केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) ने बेंगलुरु पुलिस के आईजीपी रैंक के एक अधिकारी का निलंबन रद्द कर दिया है. ये निलंबन चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर भगदड़ मामले में किया गया है.
साथ ही, न्यायाधिकरण ने कर्नाटक सरकार से कहा है कि तत्कालीन पुलिस आयुक्त बी दयानंद समेत बाक़ी अधिकारियों के निलंबन भी वापस लिए जाएं.
4 जून को चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर हुई भगदड़ के 24 घंटों के अंदर ही पुलिस कमिश्नर दयानंद के साथ एडिशनल पुलिस कमिश्नर (वेस्ट) विकास कुमार, डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (सेंट्रल) शेखर एचटी, क्यूबन पार्क पुलिस स्टेशन के सहायक पुलिस आयुक्त और एक सब-इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया गया था.
जस्टिस बीके श्रीवास्तव (न्यायिक सदस्य) और संतोष मेहरा (प्रशासनिक सदस्य) की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि निलंबन के आदेश में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे पता चले कि पुलिस ने बड़ी लापरवाही की थी.
"यह साबित करने के लिए भी कोई ठोस सबूत नहीं है कि पुलिस के पास सभी इंतज़ाम करने का पर्याप्त समय था. पुलिस की ओर से किसी भी तरह की अनुमति नहीं दी गई थी क्योंकि आयोजक रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) ने नियमानुसार अनुमति के लिए आवेदन ही नहीं किया था."
न्यायाधिकरण ने 29 पेजों के आदेश में कहा, "पुलिस अधिकारियों को बिना किसी ठोस कारण या पर्याप्त सबूतों के निलंबित किया गया है. इसलिए यह आदेश रद्द किया जाता है."
न्यायाधिकरण ने यह भी कहा कि निलंबन के दौरान की अवधि को सामान्य ड्यूटी माना जाएगा और उस दौरान का पूरा वेतन और भत्ता दिया जाएगा.
न्यायाधिकरण ने यह भी बताया कि बेंगलुरु में सभाओं और जुलूसों के लाइसेंस और नियंत्रण संबंधी आदेश 2009 के मुताबिक़, आरसीबी को कम से कम सात दिन पहले अतिरिक्त पुलिस आयुक्त से अनुमति लेनी थी. क़ानून के मुताबिक़ पुलिस पर इंतज़ाम करने की कोई ज़िम्मेदारी नहीं थी, फिर भी पुलिस ने अपनी तरफ़ से जितना संभव था, उतने इंतज़ाम किए.
अपने इस आदेश में न्यायाधिकरण ने आरसीबी के सोशल मीडिया पोस्ट्स का भी ज़िक्र किया, जिसके कारण तीन लाख लोग स्टेडियम में जमा हो गए थे.
न्यायाधिकरण ने कहा कि आरसीबी तीन से पांच लाख लोगों को इकट्ठा करने के लिए ज़िम्मेदार है.