चीनी जासूस जिसने लिंक्डइन के ज़रिए अमरीका को हिलाकर रख दिया

महत्वाकांक्षी और हाल में पीएचडी में दाखिला लेने वाले सिंगापुर के छात्र जुन वेई येओ उस वक्त बेहद खुश हो गए जब उन्हें 2015 में बीजिंग में चीन में प्रेज़ेंटेशन देने के लिए बुलाया गया.

डॉक्टरेट में उनकी रिसर्च चीन की विदेश नीति से जुड़ी हुई थी. उन्हें उभरते हुए सुपरपावर मुल्क के बारे में प्रत्यक्ष रूप से जानने का मौक़ा मिल रहा था.

अपने प्रेज़ेंटेशन के बाद जुन वेई, जिन्हें अमरीकी कोर्ट के दस्तावेजों के मुताबिक डिक्सन के नाम से भी जाना जाता है, के पास कई लोग आए जिन्होंने बताया कि वे चीनी थिंक टैंक्स के लिए काम करते हैं.

उन्होंने कहा कि वे उन्हें राजनीतिक रिपोर्ट्स और जानकारियां मुहैया कराने के लिए भुगतान करना चाहते हैं. उन्होंने बाद में बताया कि वे उनसे क्या चाहते हैः "शटलबट"- अफवाहें और अंदरूनी जानकारियां.

शपथ लेकर अदालत में दी गई गवाही के मुताबिक, जल्द ही वे समझ गए कि ये चीनी इंटेलिजेंस एजेंट्स हैं, लेकिन वे उनके संपर्क में बने रहे.

पहले उनसे दक्षिण पूर्व एशिया के देशों पर फोकस करने को कहा गया, लेकिन बाद में उनकी दिलचस्पी हटकर अमरीकी सरकार पर टिक गई.

इस तरह से डिक्सन चीनी एजेंट बन गए. वे प्रोफेशनल नेटवर्किंग साइट लिंक्डइन का इस्तेमाल करने लगे, उन्होंने एक फेक कंसल्टिंग कंपनी का सहारा लिया और अमरीकी टारगेट्स को जाल में फंसाने के लिए एक जिज्ञासु शिक्षक का पर्दा डाल इस साइट का इस्तेमाल किया.

पांच साल बाद शुक्रवार को यूएस और चीन के बीच गहरे तनाव और अमरीका के चीन के जासूसों को ढूंढ निकालने की प्रतिबद्धता के बीच येओ ने एक अमरीकी अदालत में "एक विदेशी ताकत के अवैध एजेंट" होने का दोष मान लिया.

39 साल के येओ को 10 साल तक की जेल की सज़ा हो सकती है.

क्या कहते हैं पुराने साथी

सिंगापुर के ली कुआन यू स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी (एलकेवाईएसपीपी) के पूर्व छात्र इस खबर को सुनकर सदमे में हैं.

ये संस्थान एशिया के कुछ शीर्ष नौकरशाहों और सरकारी अधिकारियों को प्रशिक्षण देता है.

नाम न छापने की शर्त पर एक पूर्व पोस्टग्रेजुएट स्टूडेंट ने कहा, "वह क्लास का काफी सक्रिय छात्र था. मैं उसे हमेशा एक बुद्धिमान शख्स के तौर पर देखता था."

उन्होंने बताया कि वो अक्सर सामाजिक असमानता के बारे में बात करते थे और बताते थे कि जब वे बच्चे थे तो उनके परिवार ने किस तरह से आर्थिक तंगी का सामना किया था.

संस्थान के एक पूर्व स्टाफ ने एक अलग कहानी बताई. उन्होंने कहा कि येओ को लगता था कि वे ज़रूरत से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं.

येओ के पीएचडी सुपरवाइजर हुआंग जिंग थे जो कि एक हाई प्रोफाइल चीनी अमरीकी प्रोफ़ेसर हैं. उन्हें एक विदेशी एजेंट होने के चलते सिंगापुर से 2017 में निकाल दिया गया था.

हुआंग जिंग ने हमेशा इन आरोपों को खारिज किया है. सिंगापुर छोड़ने के बाद उन्होंने पहले वॉशिंगटन डीसी में काम किया और अब वे बीजिंग में काम कर रहे हैं.

येओ के दोष स्वीकार करने के साथ कोर्ट के जारी किए गए दस्तावेज़ के मुताबिक, छात्र ने चीन में दर्जनों बार अपने चीनी हैंडलरों से अलग-अलग जगहों पर मुलाकात की.

एक मीटिंग के दौरान उन्हें यूएस डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और चीन-अमरीका ट्रेड वॉर के बारे में जानकारियां हासिल करने के लिए कहा गया था.

