बेलारूस में प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं?

    • Author, तातसियाना मेलनीचुक
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़, बेलारूस

गुजरे 26 सालों में बेलारूस में कभी भी साफ-सुथरे चुनाव नहीं हुए हैं. 9 अगस्त को यहां राष्ट्रपति पद के लिए वोट डाले गए थे. इन चुनावों में मौजूदा नेता को एक और जबरदस्त जीत हासिल हुई.

लेकिन, पहली बार हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर आ गए और दोबारा गिनती की मांग करने लगे. ऐसे में ऐसा इस बार क्यों हो रहा है और क्या बदल गया है?

ये चीजें समझने के लिए थोड़ा सा पीछे चलते हैं. .

वोद्का बनाम कोरोना वायरस

जब कोरोना वायरस महामारी पूरे यूरोप में कहर ढा रहा था उस वक्त बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको ने इसे एक "मनोविकृति" बताया था और वोडका के एक शॉट, सौना और ट्रैक्टर की एक राइड को सभी बीमारियों का इलाज बताया था.

लेकिन, बेलारूस के लोग आस-पड़ोस के देशों को लॉकडाउन में जाते और अपनी सीमाएं बंद करते हुए देख रहे थे.

ऐसे में, अधिकारियों से किसी वास्तविक आदेश की गैरमौजूद के बावजूद कई लोगों ने खुद ही मास्क पहनना, बच्चों को स्कूल से निकालना और सामाजिक दूरी जैसे कदम उठाने शुरू कर दिए थे.

दूसरे शब्दों में लोगों ने मामलों को अपने हाथ में ले लिया था. इससे एक राजनीतिक जागरूकता पैदा हुई.

सर्गेई तिखानोवस्की कौन हैं?

दूसरी ओर, एक यूट्यूबर ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा.

सर्गेई तिखानोवस्की ने देश के लिए अपने जुनून से जुड़े हुए वीडियोज बनाए. वे पूरे बेलारूस गए, लोगों से बात की. उन्होंने इन वीडियोज को अपने चैनल अ कंट्री फॉर लाइफ पर डाले.

अपने वीडियोज में उन्होंने देश में मौजूद अपार संभावनाओं, तानाशाही के चलते देश को हुए नुकसान, भ्रष्टाचार और सुधारों के अभाव का जिक्र किया.

ऐसे में जब उनके फॉलोअर्स की संख्या बड़े पैमाने पर बढ़ी तो उन पर अधिकारियों का ध्यान गया.

हालांकि, उन्होंने अपने दर्शकों को प्रतिक्रिया करने या बदलाव लाने के लिए खुलकर उत्साहित नहीं किया, लेकिन उन्हें कई बार पकड़ा गया. बाद में उन्हें जेल में डाल दिया गया और उन्हें राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने से रोक दिया गया.

स्वेतलाना तिखानोवस्काया कौन हैं?

स्वेतलाना एक सामान्य घर पर रहने वाली मां रहना चाहती थीं और अपने दो छोटे बच्चों की देखभाल करना चाहती थीं.

सर्गेई तिखानोवस्की की पत्नी और पूर्व शिक्षक यह मानती हैं कि वे रैलियों में बोलने की बजाय अपने बच्चों को खाना खिलाना ज्यादा पसंद करती हैं, लेकिन वे कहती हैं कि उनके पास कोई विकल्प नहीं था.

जब उनके पति पकड़े गए तो उन्होंने लुकाशेंको के राष्ट्रपति के तौर पर दोबारा चुनाव को चुनौती देने के उनके मिशन को अपने हाथ में ले लिया.

वे राजनीतिक रूप से अनभिज्ञ थीं और उन्हें अपनी जीत के आसार को लेकर भरोसा नहीं था. हालांकि, उनके नामांकन के लिए हजारों की संख्या में वोटर समर्थन में खड़े हो गए.

किसी वास्तविक ठोस राजनीतिक प्रोग्राम के अभाव में तिखानोवस्काया ने एक साफ-सुथरे चुनाव और बदलाव का वादा किया.

जुलाई में उनके साथ दो और महिलाएं भी जुड़ गईं. ये थीं वेरोनिका सेप्कालो जो कि एक होने वाले उम्मीदवार की पत्नी थीं और मारिया कोलेस्निकोवा जो कि एक अन्य की कैंपेन मैनेजर थीं.

बदलाव?

अपने कैंपेन की लोकप्रियता के बावजूद किसी को भी इस वास्तविक असर को लेकर कोई भ्रम नहीं था.

राष्ट्रपति लुकाशेंको ने स्वेतलाना तिखानोवस्काया को "विदेशी कठपुतली आकाओं द्वारा नियंत्रित एक बेचारी लड़की" कहकर खारिज कर दिया.

उन्होंने कहा, "उन्हें मेरा देश नहीं मिलेगा."

ऐसे में जब चुनाव आयोग ने लुकाशेंको को एक जबरदस्त जीत मिलने का ऐलान किया तो किसी को कोई अचरज नहीं हुआ. लुकाशेंको 80 फीसदी वोटों से दोबारा जीत गए थे.

हालांकि, चौंकाने वाली बात यह थी कि पूरे बेलारूस के शहरों में उनकी जीत के खिलाफ जगह-जगह विरोध-प्रदर्शन होने लगे. दूसरी ओर, अधिकारियों ने पूरी ताकत से इन प्रदर्शनों को दबाने की कोशिश की.

हजारों लोग इन प्रदर्शनों के दौरान आंसूगैस, पानी की बौछार और रबड़ की गोलियों से जख्मी हुए.

स्वेतलाना तिखानोवस्काया कहां हैं?

वोट के अगले दिन तिखानोवस्काया गायब हो गईं.

मंगलवार को तड़के लिथुआनिया के विदेश मंत्री ने ट्वीट किया कि वे उनके देश में सुरक्षित हैं और अपने बच्चों के साथ हैं.

इसके कुछ बाद स्वेतलाना के दो वीडियोज आए जो कि उनके बेलारूस छोड़ने से पहले फिल्माए गए थे.

वीडियोज में वे साफतौर पर तनाव में दिख रही हैं. वे एक कमजोर महिला होने और मानवीय जिंदगी के बलिदान से बड़ा कुछ भी नहीं होने के बारे में बात कर रही हैं.

वे कहती हैं कि उनके बच्चे किसी भी चीज से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं.

एक स्क्रिप्ट को पढ़ते हुए वे अपने देशवासियों से यह कहती हैं कि वे बाहर न निकलें और प्रदर्शन न करें और चुनाव के नतीजों को स्वीकार कर लें.

सभी संकेत इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि तिखानोवस्काया को जबरदस्ती देश से जाने के लिए मजबूर किया गया.

आगे क्या?

राष्ट्रपति की सत्ता को अभूतपूर्व चुनौती के बावजूद बेलारूस में नया नेता हाल-फिलहाल में आने की उम्मीद कम ही है.

राजनीतिक एक्सपर्ट्स कहते हैं कि भले ही तिखानोवस्काया देश की बदलाव की मांग का प्रतीक बन गई थीं, लेकिन वे इसे मुमकिन नहीं कर पाईं.

गुजरे कुछ हफ्तों में यह दिखाई दिया है कि देश शायद किसी नए शख्स के लिए तैयार है.

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