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पाकिस्तान ने माना उसे हुआ है बड़ा नुक़सान, आगे भी उम्मीद नहीं
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के वित्त और राजस्व सलाहकार अब्दुल हाफ़िज़ शेख ने कहा है, "कोरोना वायरस से पहले पाकिस्तान में राजकोषीय घाटे की आशंकाएं 7.6 फीसदी थीं. लेकिन अब कोरोना वायरस के बाद ये बढ़कर 8 फ़ीसदी हो जाएगा और ये 9 फ़ीसदी तक भी जा सकता है."
अब्दुल हाफ़िज़ शेख वो शख़्स हैं जो एक तरह से पाकिस्तान में वित्त मंत्री की भूमिका निभा रहे हैं.
करों से नहीं आएगा ज़रूरत के मुताबिक़ पैसा
इस्लामाबाद में समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए अपने इंटरव्यू में शेख ने कहा है कि कोरोना वायरस से जूझ रही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था टैक्स से हासिल होने वाले अपने राजस्व लक्ष्य को हासिल करने से भी चूक जाएगी.
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, जिसने पाकिस्तान को तीन साल तक के लिए 6 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज़ दिया है, उसने भी इस अर्थव्यवस्था के टैक्स आधारित राजस्व लक्ष्य को कम किया है. शेख ने बताया है कि पाकिस्तान इस साल 3.9 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपए करों से हासिल करेगा जो कि कम किए गए लक्ष्य 4.8 ट्रिलियन से भी 19 फ़ीसदी कम है.
कोरोना वायरस
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पाकिस्तान को 1.38 अरब डॉलर का रैपिड फाइनेंस पैकेज़ भी दिया है ताकि वह कोरोना वायरस के चलते पैदा हुए आर्थिक संकट में भुगतान संतुलन जैसी समस्याओं से बच सके.
शेख ने बताया है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस साल में एक से डेढ़ फ़ीसदी तक संकुचित होने की आशंका है.
ये कहते हुए शेख ने आईएमएफ़ की ओर से जताई गई आशंकाओं पर आधिकारिक मुहर लगाई है.
पाकिस्तान साल 2019-20 में 2.4 फ़ीसदी की दर से आर्थिक प्रगति की ओर बढ़ रहा था. ऐसा करते हुए इमरान सरकार को अपनी अर्थव्यवस्था को खड़ा करने में मुश्किल का सामना करना पड़ा रहा है.
विदेशी निवेश घटने का संकट
इसके साथ ही पाकिस्तान के सामने करेंट अकाउंट और विदेशी निवेश कम होने जैसी समस्याएं भी हैं.
शेख ने कहा, "राजस्व को बहुत जोरदार झटका लगा है. इसके साथ ही विदेशों से आने वाला पैसा भी नहीं आ रहा है. और इस सबसे ऊपर लोग परेशान हो रहे हैं."
विश्लेषकों की मानें तो मित्र देश, आर्थिक संस्थान, जी20 समूह के देशों और विकास के काम में जुटे साथियों की ओर से मिसले स्विफ़्ट लोन, मदद और कर्ज को चुकाने में राहत पाकिस्तान के लिए वह वित्तीय राहत देगी जिससे पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था चलाने में कामयाब हो पाएगा.
शेख बताते हैं कि पाकिस्तान ने जी20 देशों की ओर से 70 देशों के लिए प्रस्तावित किए कर्ज में राहत को हासिल करने के लिए प्रस्ताव भेजा है.
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक साल 1.8 अरब डॉलर का कर्ज चुकता करने में समर्थ नहीं होगा.
उन्होंने कहा, "विश्व बैंक और एशियन विकास बैंक हमें ख़ास पैकेज़ दे रहे हैं. अगर हमारे कर्जदाता इस समय हमारा दरवाजा खटखटाने नहीं आते हैं तो हम इस पैसे को पाकिस्तान में जरूरी मदों में खर्च कर सकते हैं. "
शेख के सामने साल 2020-2021 के लिए बजट को पेश करने का लक्ष्य है.
उन्होंने कहा, "पहला लक्ष्य ये है कि हमारे लोगों को कोरोना के बुरे प्रभाव से बचाना है और अपनी अर्थव्यवस्था को भी इस समस्या से बचाना है."
इसके साथ ही ग़रीबों को पैसे देने का आश्वासन देते हुए उन्होंने कहा, "हमें कोशिश ये करनी चाहिए कि हम अपने उद्योगों को चलाते रहें ताकि हमारा निर्यात प्रभावित न हो."
डिफेंस पर खर्च भी हो सकता है कम
पाकिस्तान पहले ही अपने उद्योगों को दोबारा से चलाने के लिए कई राहत पैकेज़ देने की घोषणा कर चुका है जो कि 6.31 अरब डॉलर के होंगे.
इसके साथ 1.2 करोड़ लोगों को पैसे देने की प्रक्रिया चल रही है.
हालांकि, कोई ये नहीं जानता है कि कोरोना वायरस संकट कब तक जारी रहेगा. लेकिन शेख का कहना ये है कि सरकार आगामी बजट में अपने घर्चे कम करके राजकोषीय घाटा कम कर सकती है. खर्चा कम करने की मदों में डिफेंस भी शामिल है.
शेख ने कहा है कि ये एक ऐसा मसला है जिस पर बातचीत जारी है.
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