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तुर्की चुनावः अर्दोआन की 20 साल की सत्ता को हिला पाएगा 6 पार्टियों का गठबंधन?
- Author, पॉल किर्बी
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन सत्ता में लगभग 20 सालों से ज़्यादा से हैं और अब उनके सामने सबसे कड़ी चुनौती है.
तुर्की के छह विपक्षी दलों ने 14 मई को राष्ट्रपति और संसदीय चुनावों के लिए एकजुट होकर विपक्षी नेता केमल किलिकडारोग्लू को अपने विपक्षी गठबंधन का उम्मीदवार चुना है.
राष्ट्रपति अर्दोआन के शासन में तुर्की निरंकुश हो गया है और विपक्ष इसमें तब्दीली लाने की कोशिश कर रहा है.
तुर्की में बढ़ती महंगाई और दोहरे भूकंप से 50 हज़ार से ज़्यादा मौतों के बाद राष्ट्रपति अर्दोआन कमज़ोर पड़ते दिख रहे हैं.
14 मई को चुनाव में किसी भी उम्मीदवार को यदि आधे से ज़्यादा वोट मिलते हैं, वह एकमुश्त विजेता होगा. अगर असफल हुए तो दोबारा चुनाव दो सप्ताह के बाद हो पाएगा.
चुनाव में अर्दोआन की चुनौती
सालों तक तुर्की में वोटर्स का ध्रुवीकरण हुआ है, लेकिन 69 वर्षीय अर्दोआन दबाव में हैं. ओपिनियन पोल से पता चलता है कि राष्ट्रपति पद के लिए उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी के पास अच्छी बढ़त है.
अर्दोआन जिस एके पार्टी से संबंध रखते हैं वो साल 2002 से सत्ता में है और खु़द 2003 से (तब प्रधानमंत्री) सत्ता के शीर्ष पर बने रहे हैं.
60 लाख नए युवा वोटरों ने अर्दोआन के अलावा किसी और नेता को सत्ता में नहीं देखा है.
शुरुआत में अर्दोआन प्रधानमंत्री थे, फिर साल 2016 में राष्ट्रपति बन गए. अब वे एक विशाल भवन में बैठकर पूरा देश चलाते हैं.
तुर्कों की बढ़ती आबादी ने उन्हें महंगाई के लिए दोषी ठहराया है, क्योंकि वो अपरंपरागत तरीके से ब्याज़ के दरों को बढ़ाने से इनकार करते रहे हैं. आधिकारिक मुद्रास्फीति की दर 50% से ऊपर है, लेकिन शिक्षाविदों का कहना है कि यह वास्तव में 100% से ज़्यादा है.
इस साल 6 फ़रवरी को आए दोहरे भूकंप से हुई तबाही के बाद मलबे में दबे लोगों की खोजबीन और लोगों के बचाव के तरीके को लेकर अर्दोआन और उनकी सत्तारूढ़ पार्टी की आलोचना हुई थी.
इसके साथ ही उनकी सरकार तुर्की में सालों तक कंस्ट्रक्शन की सही व्यवस्था को अपनाने और लागू करने में भी विफल रही है.
भूकंप से प्रभावित 11 प्रांतो में लाखों तुर्क नागरिक बेघर हो गए. चूंकि कई इलाको में अर्दोआन की पार्टी के गढ़ के तौर पर देखा जाता है. इसलिए देश का पूर्वी इलाका जीत और हार तय सकता है.
उनकी एके पार्टी की राजनीति इस्लाम की तरफ झुकी है, लेकिन उन्होंने अति-राष्ट्रवादी पार्टी एमएचपी के साथ गठबंधन किया है.
छह विपक्षी दलों का एक उम्मीदवार
74 साल के केमल किलिकडारोग्लू एक एक विनम्र और पढ़े-लिखे छवि के प्रतिद्वंद्वी के तौर पर सामने हैं.
तुर्की की मुख्य विपक्षी पार्टी रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी (सीएचपी) को कई चुनावों में हार मिली जिसकी अगुवाई केमल ही कर रहे थे.
