर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी नोकझोंक हुई.

    सफ़ाई देने के लिए विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाषण के बीच खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उठ खड़े हुए.

    दरअसल अग्निवीर को लेकर राहुल गांधी ने तीखा हमला बोला और कहा, "एक बारूदी सुरंग से एक अग्निवीर शहीद हुआ. मैं उसे शहीद कह रहा हूं लेकिन भारत सरकार और नरेंद्र मोदी उसे शहीद नहीं कहते, उसे अग्निवीर कहते हैं, उसे पेंशन नहीं मिलेगी. उस घर को मुआवज़ा नहीं मिलेगा. शहीद का दर्जा नहीं मिलेगा."

    राहुल गांधी ने कहा, "भारत के एक आम जवान को पेंशन मिलेगी लेकिन एक अग्निवीर को जवान नहीं कहा जा सकता. अग्निवीर यूज़ एंड थ्रो मज़दूर हैं. उसे आप छह महीने की ट्रेनिंग देते हैं जिसे दूसरी तरफ़ पांच साल की ट्रेनिंग पाए चीन के जवान के सामने खड़ा कर दिया जाता है."

    सरकार पर उन्होंने आरोप लगाया, "एक जवान और दूसरे जवान के बीच फूट डाल देते हो. एक को पेंशन मिलेगी, शहीद का दर्ज़ा मिलेगा और दूसरे को न तो पेंशन मिलेगी न ही शहीद का दर्जा मिलेगा. और फिर अपने आपको देश भक्त कहते हो. ये कैसे देश भक्त हैं."

    राहुल गांधी के भाषण के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खड़े होकर सफ़ाई दी और कहा, "ग़लतबयानी करके सदन को गुमराह करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए."

    उन्होंने कहा, "मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि युद्ध के दौरान या सीमा सुरक्षा के दौरान अगर किसी अग्निवीर की मौत होती है तो उसके परिजन को एक करोड़ रुपये की सहायता राशि मुहैया कराई जाती है."

    हालांकि इस मुद्दे पर कुछ देर तक दोनों तरफ़ से टीका टिप्पणी की गई.

  8. भारत ने दक्षिण अफ्रीका को एकमात्र टेस्ट में 10 विकेट से हराया, शेफाली और स्नेह ने रचा इतिहास

    भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने दक्षिण अफ्रीका को एकमात्र टेस्ट मैच में 10 विकेट से हरा दिया है.

    दोनों देशों के बीच एकमात्र टेस्ट मैच चेन्नई के एम चिदंबरम स्टेडियम में खेला गया. इस टेस्ट मैच में कप्तान हरमनप्रीत कौर ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग का फैसला किया था.

    पहले बैटिंग करते हुए भारत ने पहली पारी में 6 विकेट के नुकसान पर 603 रन बनाकर पारी घोषित कर दी.

    पहली पारी के जवाब में दक्षिण अफ्रीका की टीम 266 रन ही बना सकी. भारत ने दक्षिण अफ्रीका को फॉलोऑन खेलने के लिए बुलाया.

    दक्षिण अफ्रीका ने दूसरी पारी में 373 रन बनाए. इस तरह से भारत को जीत के लिए 37 रन का लक्ष्य मिला, जिसे टीम ने बिना विकेट गंवाए हासिल कर लिया.

    इस मैच में शेफाली वर्मा ने भारत की ओर से पहली पारी में 205 रन बनाए. वह टेस्ट क्रिकेट में दोहरा शतक लगाने वाली दूसरी भारतीय महिला क्रिकेटर बन गई हैं.

    वहीं स्नेह राणा ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहली पारी में 77 रन देकर आठ विकेट हासिल किए. स्नेह राणा टेस्ट क्रिकेट में एक पारी में आठ विकेट हासिल करने वालीं तीसरी महिला क्रिकेटर हैं.

