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कोहली के सवाल पर जब केएल राहुल ख़ुद फंस गए
- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
विराट कोहली विकेट के बीच में आकर, हेलमेट उतारकर, आसमान में देखकर गले में पहनी अपनी चेन को बाहर निकालकर, उसका पेंडेंट चूमते हैं. इस मौके़ पर उनके चेहरे पर जो खु़शी का भाव था, वह लंबे समय बाद देखने को मिला. यह अवसर था, उनके बल्ले से शतक का निकलना.
मैच के बाद चर्चा कोहली के उस लॉकेट की भी थी, जिसे वो शतक बनाने के बाद चूम रहे थे. मैच के बाद उन्होंने ये साफ़ किया कि वो उस लॉकेट को क्यों चूम रहे थे. वे बोले, "एक व्यक्ति ने मेरे नज़रिए में कुछ चीज़ें जोड़ीं और वो हैं अनुष्का (शर्मा). ये शतक हमारी बेटी वामिका के लिए भी है."
विराट ने अफ़ग़ानिस्तान पर एशिया कप सुपर फ़ोर के इस मुक़ाबले में 101 रनों से जीत दिलाने से पहले दो अर्धशतक लगाकर ही रंगत को पा लिया था. लेकिन 61 गेंदों पर 122 रनों की इस नाबाद पारी से उन्होंने फॉर्म पाने पर मुहर लगा दी है. इससे भारतीय कैंप में अगले माह ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी-20 विश्व कप के लिए खु़शी की लहर ला दी है.
इस शतक लगाने पर विराट ने जब बल्ला उठाकर भारतीय ड्रेसिंग रूम में तालियां बजा रहे खिलाड़ियों का अभिवादन स्वीकार किया, उस समय चेहरे की खु़शी को देखकर लग रहा था कि वह शायद ख़ुद इसके लिए तैयार नहीं थे.
मैच के बाद रोहित शर्मा के साथ बातचीत के एक वीडियो में उन्होंने ये स्वीकार किया भी कि सेंचुरी इतनी जल्दी आ जाएगी, उन्हें इसकी उम्मीद नहीं थी.
रोहित से बातचीत में उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि ब्रेक लेने का फ़ायदा उन्हें मिला. उन्होंने कहा, "काफी चीज़ें नज़रिए में आईं. टीम, मैनेजमेंट ने मिलकर पूरा सहयोग दिया. मेरा फ़ोकस इस बात पर था कि मैं अच्छा खेलूंगा तो टीम को और सहयोग दे सकता हूं. मैंने ये सोचा था कि जो चीज़ें मुझे टीम के लिहाज से बेहतर करनी हैं वो मैं एशिया कप में करूंगा."
यह सही है कि भारत और अफ़ग़ानिस्तान दोनों ही इस मैच से पहले ही फ़ाइनल की दौड़ से बाहर हो चुके थे. इसलिए इस मैच का महत्व विश्व कप की तैयारियों के लिए विश्वास पाना था और इस काम में यह मैच कामयाब साबित हुआ. भारत घर लौटकर जब ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ टी-20 सीरीज़ खेलेगी, तब इस मैच से बढ़े भरोसे का फ़ायदा ज़रूर मिलेगा.
बल्ले से ढाई साल बाद निकला ये शतक विराट है!
विराट कोहली नवंबर 2019 में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ टेस्ट शतक लगाने के बाद से शतकीय पारी के लिए जूझ रहे थे. इसके बाद बल्ले के रूठे रहने से उन्हें तमाम आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा.
विराट ने बांग्लादेश के ख़िलाफ़ शतक लगाने के बाद 83 पारियां बिना शतक के खेलीं थीं. लेकिन अब जिस अंदाज में उन्होंने शतक लगाया, उसे सालों साल याद रखा जाएगा. यह क्रिकेट इस सबसे छोटे प्रारूप में उनका पहला शतक भी है. साथ ही ये अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट में किसी भी भारतीय का सबसे बड़ा स्कोर भी है. उन्होंने रोहित शर्मा के 118 की पारी को पीछे छोड़ा है.
यह उनका अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर का 71वां शतक है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शतकों के मामले में वो रिकी पोंटिंग की बराबरी पर आ गए हैं. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शतक लगाने के मामले में अब उनसे आगे सिर्फ़ सचिन तेंदुलकर हैं.
इतना ही नहीं कोहली अब क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में शतक जमाने वाले भारत के चौथे खिलाड़ी भी बन गए हैं. इस क्लब में रोहित शर्मा, सुरेश रैना और केएल राहुल पहले से शामिल हैं.
ढाई साल पहले तक विराट हर साल क़रीब पांच-छह शतक लगा रहे थे. यदि उनकी यह रफ़्तार लगातार जारी रहती तो अब तक वह सचिन के शतकों के शतक के काफ़ी क़रीब पहुंच गए होते. इस साल नवंबर में वो 34 साल के हो जाएंगे. उनकी फिटनेस को देखते हुए कम से कम चार-पांच साल तक उनके खेलने की उम्मीद की जा सकती है. अगर ऐसा हो सका तो वह सचिन के शतकों का रिकॉर्ड तोड़ नहीं भी सके तो उसके आसपास ज़रूर पहुंच जाएंगे.
