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अश्लील कॉल रिकॉर्ड करके साझा करने वाली महिला को सज़ा
इंडोनेशिया में अपने बॉस की ओर से कथित यौन उत्पीड़न को साबित करने के लिए बॉस की अश्लील कॉल को रिकॉर्ड करने और उसे शेयर करने वाली महिला को मिली छह महीने की सज़ा को देश की शीर्ष अदालत ने बरक़रार रखा है.
अपनै फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बाइक़ नूरिल मकनून अश्लील सामग्री प्रसारित करने की दोषी हैं.
रिकॉर्डिंग के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उसके बॉस ने पुलिस में शिकायत की थी.
मानवाधिकार समूहों ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले की आलोचना की है.
नूरिल लोमबोक द्वीप पर माताराम शहर के एक स्कूल में शिक्षिका थीं. उन्होंने अपने हेड टीचर की ओर से अश्लील कॉल आने की शिकायत भी दर्ज कराई थी.
नूरिल ने एक कॉल रिकॉर्ड कर लिया था जिसमें कथित तौर पर हेड टीचर ने अश्लील बातें की थीं और गालियां दी थीं.
इस रिकार्डिंग को बाद में स्कूल के अध्यापकों में साझा किया गया था और स्थानीय एजुकेशन एजेंसी के प्रमुख के समक्ष पेश किया गया था.
ये ऑडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया था.
अदालत में पेश दस्तावेज़ों के मुताबिक इसके बाद हेड टीचर ने अपनी नौकरी गंवा दी थी.
हेड टीचर ने अपनी बातचीत का वीडियो सार्वजनिक करने को लेकर पुलिस से शिकायत भी की थी.
सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल नवंबर में महिला टीचर को इंडोनेशिया के इलेक्ट्रानिक इंफ़ोर्मेशन एंड ट्रांजेक्शन लॉ के तहत 'शालीनता का उल्लंघन' का दोषी माना था.
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले फ़ैसले को बरकरार रखा. अदालत ने कहा कि महिला कोई नया सबूत पेश नहीं कर सकी.
अदालत के प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा, "उसकी न्यायिक समीक्षा की अपील खारिज कर दी गई क्योंकि अपराध आसानी से क़ानून साबित हो चुका है."
पीड़िता पर लगाए गए पचास करोड़ रूपियाह (लगभग चौबीस लाख भारतीय रुपये) के जुर्माने को भी बरकरार रखा गया है.
नूरिल ने अदालत में तर्क दिया था कि उसने रिकार्डिंग को सार्वजनिक नहीं किया और एक मित्र ने ये उनके फ़ोन से ले ली थी.
उनके अधिवक्ता जोको जुमाडी ने बीबीसी ने कहा, "उनकी मुवक्किल अदालत के फ़ैसले को स्वीकार करती हैं लेकिन वो चाहती हैं कि वो यौन उत्पीड़न के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की वजह से आपराधिक मुक़दमा झेलने वाली आख़िरी पीड़ित हों."
अधिवक्ता के मुताबिक सुनवाई के दौरान वो शांत थीं.
सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अब कोई अपील नहीं की जा सकेगी. लेकिन नूरिल की टीम राष्ट्रपति जोको विडोडो से क्षमादान का आग्रह कर सकती है.
राष्ट्रपति कह चुके हैं कि यदि महिला के पास क़ानूनी विकल्प समाप्त हो जाएंगे तो वो उसके आग्रह पर ध्यान देंगे. लेकिन नूरिल के अधिवक्ता का कहना है कि वो नहीं चाहते की उनकी मुवक्किल को क्षमा याचना करनी पड़े क्योंकि उसने कोई अपराध किया ही नहीं है.
इस मामले के बाद इंडोनेशिया में गुस्सा भी भड़का है, मानवाधिकार समूहों का कहना है कि इस फ़ैसले से यौन पीड़िताओं में चिंताजनक संदेश जाएगा.
लीगल एड फाउंडेशन फॉर द प्रेस के निदेशक आदे वाहयुद्दीन ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "हम इस फ़ैसले के प्रभाव को लेकर चंतित हैं क्योंकि इससे यौन उत्पीड़न करने वाले अपराधियों के लिए पीड़िताओं को प्रताड़ित करने का रास्ता खुलता है."
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