ब्रिटेन में समय से पहले होगा आम चुनाव?

    • Author, टॉम एडगिंगटन
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

बिना किसी समझौते के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के पक्ष में ब्रितानी सांसदों के मतदान के बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने समय से पहले चुनाव करवाने की बात कही है.

प्रधानमंत्री का कहना है कि वो ब्रसेल्स में होने वाले यूरोपीय संघ के सम्मेलन से दो दिन पहले 15 अक्टूबर को चुनाव करवाना चाहते है.

जॉनसन जल्द क्यों करवाना चाहते हैं चुनाव?

क़ानूनी तौर पर ब्रिटेन में पाँच साल बाद ही अगले चुनाव करवाए जाते हैं और इस आधार पर 2022 से पहले चुनाव नहीं होने चाहिए.

माना जा रहा है कि मध्यावधि चुनाव करवाने के अपने ख़तरे हैं लेकिन बोरिस जॉनसन इसके ज़रिए कंज़र्वेटिव पार्टी के लिए अधिक सीटें सुनिश्चित कर सकते हैं. ऐसा कर के वो यूरोपीय संघ से अगल होने से जुड़े नए क़ानून आसानी से पास करा सकेंगे.

कैसे करवाए जा सकते हैं चुनाव?

फिक्स्ड टर्म पार्लियामेंट्स ऐक्ट के अनुसार प्रधानमंत्री अपनी इच्छा अनुसार कभी चुनाव नहीं करवा सकते. ऐसा करने के लिए उन्हें संसद के दो तहाई सांसदों की स्वीकृति चाहिए होती है.

दूसरे शब्दों में कहें तो जल्द चुनाव करवाने के लिए जॉनसन को कम से कम 434 सांसदों से हरी झंडी चाहिए. लेकिन बुधवार को चुनाव की अपील करते उनके एक प्रस्ताव को ज़रूरी समर्थन नहीं मिल सका.

क्या सरकार के पास कोई और रास्ता है?

मौजूदा सरकार के लिए फिर से चुनाव करवाना कोई असंभव काम नहीं है.

इसके लिए सरकार को एक नया क़ानून लाना होगा जिसमें चुनाव करवाने की मांग होगी और साथ ही कहा गया होगा कि "फिक्स्ड टर्म पार्लियामेंट्स ऐक्ट के बावजूद" चुनाव करवाए जाएं. इसके साथ दो तिहाई सासंदों की स्वीकृति की ज़रूरत को भी दरकिनार किया जा सकता है.

इस नए क़ानून को पास कराना आसान होगा क्योंकि इसे केवल सांसदों के एक साधारण बहुमत की आवश्यकता होगी.

इंस्टिट्यूट फोर गवर्नमेंट थिंकटैंक से जुड़ी कैथरीन हेडॉन कहती हैं "इसके ज़रिए चुनाव का दिन भी तय किया जा सकता है."

लेकिन ऐसा करने में अधिक वक्त लग सकता है क्योंकि इसके लिए संसद के दोनों सदनों, हाउस ऑफ लॉर्ड्स और हाउस ऑफ कॉमन्स की मंजूरी हासिल करनी होगी.

इसकी भी संभावना है कि प्रस्तावित क़ानून में संशोधन किया जाए. ब्रेग्ज़िट का समर्थन करने वाले सांसदों को इसमें संशोधन की अनुमति दी जाए और इससे ब्रेग्ज़िट की प्रक्रिया की अवधि को आगे बढ़ाया जा सके.

इसके अलावा सरकार के पास दूसरा रस्ता ये है कि वो एक प्रस्ताव लाए और दो-तिहाई सांसदों का समर्थन हासिल करे.

ज़्यादा जोखिम वाले विकल्प

सरकार के पास एक और विकल्प है जिसमें जोखिम अधिक है. सरकार यदि मध्यावधि चुनावों को लेकर अपनी मंशा बना चुकी है तो वो अपने ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव भी ला सकती है.

ऐसा हुआ तो सांसदों को ये तय करने का मौक़ा मिलेगा कि वे मौजूदा सरकार को बनाए रखना चाहते हैं या नहीं.

इस तरह का प्रस्ताव परित हुआ तो विपक्षी पार्टियों को सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए दो सप्ताह का वक़्त दिया जाएगा. साथ ही बोरिस जॉनसन को अपना इस्तीफ़ा सौंपना होगा. इसके बाद चुने गए नए प्रधानमंत्री बिना समझौते ब्रेग्ज़िट की स्थिति को टालने के लिए इसकी समय सीमा बढ़ाने की गुज़ारिश कर सकते हैं.

लेकिन इसकी दूसरी सूरत ये होगी कि यदि दो सप्ताह के भीतर सरकार नहीं बन पाई तो आम चुनाव करवाना ही पड़ेगा.

लेकिन इस रणनीति में कई जोखिम हैं. ऐसा केवल इस उम्मीद पर होगा कि विपक्षी पार्टियां सरकार बनाने की कोशिश में नाकाम हो जाएं.

कैथरीन हैडॉन कहती हैं कि ऐसा करने की संभावना न के बराबर हैं. वो कहती हैं, "राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो ख़ुद ही की सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव लाना ख़ुद को पागल साबित करने जैसा होगा."

कौन तय करेगा चुनाव की तारीख़?

फिक्स्ड टर्म पार्लियामेंट्स ऐक्ट के तहत प्रस्ताव पास कराने पर चुनाव की तारीख़ तय करने का फ़ैसला प्रधानमंत्री के हाथों में होता है.

जब साल 2017 में पूर्व प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे ने मध्यावधि चुनाव का प्रस्ताव पेश किया था तो जिस प्रस्ताव पर सासंदों ने मतदान किय था उसमें मात्र ये लिखा था कि "जल्द आम चुनाव करवाए जाने चाहिए." लेकिन इसकी कोई ख़ास तारीख़ नहीं दी गई थी.

लेकिन बोरिस जॉनसन का कहना है कि वो एक ख़ास तारीख 15 अक्टूबर को चुनाव करवाना चाहते हैं. कुछ सांसदों का मानना है कि सरकार चुनाव की तारीख़ बदल सकती है और 31 अक्टूबर के बाद भी चुनाव करवा सकती है और इस तारीख़ तक ब्रिटेन यूरोपीय संघ से बाहर जा चुका होगा.

लेकिन उस वक़्त यह मानते हुए कि पर्याप्त सांसद प्रारंभिक चुनाव का समर्थन करते हैं तो प्रधानमंत्री को महारानी को मतदान की तारीख़ के बारे में जानकारी देनी होगी.

एक बार तारीख़ तय हो गई तो चुनाव के दिन से 25 दिन पहले संसद को भंग किया जाता है.

इसके बाद ही नेता चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते हैं और चुनाव प्रचार कर सकते हैं.

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