  9. राहुल गांधी ने संसद में दिखाई भगवान शिव की तस्वीर, स्पीकर के टोकने पर सदन में हंगामा

    सोमवार को संसद सत्र के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाषण के दौरान भारी हंगामा देखने को मिला.

    राहुल गांधी ने अपने भाषण के बीच भगवान शिव की तस्वीर दिखाई, जिसके बाद स्पीकर ओम बिड़ला ने उन्हें रोका.

    इसके बाद स्पीकर और विपक्षी सदस्यों में नोकझोंक शुरू हो गई. राहुल गांधी ने कहा कि क्या वो यह तस्वीर नहीं दिखा सकते हैं.

    इस पर स्पीकर ओम बिड़ला ने संसदीय कार्यवाही के नियमावली का हवाला दिया और कहा कि नियमों के मुताबिक संसद में किसी प्लेकार्ड या तस्वीर को नहीं दिखाया जा सकता है.

    राहुल गांधी ने कहा, "क्या इस सदन में शिव भगवान की तस्वीर दिखाना मना है."

    राहुल गांधी ने कहा, "हमें शिवजी से प्रोटेक्शन मिली और यही बात चित्र दिखाकर समझाना चाहता हूं, लेकिन आप इसे दिखाने नहीं दे रहे."

    राहुल गांधी ने कहा कि उनके पास और कई चित्र हैं, जिन्हें वो दिखाना चाहते हैं.

  10. फ़्रांस आम चुनाव: पहली बार धुर दक्षिणपंथी पार्टी के सत्ता में आने के आसार

    फ़्रांस के संसदीय चुनाव के पहले राउंड में धुर दक्षिणपंथी पार्टी नेशनल रैली ने 33.14% वोट के साथ भारी बढ़त बना ली है.

    रविवार को हुए चुनाव के रुझानों से नेशनल रैली पार्टी के समर्थकों के बीच खुशी की लहर है.

    दूसरे राउंड की वोटिंग रविवार को होनी है और इस बढ़त को देखते हुए हो सकता है कि फ़्रांस में एक धुर दक्षिणपंथी सरकार बने.

    हालांकि कुछ राजनेता धुर दक्षिणपंथी उम्मीदवारों को सत्ता में जाने से रोकने के लिए मतदाताओं से रणनीतिक वोटिंग करने का आह्वान कर रहे हैं.

    लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि दूसरे राउंड के बाद किसी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलेगा.

    फ़्रांस के राष्ट्रीय चुनावों में इससे पहले कभी भी धुर दक्षिणपंथी दल पहले दौर का चुनाव नहीं जीते हैं.

    नेशनल रैली पार्टी के नेता मरीन ले पेन और जॉर्डन बारडेला, फ़्रांस की 577 सीटों वाली संसद 'नेशनल असेंबली' में 289 सीटों के साथ बहुमत हासिल करना चाहते हैं.

    फ़्रांस के मौजूदा राष्ट्रपति मैक्रों का सेंट्रिस्ट गठबंधन 21% वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहा.

    दूसरे नंबर पर धुर वामपंथी न्यू पॉपुलर फ़्रंट को क़रीब 28 प्रतिशत वोट मिले हैं.

  11. पश्चिम बंगाल में युवा जोड़े को सरेआम पीटा गया, विपक्षी पार्टियां तृणमूल पर हमलावर

    पश्चिम बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर ज़िले से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है जिसमें देखा जा सकता है कि एक युवा जोड़े को बुरी तरह से पीटा जा रहा है.

    आरोप है कि महिला और पुरुष के बीच विवाहेतर संबंध थे और इसी कारण गांव में एक सभा बुलाकर इन्हें सार्वजनिक तौर पर ये सज़ा दी गई.

    बीबीसी हिंदी इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है.

    वीडियो के वायरल होने बाद रविवार को बीजेपी समेत बंगाल की तमाम विपक्षी पार्टियां टीएमसी पर हमलावर हो गईं.

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पुलिस ने इस मामले में तजमुल उर्फ़ जेसीबी नाम के शख्स को गिरफ़्तार किया है.

