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जो बाइडन प्रशासन में कौन बनेगा विदेश मंत्री, कौन होगा संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी दूत?
जनवरी में जो बाइडन अमेरिका के नए राष्ट्रपति बनेंगे. तब उनकी टीम में कौन कौन होगा? इसे लेकर उनकी ट्रांजिशन टीम ने एक प्रेस रिलीज के ज़रिए जानकारी दी.
जब बाइडन राष्ट्रपति बनेंगे तो ओबामा प्रशासन के दूसरे कार्यकाल में विदेश मंत्री रहे जॉन केरी जलवायु परिवर्तन से जुड़ा विभाग संभालेंगे.
अवरिल हेन्स नेशनल इंटेलिजेंस संभालने वाली पहली महिला बनेंगी.
वहीं लंबे समय से बाइडन के सहयोगी रहे एंटनी ब्लिंकेन विदेश मंत्री होंगे.
14 दिसंबर को राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे घोषित किए जाएंगे
डोनाल्ड ट्रंप से लगातार हार को स्वीकार करने की मांग के बीच बाइडन की टीम के सहयोगियों के नाम सामने रखे गए हैं. ट्रंप ने बिना सबूत अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में व्यापक धांधली का आरोप मढ़ा है और चुनाव परिणामों को लेकर वे लगातार क़ानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की बात कहते रहे हैं.
एक अनुमान के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जो बाइडन को 306 इलेक्टोरल वोट जबकि डोनाल्ड ट्रंप को 232 वोट मिले. हालांकि जीत किसकी हुई है इसकी आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है.
अमेरिकी इलेक्टोरल कॉलेज की तरफ से 14 दिसंबर को राष्ट्रपति चुनाव के विजेता की औपचारिक पुष्टि की जाएगी.
राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए बाइडन को 270 इलेक्टोरल वोट की ज़रूरत थी और जितने वोट उनके पक्ष में बताए जा रहे हैं वो जादुई आंकड़े से 37 अधिक है.
बाइडन ने क्या कहा?
सोमवार को अपनी टीम की घोषणा के बाद बाइडन ने कहा, "मुझे पहले दिन से ऐसी टीम की ज़रूरत है जो अमेरिका को वापस टॉप पर पहुंचाए, जिस सबसे बड़ी चुनौती का हम सामना कर रहे हैं उससे लिए तैयार हो, और हमारी सुरक्षा, समृद्धि और हमारे मूल्यों को आगे लेकर जाए."
बाइडन की टीम के बारे में हम क्या जानते हैं?
जॉन केरी ने 2015 में अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के तौर पर पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते पर हस्ताक्षर किया था. हालांकि ट्रंप ने बाद में उससे हटने का फ़ैसला किया. उन्हें बाइडन ने जलवायु पर राष्ट्रपति के विशेष दूत की भूमिका के लिए चुना है.
इस ख़बर के आने के बाद केरी ने ट्वीट किया, "अमेरिका में जल्द ही ऐसी सरकार होगी जो जलवायु संकट को बेहद महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा ख़तरा मानती है. मुझे चयनित राष्ट्रपति के सहयोगी बनने का गर्व है. हमारे सहयोगी और जलवायु आंदोलन के युवा नेता राष्ट्रपति के जलवायु दूत के रूप में इस संकट का मुक़ाबला करेंगे."
केरी एक वरिष्ठ डेमोक्रैट राजनेता हैं. 2004 में वे राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवार थे लेकिन जॉर्ज डब्ल्यू बुश से हार गए थे. 2020 के चुनाव में डेमोक्रैटिक पार्टी के प्रत्याशी के रूप में उन्होंने जो बाइडन के नाम का समर्थन किया था. साथ ही वो बाइडन के चुनावी अभियान में भी शामिल हुए थे.
58 वर्षीय एंटनी ब्लिंकेन विदेश मंत्री होंगे जो लंबे समय से बाइडन के सलाहकार रहे हैं. वे ओबामा प्रशासन में उप विदेश मंत्री और उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रह चुके हैं. तब बाइडन उप राष्ट्रपति थे. ब्लिंकेन 1994 से 2001 के बीच राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के स्टाफ भी रहे हैं.
ब्लिंकेन लोक सेवा में आने से पहले द न्यू रिपब्लिक मैगज़ीन के रिपोर्टर भी रह चुके हैं. वहां उन्होंने विदेश नीति पर बहुत कुछ लिखा है. ब्लिंकेन ने हावर्ड कॉलेज और कोलंबिया लॉ कॉलेज से पढ़ाई की है. उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई पेरिस में की जहां वे नौ साल की उम्र से 18 साल की उम्र तक रहे.
ब्लिंकेन बाइडन की विदेश नीति के एजेंडे को संभालेंगे. उम्मीद जताई जा रही है कि यह नीति पश्चिम के देशों के साथ दोबारा सहयोग पर जोर देने वाली होगी.
अलेजांद्रो मायोरकास को गृह सुरक्षा विभाग के सचिव के लिए चुना गया है. इस पद के लिए चुने जाने वाले वो पहले लातीनी हैं.
जेक सुलिवन, जो हिलेरी क्लिंटन, राष्ट्रपति बराक ओबामा और बाइडन के शीर्ष सहयोगियों में रहे हैं उन्हें, बतौर अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार टीम में चयनित किए गए हैं.
सुलिवन ओबामा के दूसरे कार्यकाल में बाइडन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थे. सुलिवन 2016 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव अभियान के लिए हिलेरी क्लिंटन के वरिष्ठ नीति सलाहकार के तौर पर काम कर चुके हैं. उन्होंने येल से राजनीति विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंध में बीए करने के बाद ऑक्सफर्ड से अंतरराष्ट्रीय संबंध में एम. फिल किया है, जहां वे रोड्स स्कॉलर भी रहे हैं.
लिंडा थॉमस-ग्रीनफील्ड को संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका का राजदूत नामांकित किया गया है. उन्होंने भी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ काम कर रखा है. वे 2013 से 2017 तक अफ़्रीकी मामलों की उप विदेश मंत्री रह चुकी हैं.
विदेश सेवा के अपने 35 साल के करियर में वे लाइबेरिया, स्वीटजरलैंड, पाकिस्तान, नाइजीरिया, जमैका जैसे देशों में काम कर चुकी हैं. 2017 में वे रिटायर हो चुकी थीं. अब एक बार फिर वो लोक सेवा में लौट रही हैं.
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