सिंगापुर के विदेश मंत्रालय में पूर्व स्थाई सचिव बिलाहारी कौसिकान ने कहा कि उन्हें इस बात में कोई संदेह नहीं है कि डिक्सन को यह पता था कि वे चीनी इंटेलिजेंस सेवाओं के लिए काम कर रहे हैं.

लिंक्डइन का इस्तेमाल

येओ ने लिंक्डइन का इस्तेमाल करके अपने अहम कॉन्टैक्ट्स बनाए. इस साइट का इस्तेमाल 70 करोड़ से ज्यादा लोग करते हैं.

पूर्व सरकारी और सैन्य कर्मचारी और कॉन्ट्रैक्टर्स इस साइट पर सार्वजनिक रूप से अपने पहले किए गए कामों का ब्योरा डालने में कोई संकोच नहीं करते हैं. इसके जरिए उनका मकसद निजी सेक्टर में मोटी तनख्वाह वाली नौकरियां हासिल करना होता है.

यह विदेशी खुफिया एजेंसियों के लिए एक सोने की खान जैसा है. पिचले साल मई में एक पूर्व सीआईए अफसर केविन मेलोरी को 20 साल की कैद की सजा सुनाई गई क्योंकि उन्होंने एक चीनी एजेंट को गोपनीय सैन्य सूचनाएं मुहैया कराई थीं. इस अफसर को लिंक्डइन पर ही निशाना बनाया गया था.

2017 में जर्मनी की इंटेलिजेंस एजेंसी ने कहा कि चीनी एजेंट्स ने कम से कम 10,000 जर्मन लोगों को निशाना बनाने के लिए लिंक्डइन का सहारा लिया था.

लिंक्डइन ने इस स्टोरी पर अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन उसने पहले कहा था कि वह इस तरह की ग़लत गतिविधियों को रोकने के लिए कई उपाय कर रही है.

अमरीकी सेना से जुड़े लोगों से संपर्क

जिनसे संपर्क किया गया उनमें से एक यूएस एयरफोर्स के एफ-35 फाइटर जेट प्रोग्राम पर काम कर चुका था और उसे पैसे की दिक्कतें रही थीं. एक और शख्स यूएस आर्मी का अफसर था जो कि पेंटागन में रह चुका था.

इस तरह के कॉन्टैक्ट्स को ढूंढने में येओ को लिंक्डइन एल्गोरिद्म की मदद मिली. हर दफा जब भी येओ किसी का प्रोफाइल देखते तो उन्हें इसी तरह के अनुभव वाले दूसरे कॉन्टैक्ट्स भी सुझाव में मिलते थे.

कोर्ट के दस्तावेजों के मुताबिक, उनके हैंडलरों ने उन्हें सलाह दी कि वे अपने टारगेट्स से पूछें कि क्या वे अपने काम से असंतुष्ट हैं या उन्हें किसी तरह की वित्तीय समस्या हो रही है.

2018 में येओ ने अपनी कंसल्टेंसी फर्म के लिए एक फर्जी ऑनलाइन जॉब एड पोस्ट किया. उन्होंने बताया कि उन्हें 400 से ज्यादा सीवी मिले जिनमें से 90 फीसदी सिक्योरिटी क्लीयरेंस हासिल करने वाले यूएस मिलिटरी और सरकारी कर्मचारियों की ओर से थे. इनमें से कुछ सीवी को उनके चीनी हैंडलरों को भेजा गया.

चाइनीज़ कम्युनिस्ट एस्पियोनेजः एन इंटेलिजेंस प्राइमर के सहलेखक मैथ्यू ब्राज़ील कहते हैं कि लिंक्डइन का इस्तेमाल खुल्लमखुल्ला हो रहा है लेकिन इसमें चौंकने जैसा कुछ भी नहीं है.

वह कहते हैं कि कंसल्टेंट रिपोर्ट्स हासिल करना एजेंट्स का निशानों को अपने साथ जोड़ने का एक जरिया होता है.

नेशनल सिक्योरिटी के लिए यूएस असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल जॉन डीमर्स कहते हैं कि यह मामला इस बात की मिसाल है कि कैसे चीन अमरीकी समाज के खुलेपन का फायदा उठा रहा है.

रविवार को सिंगापुर के गृह मंत्रालय ने कहा कि इस मामले की जांच से देश की सुरक्षा के लिए कोई सीधा खतरा नहीं पता चला है.

माना जा रहा है कि डिक्सन ने अपने संपर्कों से उस तरह से काम नहीं लिया जैसा उनके हैंडलर चाहते थे. लेकिन, 2019 में वे इन निर्देशों के साथ यूएस गए कि वे सेना अधिकारी को सूचनाओं का एक स्थाई ज़रिया बनाएंगे.

वे ऐसा करने से पहले ही पकड़े गए.

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