    बताया जा रहा है कि वीडियो में जोड़े को पीटता हुआ शख्स जेसीबी ही है जो कि चोपड़ा विधानसभा में टीएमसी का ही स्थानीय का कार्यकर्ता है.

    हालांकि टीएमसी ने तजमुल के पार्टी से किसी भी तरह के संबंध होने से इंकार किया है. स्थानीय विधायक हमीदुल रहमान के एक बयान ने इस मामले में नया विवाद पैदा कर दिया है.

    एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में हमीदुल ने कहा कि वीडियो में जो महिला नज़र आ रही है वो अवैध गतिविधियों में शामिल थी. ये गांव का मुद्दा है और इसका पार्टी से कोई लेनादेना नहीं है.

    विधायक ने कहा, "हम इस घटना की निंदा करते हैं. लेकिन महिला ने भी गलत किया. उसने अपने पति, बेटा और बेटी को छोड़ दिया और शैतान बन गई. मुस्लिम राष्ट्र में कुछ नियम और कानून हैं. हालांकि हम ये मानते हैं कि जो हुआ वो कुछ ज़्यादा था. अब इस मामले में कानूनी कार्रवाई की जाएगी."

    बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष और केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा,"टीएमसी के हमीदुल रहमान मुस्लिम राष्ट्र की बात कर रहे हैं और ऐसी सज़ा की बात कर रहे हैं जिनका वहां प्रावधान है वो चिंता का विषय है. क्या टीएमसी एक ऐसे राज्य की घोषणा कर रही है जहां शरिया कानून लागू होगा?"

    बंगाल सीपीएम के सचिव मोहम्मद सलीम ने ट्वीट किया,"कंगारू कोर्ट भी नहीं. छोटी सी सुनवाई और टीएमसी के गुंडे जेसीबी के द्वारा सज़ा दी गई. ममता बनर्जी के शासन में चोपड़ा में बुलडोज़र न्याय. जिसने ये वीडियो बनाया उसे घर से निकाल दिया गया है.तृणमूल कांग्रेस का ऐसा शासन है.

    मोहम्मद सलीम ने ये भी कहा "जेसीबी', कॉमरेड मनसूर आलम की हत्या का भी आरोपी है. बंगाल में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के सौजन्य से हत्याएं बड़े पैमाने पर हो रही हैं.''

    इस्लामपुर पुलिस ने मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए केस दर्ज़ किया था और जेसीबी को गिरफ़्तार भी किया.

  12. एनआईए ने दी इंजीनियर राशिद को शपथ लेने की मंज़ूरी, अफ़ज़ाल अंसारी को स्पीकर ने दिलायी शपथ

    राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने जेल में बंद कश्मीरी नेता शेख़ अब्दुल राशिद उर्फ़ इंजीनियर राशिद को संसद सदस्य पद की शपथ लेने के लिए अनुमति दे दी है. मंगलवार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट के एडिशनल सेशन जज चंद्र जीत सिंह इस मामले में एक आदेश जारी करेंगे.

    बारामुला से निर्दलीय लोकसभा का चुनाव जीतने वाले इंजीनियर राशिद को साल 2017 में आतंकी वित्तपोषण के मामले में गिरफ़्तार किया गया था. संसद सदस्य की शपथ लेने और अपने कामकाज को संभालने के लिए राशिद ने अदालत में अंतरिम ज़मानत या हिरासत में पैरोल के लिए याचिका दायर की थी.

    22 जून को अदालत ने मामले को स्थगित करते हुए एनआईए से जवाब दाखिल करने के लिए कहा था. सोमवार को एनआईए के वकील ने कहा कि राशिद को इन शर्तों पर ज़मानत दी गई है कि वो न तो मीडिया से बात करेंगे और वो अपने सारे काम एक ही दिन में खत्म कर लें.