लेकिन इस बार हालात अलग हो सकते हैं क्योंकि वह छह विपक्षी दलों के लिए गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में लड़ रहे हैं, जिसमें उनकी अपनी वामपंथ की ओर झुकाव वाली पार्टी और राष्ट्रवादी गुड पार्टी से लेकर चार छोटे समूह शामिल हैं. इनमें अर्दोआन के दो सहायक समूह भी हैं. इन सहायक समूहों ने अर्दोआन की एके पार्टी की स्थापना में मदद की थी.
केमल किलिकडारोग्लू को तुर्की की दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी एचडीपी का स्पष्ट समर्थन हासिल है. इस पार्टी के नेता इस चुनाव को 'तुर्की के इतिहास के लिए महत्वपूर्ण' बताया है.
क्योंकि पार्टी पर कुर्दिश चरमपंथियों से संबंध के एक अदालती मामले की वजह से, वो ग्रीन लेफ्ट के बैनर तले संसद जाने के रास्ते तलाश रही है और राष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार नहीं उतार रही है.
केमल किलिकडारोग्लू का राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के चुनाव में सबसे प्रभावशाली नहीं थे, क्योंकि इस्तांबुल और अंकारा के मेयर उनसे मज़बूत उम्मीदवार थे.
केमल किलिकडारोग्लू एक पूर्व सिविल सेवक हैं जो अल्पसंख्यक अलेवी समुदाय आते हैं. उन्होंने 2017 में न्याय के लिए 24 दिवसीय मार्च का नेतृत्व किया था. इस मार्च को अर्दोआन के शासन के ख़िलाफ़ सबसे बड़े प्रदर्शन के तौर पर देखा गया.
तुर्की में नेशन अलायंस की छह पार्टियों के गठबंधन को 'टेबल ऑफ़ सिक्स' के तौर पर भी जाना जाता है.
'टेबल ऑफ़ सिक्स' राष्ट्रपति अर्दोआन द्वारा बनाई गई राष्ट्रपति प्रणाली को बदलने के लिए इकट्ठा हुए हैं.
इस प्रणाली को बदलने के लिए उन्हें जनमत संग्रह के प्रस्ताव लाने के लिए तुर्की के 600 सांसदों में से 400 या 360 सांसदों को अपने पक्ष में करना होगा या फिर चुनाव में इतनी सीटें लानी होगी.
गठबंधन के अन्य पांच सदस्यों के नेताओं ने उप-राष्ट्रपति बनने की सहमति ज़ाहिर की है.
वोट का बिखराव
तुर्की में ओपिनियन पोल हमेशा विश्वसनीय नहीं होते हैं. लेकिन केमल किलिकडारोग्लू के पहले राउंड में सीधे चुनाव जीतने की उम्मीदों को तब झटका लगा जब वाम झुकाव वाली पार्टी के एक पूर्व सहयोगी मुहर्रम इन्स ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों में शामिल होने का फै़सला किया.
58 वर्षीय मुहर्रम इन्स 2018 में रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार थे. लेकिन केमल किलिकडारोग्लू के साथ दो साल बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दिया था. वह अब धर्मनिरपेक्ष राष्ट्रवादी होमलैंड पार्टी का संचालन करते हैं और उन्हें राष्ट्रपति अर्दोआन के इशारे पर विपक्षी वोट को काटने के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है.
लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी मजबूत उपस्थिति है. खासतौर से युवा वोटर टिकटॉक पर उनके डांस मूव्स से प्रभावित नज़र आते हैं.
चुनाव में सफलता पाने की कम संभावना वाले एक और अति-राष्ट्रवादी उम्मीदवार सिनान ओगन हैं. लेकिन उनमें भी किंगमेकर बनने की क्षमता है.
तुर्की की चुनाव प्रकिया
तुर्की की 600 सीटों वाली संसद में प्रवेश के लिए एक पार्टी को 7% वोट प्राप्त करने की आवश्यकता होती है, या ऐसा करने वाले गठबंधन का हिस्सा होना चाहिए.
