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चीन ने अमेरिका पर कसा तंज, अफ़ग़ानिस्तान की वियतनाम से तुलना
अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में तालिबान के दाखिल होने के बाद शहर छोड़ने को लेकर जिस तरह की अफ़रा-तफ़री का मौहाल बना, उसकी तस्वीरें दुनिया भर में देखी गईं.
काबुल एयरपोर्ट पर बने हालात के लिए अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को कई हलकों से आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है.
इन सब के बीच अब चीन ने वियतनाम युद्ध की तस्वीरों के जरिए अमेरिका पर निशाना साधा है.
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने मंगलवार की दोपहर दो ट्वीट किए, जिनका इशारा अमेरिका को उसकी नाकामी की याद दिलाने की तरफ़ था.
हाल के दिनों में चीन ने शिनजियांग, मानवाधिकार और कुछ दूसरे मुद्दों पर कभी इशारों में तो कभी साफ़ लफ़्जों में अमेरिकी आलोचनाओं का कुछ इसी तरह से जवाब दिया है.
विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता का ट्वीट
कहते हैं कि एक तस्वीर एक कहानी के बराबर का दर्जा रखती है. अगर कहानी दोहराई जाए तो तस्वीर के साथ भी ऐसा हो सकता है.
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने अपने पहले ट्वीट में दो तस्वीरों का एक कोलाज शेयर किया है.
और कहा है कि "लोगों ने साल 1975 में ये वियतनाम में देखा था. अब अफ़ग़ानिस्तान में देखिए."
पहली तस्वीर सैगोन (वियतनाम) की है जहाँ अमेरिकी दूतावास की छत से लोग अफ़रा-तफ़री भरे माहौल में हेलिकॉप्टर पर चढ़ने की कोशिश कर रहे हैं. दूसरी तस्वीर काबुल की है, जहाँ से अमेरिकी हेलिकॉप्टर अपने लोगों को देश से बाहर ले जा रहा है.
इस ट्वीट के अगले ही मिनट हुआ चुनयिंग ने एक और फोटो कोलाज पोस्ट किया, जिसमें अमेरिकी ताक़त के पतन की ओर इशारा किया गया है. हुआ चुनयिंग ने इस ट्वीट में कहा है, "फ्रॉम द पोज़िशन ऑफ़ स्ट्रेंथ."
इस कोलाज में भी एक तस्वीर वियतनाम की है जिसमें एक स्थानीय व्यक्ति को पीछे हटाने की कोशिश की जा रही है तो काबुल वाली तस्वीर में हवाई अड्डे पर घेरा बनाए सुरक्षा कर्मी हैं और कँटीले बाड़ों के पीछे मुल्क छोड़ने के लिए बेकरार अफ़ग़ान लोग हैं जो रनवे की तरफ़ देख रहे हैं.
सैगोन में क्या हुआ था?
काबुल से अमेरिकियों के पलायन के बीच सोशल मीडिया पर वो तस्वीरें वायरल हो रही थीं जिनमें अमेरिकी दूतवास के लोगों को मिलिट्री के हेलिकॉप्टरों में ले जाया जा रहा था. कई लोगों के लिए ये तस्वीरें गुज़रे वक़्त के लौट आने जैसी थीं.
साल 1975 में फ़ोटोग्राफ़र हलबर्ट वैन एस ने वियतनाम युद्ध के ख़त्म हो जाने के बाद वो यादगार तस्वीरें खींची थीं, जिनमें वियतनाम के सबसे बड़े शहर सैगोन की एक इमारत के छत से हेलिकॉप्टर पर लोग अफ़रा-तफ़री में सवार होने की कोशिश कर रहे थे.
विश्लेषक और दोनों ही पार्टियों के अमेरिकी सांसद सैगोन और काबुल में अमेरिका के कथित पतन की तुलना कर रहे थे.
तकरीबन 20 सालों तक चली वियतनाम की लड़ाई में एक तरफ़ उत्तरी वियतनाम की कम्युनिस्ट सरकार थी तो दूसरी तरफ़ अमेरिका का सहयोगी दक्षिणी वियतनाम. इस लड़ाई में अमेरिका को जानोमाल का बहुत नुक़सान उठाना पड़ा था.
'सैगोन का पतन' उस घटना को कहा जाता है जब 30 अप्रैल, 1975 को कम्युनिस्ट फौज ने सैगोन पर नियंत्रण कर लिया था.
बगराम और काबुल की घटना
जुलाई के पहले हफ़्ते में बगराम एयरबेस के कमांडर जनरल असदुल्ला कोहिस्तानी ने बीबीसी को बताया था कि अमेरिकी सेना ने बगराम एयरबेस रात के अंधेरे में अफ़ग़ानिस्तान को बताए बिना छोड़ दिया.
उन्होंने कहा था कि अमेरिकियों ने दो जुलाई की सुबह तीन बजे बगराम छोड़ दिया. अफ़ग़ानिस्तान के सुरक्षा बलों को इसकी जानकारी कुछ घंटे बाद मिली. हालांकि अमेरिका ने किसी को बताए बिना बगराम छोड़ने के आरोपों से इनकार किया था.
इस सोमवार को अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से बताया कि अमेरिका ने अपने दूतावास के सभी कर्मचारियों को दूतावास की इमारत से हटाकर काबुल एयरपोर्ट पर शिफ़्ट कर दिया है.
अमेरिकी सेना अपने दूतावास कर्मचारियों की हिफ़ाज़त कर रही है और अपने लोगों को अफ़ग़ानिस्तान से बाहर ले जाने के लिए एयरपोर्ट का एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल अपने ज़िम्मे ले लिया है.
तालिबान को लेकर चीन का रुख़
अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल पर तालिबान के नियंत्रण के बाद चीन ने सोमवार को कहा था कि वो तालिबान के साथ 'दोस्ताना रिश्ते' बनाने के लिए इच्छुक है.
समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने संवाददाताओं से कहा, "अफ़ग़ान लोग अपनी किस्मत का फ़ैसला खुद करें, चीन उनके इस हक की इज़्ज़त करता है. चीन अफ़ग़ानिस्तान के साथ मैत्रीपूर्ण और सहयोगात्मक रिश्ते विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए इच्छुक है."
इससे पहले चीन ने ये संकेत दिए थे कि वह अफ़ग़ानिस्तान में अपने दूतावास खुले रखेगा. चीन ने अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद अपने नागरिकों को ये भी कहा है कि वे घर के अंदर रहें और स्थिति के प्रति सचेत रहें.
इसके साथ ही चीन ने 'अफ़ग़ानिस्तान में भिन्न गुटों' से अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहा है. तालिबान के प्रतिनिधि बीती जुलाई में चीन गए थे, जहाँ उनकी मुलाक़ात विदेश मंत्री वांग यी से हुई थी.
उस समय इस बैठक को राजनीतिक ताक़त के रूप में तालिबान की अंतरराष्ट्रीय मान्यता के रूप में देखा गया था चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि वह अफ़ग़ानिस्तान के आंतरिक मामलों में 'हस्तक्षेप नहीं करने' की नीति का पालन करेगा.
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