    वहीं ग़ाज़ीपुर से समाजवादी पार्टी की टिकट पर जीतकर आए सांसद अफ़ज़ाल अंसारी ने भी सोमवार को शपथ ली. कुछ कानूनी मामलों के कारण वो पहले शपथ नहीं ले पाए थे. सोमवार को उन्हें स्पीकर ओम बिरला ने शपथ दिलायी. अफ़ज़ाल अंसारी ने स्पीकर ओम बिरला का आभार जताया.

    साथ ही नए आपराधिक कानूनों पर अंसारी ने कहा कि ये कानून तो पहले से ही थे सरकार ने सिर्फ़ नाम बदले हैं.

    अफ़ज़ाल ने कहा, "कुछ नाम बदले हैं बाकी कानून में क्या बदलाव किया गया है उसका अध्ययन किया जाएगा...कानूनविद और उसके जानकार...हर कानून अच्छा होता है...उसका दुरुपयोग जो किया जाता है वो बुरा होता है...इस सरकार में लगातार कानून का दुरुपयोग होता रहा है...पुराने कानून का भी दुरुपयोग किया गया अब नए कानून का भी दुरुपयोग नहीं करेंगे वो देखना होगा."

    कई सांसदों ने संसद सदस्य पद की शपथ नहीं ली थी जिसमें इंजीनियर राशिद, अफ़ज़ाल अंसारी, अमृतपाल सिंह और शत्रुघ्न सिन्हा शामिल थे.

  13. हंगामे के साथ हुई संसद सत्र की शुरुआत, विपक्ष ने किया वॉकआउट

    सोमवार को संसद सत्र की शुरुआत हंगामेदार रही. सत्र शुरू होने से पहले स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि स्थगन प्रस्ताव को अनुमति नहीं दी है इसके बाद शोर होने लगा और शोरगुल के बीच स्पीकर ओम बिरला ने भी सफाई दी कि वो माइक बंद नहीं करते.

    ओम बिरला ने कहा, "कई माननीय सदस्य बाहर ये आरोप लगाते हैं कि पीठासीन या सीट पर बैठे व्यक्ति माइक बंद कर देते हैं... आसन से व्यवस्था रहती है. व्यवस्था रहती है दूसरे नाम की तो दूसरा नाम दिया जाता है."

    "आसन से व्यवस्था के अनुसार माइक का कंट्रोल दे दिया जाता है. आसन पर बैठे व्यक्ति के पास माइक के कंट्रोल नहीं होता...इसलिए मेरा आग्रह है कि कोई भी व्यक्ति सभापित तालिका, आसन पर बैठे इस तरह का आक्षेप नहीं करेंगे तो उचित रहेगा. संविधान की मर्यादा के अनुसार रहेंगे."

    ओम बिरला ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को भी बोलने के लिए मौका दिया. बिरला ने खुद से पूछा कि आप बोलने के लिए खड़े हुए आप कुछ कहना चाहते हैं.

    राहुल ने कहा, "हम चाहते थे कि नीट पर एक दिन की चर्चा हो...काफी जरूरी मामला है...दो करोड़ युवाओं का नुकसान हुआ है...70 बार बीते सात सालों में पेपर लीक हुए हैं. हम चाहते थे कि एक दिन इसपर चर्चा हो."

    इसके बाद ओम बिरला ने बताया कि राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद दें और इस दौरान न तो शून्यकाल होगा और न कोई स्थगन प्रस्ताव लिया जाएगा. ऐसा पहले ही व्यवस्था दी गई है.

    राहुल गांधी फिर खड़े हुए और बोले, "संसद से देश को संदेश जाता है और हम छात्रों को संदेश देना चाहते हैं कि जो नीट का मुद्दा है वो संसद के लिए जरूरी है. इसलिए हम एक दिन की चर्चा चाहते हैं."

    राहुल की इस मांग के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सदन में खड़े हुए और बोले कि संसद नियम और कानून से चलता है. अगर चर्चा करनी ही है तो एक बार राष्ट्रपति से संबंधित जो धन्यवाद प्रस्ताव है उसे पारित करने के बाद ही करें.

    नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राजनाथ सिंह की इस बात को सहमति जताते हुए कहा कि "ऐसा करते हैं कि राष्ट्रपति का धन्यवाद प्रस्ताव पास हो जाने के बाद एक दिन चर्चा के लिए देते हैं."

    इसके बाद विपक्षी दलों के सांसद सदन से बाहर निकले और संसद के कैंपस में सरकार के खिलाफ़ प्रदर्शन शुरू कर दिया.

  14. तीन नए आपराधिक क़ानून आज से हुए लागू, जानिए क्या-क्या बदल गया

  15. नए आपराधिक क़ानून को लेकर कांग्रेस ने उठाए कई गंभीर सवाल

    एक जुलाई 2024 से देश में तीन नए आपराधिक क़ानून लागू हो गए हैं. 17वीं लोकसभा के शीतकालीन सत्र में ये तीनों क़ानून पास किए गए थे. मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस शुरुआत से ही इन क़ानूनों का विरोध कर रही है.

    सोमवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ट्वीट कर इन क़ानूनों की और सरकार के रवैये की निंदा की है.

    खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर ट्वीट किया, "चुनाव में राजनीतिक और नैतिक झटके के बाद मोदी जी और भाजपा वाले संविधान का आदर करने का ख़ूब दिखावा कर रहें हैं, पर सच तो ये है कि आज से जो तीन क़ानून लागू हो रहे हैं, वो 146 सांसदों को सस्पेंड कर जबरन पारित किए गए. 'इंडिया' अब ये “बुल्डोज़र न्याय” संसदीय प्रणाली पर नहीं चलने देगा."

    कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने भी नए आपराधिक क़ानूनों के लागू होने पर आपत्ति दर्ज़ की है. मनीष तिवारी ने इन कानूनों पर फिर से विचार करने की बात कही है.

    मनीष तिवारी ने ट्वीट किया, "नए आपराधिक क़ानून एक जुलाई से लागू हो गए - जो भारत को एक पुलिस स्टेट में बदलने का आधार रखता है. इन्हें लागू होने से रोका जाना चाहिए और संसद को फिर से इनकी जांच करनी चाहिए."

    सोमवार से लागू हुए नए आपराधिक कानून भारतीय आपराधिक न्यायिक प्रणाली में बड़े बदलाव लाएंगे. भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम में मौजूदा वक्त के कई सामाजिक कुरीतियों और कई अपराधों को भी शामिल किया गया है.

  16. श्रीलंका के दिग्गज तमिल सांसद का निधन, बीते 23 साल से थे तमिल नेशनल अलायंस के अध्यक्ष

    श्रीलंका के सबसे कद्दावर नेताओं में से एक और देश में तमिल अल्पसंख्यकों की प्रमुख आवाज़ रहे राजावरोथियम संपथन का कोलंबो में 91 साल की उम्र में निधन हो गया.

    पेशे से वकील रहे राजावरोथियम संपथन श्रीलंका के राजनीतिक इतिहास में सबसे लंबे वक्त तक सांसद रहे नेताओं में से एक थे. राजावरोथियम संपथन, श्रीलंका के उत्तर और पूर्वी इलाकों में बसने वाले तमिल समुदाय के लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले मुख्य राजनीतिक संगठन 'तमिल नेशनल अलायंस' के बीते 23 सालों से अध्यक्ष थे.

    साल 2009 में अलगाववादी गुट तमिल टाइगर के खात्मे के बाद संपथन ने लगातार श्रीलंका में हाशिये पर आ चुके अपने तमिल समुदाय के लिए समान अधिकारों की मांग की थी. तमिल नेशनल अलायंस के नेता एमए सुमंथिरन ने सोशल मीडिया एक्स पर राजावरोथियम संपथन के निधन की पुष्टि की है.

