हाफ़िज़ सईद का साला और जमात उद दावा नेता अब्दुल रहमान मक्की गिरफ़्तार

जमात उद दावा के पूर्व प्रवक्ता ने बीबीसी से पुष्टि की है कि हाफ़िज़ सईद का साला और संगठन के नेता अब्दुल रहमान मक्की को पंजाब के गुजरांवाला से देर रात गिरफ़्तार किया गया.

मक्की दान की अपील कर रहे थे और प्रतिबंधित संगठनों के ख़िलाफ़ सरकार की कार्रवाई का विरोध कर रहे थे, जिसके बाद उनकी गिरफ़्तारी हुई है.

अब्दुल रहमान मक्की को लाहौर की कैम्प जेल में भेज दिया गया है.

प्रवक्ता ने बताया है कि सरकार के जमात उद दावा पर प्रतिबंध के बाद पिछले चार महीनों में 100 से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया गया है. सरकार ने इस संगठन द्वारा चलाए जा रहे स्कूल, एम्बुलेंस सेवा और मस्जिदों को अपने नियंत्रण में ले लिया है.

अब्दुल रहमान मक्की जमात उद दावा में दूसरे नंबर के नेता हैं. यह गिरफ़्तारी दिखाती है कि पाकिस्तान के ऊपर दबाव है कि वह वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफ़एटीएफ़) की मांग को पूरा करते हुए दिखाई देना चाहता है.

इसमें यह भी कोई चौंकाने वाली बात नहीं है कि बुधवार से बीजिंग में एशिया-पैसिफ़िक जॉइंट ग्रुप (एपीजी) और एफ़एटीएफ़ के क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ होने वाली बैठक से पहले यह गिरफ़्तारी हुई है.

इसमें यह देखा जाएगा कि पाकिस्तान ने मनी लॉन्ड्रिंग और चरमपंथियों को आर्थिक रूप से मदद दिए जाने वाले स्रोतों के ख़िलाफ़ क्या कार्रवाई हुई है.

फ़रवरी में जमात उद दावा पर लगा था प्रतिबंध

भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा में सुरक्षाबलों पर हमले के बाद पाकिस्तान ने जमात उद दावा पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया था.

पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने बताया था कि नेशनल एक्शन प्लान के तहत जमात उद दावा से जुड़े संगठन फ़लाह ए इंसानियत पर भी प्रतिबंध लगाया था.

पुलवामा हमले के बाद तेज़ होती राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक की थी और राष्ट्रीय सुरक्षा की स्थिति जैसे मसलों पर चर्चा की थी.

पुलवामा में 14 फ़रवरी को श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग पर लेथपोरा के पास चरमपंथियों ने आईईडी धमाका कर सीआरपीएफ़ के काफ़िले को निशाना बनाया था.

इसमें सीआरपीएफ़ के 40 जवान मारे गए थे और कई घायल हुए थे. इस हमले के लिए प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को ज़िम्मेदार ठहराया गया था.

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