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भारत चीन सीमा विवाद: तिब्बत में मार्शल आर्ट ट्रेनर क्यों भेज रहा है चीन?
भारत और चीन के बीच गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से ही दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है.
चीन का कहना है कि वह अपनी सेनाओं को प्रशिक्षण देने के लिए बीस मार्शल आर्ट ट्रेनर तिब्बत भेज रहा है.
चीन ने अपने इस फ़ैसले की कोई वजह तो नहीं बताई है लेकिन ये ट्रेनर ऐसे समय में भेजे जा रहे हैं जब भारत के साथ सीमा पर तनाव बढ़ा हुआ है.
15-16 जून की रात लद्दाख के गलवान घाटी क्षेत्र में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई झड़प में बीस भारतीय सैनिकों की मौत हो गई थी. चीन के सैनिक भी हताहत हुए थे लेकिन उनकी संख्या के बारे में कोई जानकारी जारी नहीं की गई है.
भारत और चीन के बीच 1996 में हुए समझौते के तहत लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल यानी वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास भारत और चीन के जवानों के हथियारों या विस्फोटकों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है.
हांगकांग के मीडिया के मुताबिक़ चीन की मीडिया वेबसाइटों में तिब्बत भेजे जा रहे सेना के ख़ास मार्शल आर्ट ट्रेनरों के बारे में ख़बरें प्रकाशित हुई हैं.
सरकारी चैनल सीसीटीवी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि एंबो फ़ाइट क्लब से जुड़े बीस फ़ाइटर तिब्बत की राजधानी ल्हासा में रहेंगे. हालांकि चीन के मीडिया में ये नहीं बताया गया है कि ये ट्रेनर भारत से लगी सीमा पर तैनात सैनिकों को ट्रेनिंग देंगे.
गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के लिए चीन और भारत दोनों ने ही एक दूसरे को ज़िम्मेदार ठहराया है.
परमाणु शक्ति संपन्न दोनों देशों के बीच हिंसक झड़प के बाद से ही तनाव बेहद बढ़ा हुआ है.
लद्दाख में गलवान घाटी का ये मुश्किल और दूभर इलाक़ा अक्साई चिन क्षेत्र के पास है. अक्साई चिन इस समय चीन के नियंत्रण में है लेकिन भारत भी उस पर अपना दावा करता रहा है.
दोनों देशों के बीच 1962 में युद्ध भी हो चुका है. क़रीब पांच दशक बाद भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई झड़प में जानें गई हैं.
हालांकि एलएसी के आसपास बीते कुछ महीनों से भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ रहा है.
दोनों ही देश एक दूसरे पर आक्रामक रवैया अपनाने के आरोप लगा रहे हैं.
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