पाकिस्तान में सेना की आलोचना पड़ेगी महंगी, इमरान की पार्टी का प्रस्ताव

पाकिस्तान की सत्तारूढ़ पार्टी के एक सांसद ने बुधवार को संसद में एक निजी विधेयक पेश किया जिसमें सेना का मज़ाक उड़ाने या अपमान करने वाले व्यक्ति को जेल में डालने का प्रस्ताव है.

पाकिस्तान के स्थानीय मीडिया के अनुसार, इस बिल में माँग की गई है कि जानबूझकर सेना को बदनाम करने, उपहास करने या पाकिस्तान की सेना के ख़िलाफ़ माहौल बनाने वालों को सज़ा देने की व्यवस्था बनाई जाए.

इस निजी विधेयक में प्रस्ताव है कि दोषी पाये जाने पर व्यक्ति को जुर्माना, कारावास या दोनों की सज़ा होनी चाहिए.

इस ताज़ा विधेयक को पाकिस्तानी फ़ौज के पूर्व लेफ़्टिनेंट जनरल असीम सलीम बाजवा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से जोड़कर देखा जा रहा है. कहा जा रहा है कि यह मामला सामने आने के बाद से ही इस तरह के विधेयक पर चर्चा शुरू हुई.

दो साल तक क़ैद की माँग

जनरल बाजवा प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के विशेष सहायक और सीपीईसी यानी चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कोरिडोर के चेयरमैन भी हैं. बाजवा और उनके परिवार पर बेतहाशा संपत्ति अर्जित करने के आरोप हैं. मगर बाजवा ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, पाकिस्तान के नागरिक अधिकार समूह और विपक्षी दल काफ़ी समय से यह कहते रहे हैं कि 'सेना का पाकिस्तान की राजनीति में दखल है और पाकिस्तानी फ़ौज ने हमेशा ही सरकार की आलोचना करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई का समर्थन किया है.'

हालांकि पाकिस्तानी फ़ौज इस तरह के सभी आरोपों से इनकार करती है.

रक्षा मामलों पर संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष अमजद अली ख़ान द्वारा पेश किये गए इस विधेयक में कहा गया है कि "इस संशोधन का उद्देश्य सशस्त्र बलों के ख़िलाफ़ घृणा और अपमानजनक व्यवहार को रोकना है."

इस विधेयक में दोषी को दो साल तक जेल की सज़ा और पाँच लाख पाकिस्तानी रुपये तक का जुर्माना लगाने की बात कही गई है.

'अनावश्यक क़दम'

सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीके-इंसाफ़ (पीटीआई) पार्टी के पास संसद के निचले सदन में साधारण बहुमत है, लेकिन ऊपरी सदन में उनका बहुमत नहीं है, जहाँ इस क़ानून को पारित कराने के लिए उन्हें विपक्षी दलों को साथ लाना होगा.

विपक्ष के नेता, पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के सीनेटर परवेज़ रशीद ने कहा, "अगर सत्ता के केंद्र में बैठे लोग इस क़ानून को लाना चाहते हैं, तो वो इसे पारित कराने की पूरी कोशिश करेंगे. मगर हमें आशंका इसके दुरुपयोग की है जो चिंता का विषय है."

एक दक्षिण एशिया क़ानूनी विशेषज्ञ, इंटरनेशनल कमीशन ऑफ़ जुरिस्ट्स की रीमा ओमर ने कहा कि 'यह क़दम अनावश्यक था क्योंकि संविधान पहले ही पाकिस्तान में सशस्त्र बलों की शुचिता का ध्यान रखता है और उनके लिए एक ख़ास जगह बनी रहने की गारंटी देता है.'

पिछले हफ़्ते ही पाकिस्तान पुलिस ने एक पत्रकार को सेना को बदनाम करने के आरोप में गिरफ़्तार किया. इसके अलावा पुलिस ने दो अन्य पत्रकारों के ख़िलाफ़ भी सैन्य दुर्भावना के आरोप में मामले दर्ज किये.

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