    साल 2015 में राजावरोथियम संपथन को श्रीलंका में विपक्ष का नेता चुना गया था. श्रीलंका में 32 सालों में किसी अल्पसंख्यक समुदाय के नेता को ये पद मिला था. साल 2022 में संपथन ने "तमिल अल्पसंख्यकों के खिलाफ़ होने वाली उत्पीड़न की जांच में असफ़ल" श्रीलंका सरकार पर आरोप लगाते हुए संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार संगठन को चिट्ठी लिखी थी.

    संपथन के निधन पर श्रीलंका के दूसरे दलों के नेताओं ने भी शोक व्यक्त किया है. शोक व्यक्त करने वालों में श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्शा भी शामिल हैं, जो साल 2009 में खत्म हुई श्रीलंकाई गृहयुद्ध के खिलाफ़ अभियान का नेतृत्व कर रहे थे.

  17. सिद्धारमैया बनाम शिवकुमार की राजनीति में कूदे वोक्कालिगा संत और 'अहिंदा'

    कर्नाटक कांग्रेस में क्या सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है? एक बार फिर से सिद्धारमैया बनाम डीके शिवकुमार की अंदरूनी कलह ख़बरों में है.

    विश्व वोक्कालिगा महासंस्थान मठ के संत चंद्रशेखर स्वामी ने सार्वजनिक तौर पर ये मांग की है कि सीएम सिद्धारमैया अपने डिप्टी डीके शिवकुमार के लिए रास्ता बनाएं.

    इसके बाद सिद्धारमैया के सबसे बड़े समर्थक गुट 'अहिंदा' ने राज्य भर में सिद्धारमैया के हटाए जाने के बदले विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी देते हुए, इस मांग के ख़िलाफ़ कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

    'अहिंदा' कर्नाटक में अल्पसंख्यक, ओबीसी और दलितों का एक संगठन है जो कि सिद्धारमैया का सबसे बड़ा समर्थक गुट माना जाता है. अहिंदा गुट ने ही सिद्धारमैया को जनता दल (सेक्युलर) छोड़ने के बाद चुनावी ताक़त दिखाने और अपना क्षेत्र बनाने में मदद की थी.

    सिद्धारमैया को हटाए जाने की मांग के खिलाफ़ एक बार फिर से ये गुट खड़ा हुआ है.

    द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, 'अहिंदा' के कर्नाटक अध्यक्ष प्रभुलिंग डोड्डामणि ने हुबली में रविवार को कहा, "सिद्धरमैया को पूरे पांच साल बतौर मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल पूरा करना चाहिए. अगर उनको बदला जाता है तो कर्नाटक में कांग्रेस अपना वजूद खो देगी. अगर उन्हें बदले जाने की कोशिश होगी तो हम हर ज़िला और तालुका में प्रदर्शन करेंगे. अहिंदा और सिद्धारमैया एक दूसरे के पर्यायवाची हैं."

    वोक्कालिगा संत के बयान पर डोडामनी ने कहा, "स्वामीजी को ऐसे राजनीतिक बयान नहीं देने चाहिए. उन्हें खुद को धार्मिक प्रवचन और कर्मकांड तक ही सीमित रखना चाहिए. ऐसे बयान समाज में तनाव पैदा कर सकते हैं. संतों को ये समझना चाहिए कि वो किसी एक जाति से जुड़े हुए नहीं होते हैं वो पूरे धार्मिक समुदाय के होते हैं. संतों को ये भी समझना चाहिए कि ये पार्टी के अंदर का मामला है."

    वोक्कालिगा समुदाय से प्रमुख संत कुमार चंद्रशेखरनाथ स्वामी ने कहा, "सब लोग मुख्यमंत्री बने हैं और सत्ता सा स्वाद चखा है. केवल शिवकुमार ही मुख्यमंत्री नहीं बने हैं. ये तभी संभव होगा अगर सिद्धारमैया अपना मन बना लेते हैं. तो कृपया शिवकुमार को मुख्यमंत्री बना दें."

