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जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे ने स्वास्थ्य कारणों से दिया इस्तीफ़ा
जापान के प्रधानमंत्री शिज़ो आबे ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफ़ा देने की घोषणा की है.
उन्होंने कहा है कि वो नहीं चाहते थे कि उनकी बीमारी की वजह से उनकी निर्णय लेने की क्षमता पर असर पड़े.
उन्होंने साथ ही जापान के लोगों से अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाने के लिए माफ़ी भी माँगी.
वो अपना उत्तराधिकारी चुने जाने तक प्रधानमंत्री बने रहेंगे.
65 वर्षीय आबे को कई साल से अल्सरेटिव कोलाइटिस की समस्या थी, लेकिन कहा जा रहा है कि हाल में उनकी स्थिति ज़्यादा बिगड़ गई.
शिंज़ो आबे का कार्यकाल सितंबर 2021 में ख़त्म होने वाला था. सोमवार को शिंज़ो आबे जापान के सबसे लंबे समय तक पीएम रहने का रिकॉर्ड तोड़ चुके थे.
2007 में भी उन्होंने अल्सरेटिव कोलाइटिस की वजह से अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. ये एक बड़ी आंत की एक गंभीर बीमारी है, जिससे आबे किशोरावस्था से जूझ रहे हैं.
इस बीमारी में बड़ी आंत की अंदरूनी परत में सूजन और जलन हो जाती है जिससे कई छोटे-छोटे छाले बनने लगते है. उन छालों और सूजन के कारण पेट-संबंधी परेशानियां होने लगती हैं जो पाचन तंत्र पर बुरा असर डालती हैं और सही समय पर इलाज ना कराने पर ख़तरे का कारण भी बन सकती है. इससे कोलोरेक्टल (मलनाली) कैंसर होने की संभावना भी होती है.
चिंताएं क्यों हैं?
एक हफ़्ते में दो बार अस्पताल जाने से ये सवाल उठने लगे कि क्या आबे की सेहत बिगड़ रही है.
उन्होंने अस्पताल जाने की वजह नहीं बताई, लेकिन ख़बरों के मुताबिक़ एक बार तो वो आठ घंटे तक अस्पताल में रहे.
उनकी सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) के अधिकारियों ने पहले इस्तीफा देने की अटकलों को ख़ारिज किया था और कहा था कि प्रधानमंत्री की सेहत ठीक है.
मंगलवार को उनके एक सहयोगी ने रॉयटर्स से कहा कि उन्हें लगता है कि प्रधानमंत्री आबे अपना कार्यकाल पूरा करेंगे.
एलडीपी में टैक्स पैनल के प्रमुख अकीरा अमारी ने इस बात को ख़ारिज किया कि प्रधानमंत्री आम चुनाव कराने के लिए जल्द संसद के निचले सदन को भंग करेंगे.
उन्होंने कहा, "फिलहाल चुनाव नहीं होगा."
कोरोना वायरस की महमारी से निपटने को लेकर पीएम आबे की आलोचना भी हो रही थी. इसके अलावा उनकी पार्टी के सदस्यों पर लगे स्कैंडल के आरोपों के कारण भी वो घेरे में थे.
कोरोना वायरस की महामारी के कारण जापान की अर्थव्यवस्था की हालत ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर है. पीएम आबे ने वादा किया था कि वो अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाएंगे.
आबे के काम ना कर पाने की स्थिति में क्या होगा?
जापान के क़ानून के तहत अगर आबे अपनी भूमिका निभाने में असमर्थ हैं तो एक अस्थायी प्रधानमंत्री नियुक्त किया जा सकता है, जिनके पद पर बने रहने की कोई सीमा तय नहीं है.
उप प्रधानमंत्री तारो आसो, जो वित्त मंत्री भी हैं, वो इस लाइन में सबसे आगे हैं. उनके बाद चीफ़ कैबिनेट सेकेट्री योशिहिदे सुगा आते हैं.
कार्यकारी प्रधानमंत्री आकस्मिक चुनाव का ऐलान नहीं कर सकते हैं, लेकिन जब तक नए पार्टी नेता और प्रधानमंत्री का चुनाव नहीं होता तब तक वो संधियों और बजट जैसे अन्य मसलों पर लीड ले सकते हैं.
इस्तीफा देने के घोषणा के बाद अब आबे की एलडीपी पार्टी में मतदान होगा जिसमें तय किया जाएगा कि अध्यक्ष के तौर पर उनकी जगह कौन लेगा.
इस चुनाव के बाद एक संसदीय मतदान होगा, जिसमें नया प्रधानमंत्री चुना जाएगा.
मतदान जीतने वाला व्यक्ति आबे के कार्यकाल के अंत यानी सितंबर 2021 के ख़त्म होने तक पद पर बना रहेगा.
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