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श्रीलंका: नहीं थम रहा राष्ट्रपति भवन की झलक चाहने वालों का कारवाँ - ग्राउंड रिपोर्ट
- Author, अनबरासन एथिराजन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, कोलंबो से
श्रीलंका की रश्मि कविंध्या कहती हैं कि उन्होंने अपनी ज़िंदगी में कभी भी कोलंबो स्थित राष्ट्रपति आवास में क़दम रखने का ख़्वाब नहीं देखा था.
देश के सबसे सुरक्षित इमारतों में शामिल इस विशाल परिसर में भारी भीड़ के घुस जाने के एक दिन बाद कविंध्या जैसे हज़ारों लोग राष्ट्रपति भवन देखने के लिए उमड़ पड़े हैं.
उपनिवेश काल की वास्तुकला वाली इस इमारत में कई बरामदे, मीटिंग रूम, रिहायशी जगह के साथ एक स्विमिंग पूल और एक विशाल लॉन भी हैं. शनिवार की हुई नाटकीय घटनाओं के कारण राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को यहां से भागने को मजबूर होना पड़ा है.
अपने चार बच्चों के साथ राष्ट्रपति भवन देखने पहुंची कविंध्या कहती हैं, "जरा इस जगह की विशालता और समृद्धि देखिए. हम अपने गांव के एक छोटे से घर में रहते हैं. यह महल लोगों का है और लोगों के पैसे से बनाया गया है."
राष्ट्रपति भवन में रविवार को भी हज़ारों मर्द, औरतें और बच्चे प्रवेश कर रहे थे. विरोध प्रदर्शन करने वाले कुछ लोग वहां आ रही भीड़ को नियंत्रित कर रहे थे, जबकि पुलिस और ख़ास सैनिक दस्ते के लोग कोने में केवल खड़े होकर चुपचाप यह सब होता देख रहे थे.
राष्ट्रपति भवन में सेल्फ़ी लेने की होड़
वहां लोग एक कमरे से दूसरे कमरे में घूम रहे थे. वे सागवान से बने फर्नीचरों और वहां लगी तस्वीरों के सामने और रिहायशी कमरों में घूम घूमकर सेल्फ़ी लेकर इस पल को क़ैद कर रहे थे.
वहीं इस महल के कई हिस्सों में टूटी हुई कुर्सियां, खिड़कियों के शीशे और गमले चारों ओर बिखरे हुए थे. ये नज़ारे इस परिसर में भीड़ के घुसने के बाद वहां फैली अराजकता और अफरा तफरी की कहानी बयां कर रहे थे.
एएल प्रेमवर्धने वहां के गनेमुल्ला शहर में बच्चों के एक मनोरंजन पार्क में काम करते हैं. उन्होंने बताया, "ऐसे महल को देखना मेरे लिए किसी सपने के सच होने जैसा है. हम केरोसिन तेल, गैस और भोजन के लिए लंबी क़तारों में खड़े होकर इंतज़ार करते रहे, जबकि राजपक्षे दूसरे तरह की ही ज़िंदगी जी रहे थे."
देश में विरोध प्रदर्शन करने वाले नेता पहले ही कह चुके हैं कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के सरकारी आवासों को वे तब तक नहीं छोड़ेंगे, जब तक वे दोनों अपने अपने पद नहीं छोड़ देते.
भगदड़ होने के ख़तरे के बाद भी भीड़ जब इस भवन को देखने के लिए वहां पहुंच रही है तो भारी हथियारों से लैस सैनिक और विशेष पुलिस अधिकारी उन्हें रोकने के बजाय कहीं पीछे खड़े थे, जबकि इस आंदोलन के वॉलेंटियर वहां की भीड़ को संभाल रहे थे.
स्वीमिंग पूल पर अटकी लोगों की निगाहें
राष्ट्रपति भवन पहुंची भीड़ को सबसे ज़्यादा वहां के स्वीमिंग पूल ध्यान खींच रहे हैं. लोग वहां खड़े होकर पानी से भरे इस पूल को निहार रहे हैं. शनिवार को स्वीमिंग पूल में नहाते प्रदर्शनकारियों के वीडियो हर जगह वायरल हुए थे. इस बीच जब एक युवक ने इस पूल में तैरने के लिए छलांग लगाई, तो वहां खड़े लोगों ने ताली बजाकर शोर मचाया.
अपनी दो किशोर बेटियों के साथ यह परिसर देखने पहुंची निरोशा सुदर्शनी हचिंसन ने कहा, "मैं दुखी हूं कि लोकतांत्रिक तरीक़े से राष्ट्रपति चुने गए किसी शख़्स को इतने शर्मनाक तरीक़े से परिसर छोड़ना पड़ा. अब हमें शर्म आ रही है कि हमने इन जैसों को वोट दिया. अब लोग चाहते हैं कि वे सभी देश के चुराए हुए पैसों को देश को लौटा दें."
इस परिसर में चार बड़े बिस्तरों पर युवकों के झुंडों को आराम फरमाते देखा गया. श्रीलंका में सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली तीनों भाषाओं- सिंहल, तमिल और अंग्रेज़ी, को वहां के गलियारों में आसानी से सुना जा रहा था. वहां पहुंचने वाले लोगों में मौजूद उत्साह साफ तौर पर झलक रहा था.
राष्ट्रपति भवन में क़रीने से तैयार विशाल लॉन में बौद्ध, हिंदू और ईसाई धर्मों के सैकड़ों लोग एक-दूसरे से मिल रहे थे. वहीं वहां पहुंचा एक परिवार लॉन की घास पर लापरवाही से पिकनिक मना रहा था. हालांकि केवल 24 घंटे पहले उन्हें वहां घुसने तक की इजाज़त नहीं मिलती थी.
अब लोगों को लग रहा है कि महीनों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों के चलते देश के सत्ताधीशों को आख़िरकार उनके पदों से हटने को मजबूर होना पड़ा. लोगों की नज़र में ये नेता ही देश की मौजूदा आर्थिक समस्या के ज़िम्मेदार हैं. अपने नेताओं की आलीशान ज़िंदगी को देखने से तो उन्हें और भी ग़ुस्सा आ रहा है.
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