स्पिनरों पर दबदबा बनाना
विराट कोहली अपनी ख़राब फॉर्म के दिनों में भी तेज़ गेंदबाजों को अच्छे से खेल रहे थे. लेकिन उन्हें असली दिक्कत स्पिनरों को खेलने में हो रही थी. उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान के ऑफ़ स्पिनर मुजीब की तो ठुकाई की ही. इसके अलावा दुनिया के सबसे उम्दा स्पिनरों में शुमार रखने वाले राशिद ख़ान पर उन्होंने जिस भरोसे के साथ लांग ऑन पर चौके लगाए और स्ट्राइक को रोटेट किया, यह उनके और टीम इंडिया दोनों के लिए खु़शख़बरी है.
विराट ने 122 रन की नाबाद पारी खेलकर भारत के लिए टी-20 प्रारूप में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले तो बने ही, साथ ही 200 की स्ट्राइक रेट से रन बनाना मायने रखता है. उन्होंने इस पारी के दौरान 12 चौके और छह छक्के लगाए. कुछ छक्के तो इतने लंबे थे, जो उनकी खेल पर अथॉरिटी दर्शाने के लिए पर्याप्त है.
विराट की इस पारी की ख़ास बात यह रही कि उन्होंने सभी गेंदबाजों पर मैदान में हर तरफ़ शॉट खेले. कुछ कवर ड़ाइव तो देखने के काबिल थे. यह मैच यदि फ़ाइनल की दौड़ में शामिल होता, तो दुबई का स्टेडियम दर्शकों से खचाखच भरा रहता. लेकिन मैच की अहमियत न होने के कारण जिन दर्शकों ने मैदान में आने से परहेज किया, उन्हें विराट की इस पारी को नहीं देख पाने का हमेशा अफ़सोस रहेगा.
कोहली को ओपनिंग देने के सवाल पर राहुल का ये जवाब
केएल राहुल लंबे समय बाद प्रतियोगात्मक क्रिकेट में लौटे हैं. वह जिस तरह के प्रदर्शन के लिए जाने जाते हैं, उस तरह का प्रदर्शन नहीं कर पा रहे थे. लेकिन इस मैच में अपने नियमित जोड़ीदार रोहित शर्मा के नहीं खेलने पर विराट के साथ पारी शुरू करने उतरे तो उन्होंने विराट के साथ कंधे से कंधा मिलाकर बढ़िया शॉट खेले. उन्होंने अर्धशतक लगाकर आने वाले दिनों के लिए भरोसा पा लिया है.
विराट कोहली और केएल राहुल के बीच ओपनिंग साझेदारी में 119 रन जुड़े. इसमें राहुल ने 151.21 की स्ट्राइक रेट से 62 रन बनाए, जिसमें छह चौके और दो छक्के शामिल हैं. यह सही है कि विराट ने ओपनिंग करके शतक लगा दिया है. पर भारत को रोहित के जोड़ीदार के रूप में राहुल को ही खिलाने की ज़रूरत है.
हालांकि विराट के ओपनर के तौर पर इस प्रदर्शन से यह पता चल गया है कि ऑस्ट्रेलिया में किसी वजह से किसी मैच में दोनों ओपनरों में से कोई नहीं खेल पाते हैं, तो इस स्थान के लिए विराट को आज़माया जा सकता है. वैसे तो इस प्रारूप में विराट के लिए ओपनिंग करना कोई नई बात नहीं है, क्योंकि वह आईपीएल में आरसीबी के लिए नियमित तौर पर ओपनिंग करते हैं.
हालांकि मैच के बाद विराट के ओपनर के तौर पर लगाई इस सेंचुरी और उस पर केएल राहुल से पूछे गए सवाल और उनके जवाब की चर्चा भी काफ़ी हुई.
दरअसल, मैच के बाद जब केएल राहुल से ये सवाल पूछा गया कि विराट की सेंचुरी बहुत दिनों बाद आई है और वो भी बतौर ओपनर, तो क्या उन्हें नियमित तौर पर ओपनिंग करनी चाहिए?
इस पर राहुल ने थोड़ी मुस्कुराहट के साथ तपाक से सवाल दागा, "तो मैं क्या ख़ुद बैठ जाऊं फिर." साथ ही उन्होंने कहा कि "विराट का रन बनाना टीम के लिए बहुत बड़ा बोनस है. वर्ल्ड कप में जाने से पहले अगर आप ऐसी कुछ अच्छी पारियां खेलते हैं, तो निश्चित तौर पर अधिक आत्मविश्वास के साथ टीम उतरेगी."
भुवी ने भी रिकॉर्ड तोड़ा
भुवनेश्वर कुमार श्रीलंका के ख़िलाफ़ मैच में 19वें ओवर में 14 रन देकर जिस तरह से मैच पर से भारतीय पकड़ को ढीला किया था, उससे वह आलोचनाओं का शिकार बन रहे थे. हम सभी जानते हैं कि भुवनेश्वर कुमार गति के लिए नहीं जाने जाते हैं. गेंदबाज़ी में उनकी खू़बी स्विंग है.
इस मैच में पहली गेंद से ही उन्हें स्विंग मिल रहा था तो ये लगने लगा था कि आज वो कुछ ख़ास कर सकते हैं.
भुवनेश्वर कुमार ने अपने टी-20 करियर की सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ी करके चार ओवरों में चार रन देकर पांच विकेट निकाले. उन्होंने पहले ही ओवर में दोनों ओपनरों अजरुतुल्ला और रहमनुल्ला को खाता खोले बगै़र आउट करके अपने इरादे जता दिए थे. इस दौरान वे भारत की ओर से अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट में सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज़ भी बन गए. पर भुवनेश्वर को अपनी इस लय को विश्व कप तक बनाए रखना बेहद ज़रूरी है.
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