यही कारण है कि तुर्की में गठजोड़ इतना महत्वपूर्ण हो गया है, और छह दलों के विपक्ष ने इसे अपने प्रस्तावित सुधारों में से एक के तौर पर प्रचारित किया है.
आनुपातिक प्रतिनिधित्व के तहत उम्मीदवारों के बजाय पार्टी को वोट देते हैं, इसलिए सीट संख्या गठबंधन के बजाय हर एक पार्टी के लिए डाले गए वोटों के आधार पर तय होती है.
मुख्य विपक्षी राष्ट्रीय गठबंधन में चार छोटे दल, दो सबसे बड़े दल सीएचपी या राष्ट्रवादी गुड पार्टी के बैनर तले संसद पहुंचने के लिए चुनौती देंगे.
सत्तारूढ़ एके पार्टी पीपुल्स अलायंस की पार्टी है, लेकिन इसके अलग-अलग दल अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं.
कुर्दिश समर्थक पार्टी के बजाय ग्रीन लेफ्ट के लिए खड़े होने वाले उम्मीदवार छह दलीय लेबर एंड फ्रीडम अलायंस के हिस्सा हैं. छह में से एक को छोड़कर सभी पार्टियां ग्रीन लेफ्ट के बैनर तले चुनाव में होंगी.
राष्ट्रपति अर्दोआन के बदलाव के बाद अब प्रधानमंत्री सरकार बनाने का दावा पेश नहीं करता बल्कि राष्ट्रपति सरकार बनाते हैं.
लेकिन अगर अर्दोआन की पीपुल्स अलायंस संसद में बहुमत हासिल करने में नाकाम होती है तो मौजूदा समय की तरह मनमाने ठंग से सरकार नहीं चला पाएंगे.अर्दोआन के समर्थन वाले पीपुल्स एलायंस के वर्तमान समय में 334 सांसद हैं.
अर्दोआन राष्ट्रपति के तौर पर दो कार्यकाल पूरा कर चुके हैं और तीसरा कार्यकाल तुर्की के संविधान के नियमों के ख़िलाफ़ जाता प्रतीत होता है.
लेकिन तुर्की के वाईएसके चुनाव बोर्ड ने फै़सला सुनाया कि उनका पहला कार्यकाल 2014 में नहीं बल्कि 2018 में शुरू होने के रूप में देखा जाना चाहिए, जब एक ही दिन संसद और राष्ट्रपति के चुनाव के साथ नई राष्ट्रपति प्रणाली शुरू हुई.
विपक्षी राजनेताओं ने पहले वाईएसके से उनकी उम्मीदवारी को रोकने के लिए कहा था.
तुर्की में बदलाव को लेकर क्या है विपक्ष का वादा
किलिकडारोग्लू के नेतृत्व वाली नेशन अलायंस तुर्की की संसदीय प्रणाली को बहाल करना चाहती है और राष्ट्रपति प्रणाली में सुधार करना चाहती है.
राष्ट्रप्रमुख के अधीन वीटो क़ानून का अधिकार हटाकर, पदों को राजनीतिक दलों से काटकर रखने और इस पद को सात सालों में चुनाव के योग्य बनाना चाहते हैं.
राष्ट्रपति अर्दोआन के शासन के दौरान यूरोपीय संघ से तनावपूर्ण संबंधों के बाद गठबंधन की छह पार्टियां यूरोपीय संघ में शामिल होने और अमेरिका के साथ "पारस्परिक विश्वास" बहाल करने के लिए तुर्की की दशकों पुराने प्रयास की शुरुआत करना चाहती हैं.
उन्होंने दो साल के भीतर मुद्रास्फीति को 10% से नीचे लाने और सीरियाई शरणार्थियों को वापस घर भेजने का वादा किया है. तुर्की में लगभग 36 लाख सीरियाई शरणार्थी रहते हैं.
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