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अमरीका के इस शहर में अपराधियों पर विमानों से निगरानी
अमरीका के बाल्टिमोर शहर में पुलिस ने 6 लाख निवासियों पर विमानों से आसमान से नज़र रखना शुरु किया है.
पुलिस की इस योजना को आज़ादी के अधिकार के समर्थक आंदोलनकारियों ने रोकने की कोशिश करते हुए कहा था कि इससे अमरीकी संविधान में प्रदत्त अनुचित तलाशी से सुरक्षा के अधिकार का हनन होता है.
मगर पिछले सप्ताह मैरीलैंड राज्य की एक अदालत ने उनकी आपत्तियों को ख़ारिज कर दिया और कहा कि अमरीका के सुप्रीम कोर्ट ने अतीत में इससे भी ज़्यादा दख़ल देनेवाली निगरानियों को सही ठहराया है.
बाल्टिमोर पुलिस का कहना है कि वो अपराध को रोकने के लिए शहर में किसी एक समय में ज़्यादा-से-ज़्यादा तीन विमानों को उड़ाएगी जो नीचे रास्तों पर नज़र रखेंगे.
उसने कहा कि विमानों से ये निगरानी तीन से छह महीने जारी रहेगी जो एक प्रोजेक्ट का हिस्सा है.
इस प्रोजेक्ट से बाल्टिमोर यूनिवर्सिटी, न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी और रैन्ड कॉर्पोरेशन नामक थिंक टैंक के शोधकर्ता जुड़े हैं.
क्या करेंगे विमान?
निगरानी में ख़ास तौर पर हत्या, ग़ैर-जानलेवा गोलीबारी, हथियारबंद लूटपाट और कार चोरियों पर नज़र रखा जाएगा.
इसमें लोग स्क्रीन पर एक छोटे बिन्दु की तरह दिखेंगे, यानी वो कौन हैं, किस नस्ल के हैं, ये सब जानकारी ज़ाहिर नहीं हो पाएगी.
उम्मीद ये है कि पुलिस वारदात की किसी जगह से इन बिन्दुओं के सहारे किसी अपराध की गुत्थी सुलझा सकेगी.
अमरीकी जाँच संस्था एफ़बीआई के 2018 के आँकड़ों के अनुसार बाल्टिमोर प्रति व्यक्ति हत्याओं के हिसाब से अमरीका में दूसरे नंबर पर आता है.
अपराध में देश में दूसरे नंबर पर बाल्टिमोर
2019 में वहाँ 348 हत्याएँ हुईं, और लगातार पाँचवें वर्ष वहाँ एक साल में 300 से ज़्यादा हत्याएँ हुईं.
इनमें से केवल एक तिहाई मामलों को सुलझाया जा सका.
बाल्टिमोर पुलिस के कमिश्नर माइकल हैरिसन ने एक बयान में कहा,"मैं हमारे समुदाय हिंसा की जो अस्वीकार्य हालत है उसे दुरुस्त करने के लिए हर उपलब्ध साधन का इस्तेमान बड़ी गंभीरता से करुँगा. मैं इसे लेकर काफ़ी आशान्वित हूँ और जो आँकड़े आएँगे उससे ये दर्शा पाउँगा कि इस तकनीक का इस्तेमाल कर हिंसक अपराधों पर लगाम लगाया जा सकता है".
बाल्टिमोर पुलिस ने इससे पहले 2016 में गोपनीय तौर पर निगरानी की एक योजना चलानी चाही थी.
मगर एक मीडिया संस्था ब्लूमबर्ग बिज़नेसवीक ने इसे उजागर कर दिया जिसके बाद पूरे देश में इसपर बवाल हुआ और पुलिस को इसे रद्द करना पड़ा.
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