    "शिवकुमार ने सारी मेहनत की, पार्टी को संगठित किया और कांग्रेस के लिए 135 सीटें सुनिश्चित कीं. सिद्धारमैया ने शिवकुमार जितनी मेहनत नहीं की. सिद्धरमैया ने जब सत्ता का आनंद ले लिया है तो ये अच्छा होगा कि अगर शिवकुमार मुख्यमंत्री बन जाएं."

    कर्नाटक के अखबार डेक्कन हेरल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, ये बयान कर्नाटक के संस्थापक केम्पोगौड़ा के जयंती पर आयोजित एक इवेंट में दिया गया. इसी इवेंट में शिवकुमार और सिद्धारमैया दोनों मौजूद थे.

    सीएम सिद्धारमैया ने मीडिया से बात की थी और कहा, "कांग्रेस एक आलाकमान वाली पार्टी है, ठीक है? हम एक लोकतंत्र में रह रहे हैं. हम वो करेंगे जो भी आलाकमान का आदेश होगा."

    हुबली में अहिंदा गुट के नेताओं का जुटान हुआ है जो अगस्त महीने में बड़ा आयोजन करने का प्लान बना रहे हैं. ये आयोजन सिद्धारमैया के जन्मदिन के मौके पर होगा.

  18. रोहित शर्मा, विराट कोहली और जडेजा की जगह ले सकते हैं ये युवा खिलाड़ी

  19. फ़्रांस में दक्षिणपंथी दल को मिली बढ़त, राष्ट्रपति की रेस में मैक्रों पिछड़े

    फ़्रांस के संसदीय चुनाव में धुर दक्षिणपंथी दल नेशनल रैली को पहले दौर में बढ़त मिल गई है, जिसने फ़्रांस की राजनीति में उनके दबदबे को पुख़्ता कर दिया है और सत्ता के क़रीब ला दिया है.

    प्रवासी विरोधी नेशनल रैली की नेता मरीन ले पेन के ये कहते ही कि "मैक्रों गुट का पूरी तरह से सफ़ाया हो गया है", कार्यकर्ता ख़ुशी से झूम उठे.

    नेशनल रैली 33.2% वोट के साथ जीत की ओर अग्रसर है, जबकि समूचा वामपंथी गठबंधन 28.1% वोट के साथ पिछड़ता दिखाई दिया और मैक्रों गुट को 21% वोट मिले.

    28 वर्षीय नेशलन रैली के नेता जॉर्डन बारडेला ने कहा, "अगर फ़्रांस के लोग मुझे वोट देते हैं तो मैं उनका प्रधानमंत्री बनना चाहता हूं."

    फ़्रांस के राष्ट्रीय चुनावों में इससे पहले कभी भी धुर दक्षिणपंथी दल पहले दौर का चुनाव नहीं जीते हैं. मरीन ले पेन और जॉर्डन बारडेला फ़्रांस की 577 सीटों वाली संसद 'नेशनल असेंबली' में 289 सीटों के साथ बहुमत हासिल करना चाहते हैं.

    लेकिन दूसरे दौर के चुनाव के बाद नेशनल रैली का सपना पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा है. बगैर किसी बहुमत के फ़्रांस में त्रिशंकु नतीजे आएंगे और नेशनल रैली टैक्स कटौती, प्रवास और कानून व्यवस्था पर अपने एजेंडा पूरा नहीं कर पाएगी.

    इमैनुएल मैक्रों के सामने चुनावों का ऐलान करने का कोई ऐसा खास कारण नहीं था, लेकिन यूरोपीय चुनावों में मिली नेशनल रैली को जीत के बाद उन्होंने कहा था कि ये "बहुत ज़िम्मेदाराना समाधान है." अब ये एक ऐसा जुआ साबित हो रहा है जो राजनीतिक सिस्टम में उलटफ़ेर कर सकता है.

    साल 1997 के बाद वोटिंग प्रतिशत में सबसे ज़्यादा उछाल देखा गया.

  20. नमस्कार,

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