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मोदी-राहुल पाकिस्तान के यार तो फिर झगड़ा किस बात पर: वुसअत का ब्लॉग
- Author, वुसतुल्लाह ख़ान
- पदनाम, पाकिस्तान से, बीबीसी हिंदी के लिए
लीजिए जनाब पाकिस्तान में मोदी का एक और यार पैदा हो गया है और उनका नाम है बिलावल भुट्टो ज़रदारी.
उनके और उनके अब्बा और फूफी के ख़िलाफ़ आज कल भ्रष्टाचार और बेनामी अकाउंट्स के ज़रिए अरबों रुपये ग़बन करने के केस खोल दिए गए हैं.
इसके बाद बिलावल की तोपों का रुख़ इमरान ख़ान सरकार की तरफ़ मुड़ना तो बनता है.
चुनांचे बिलावल ने पहला गोला ये दाग़ा कि मंत्रिमंडल के कम से कम जो तीन सदस्य उग्रवादी गुटों के साथ टांका फिट किए बैठे हैं, उन्हें फ़ौरन मंत्रिमंडल से निकाला जाए.
दूसरा गोला ये दाग़ा कि उन्हें यक़ीन नहीं कि सरकार अतिवाद और जेहादी संगठनों पर ईमानदारी से हाथ डाल रही है.
बस फिर क्या था, इमरानी तोपें भी हरकत में आ गईं और अब कई मंत्री कोरस में गा रहे हैं कि बिलावल की ऐसी बातों के बाद इंडियन मीडिया एक टांग पर नाच रहा है.
हांय, ये क्या हो गया?
जब नवाज़ शरीफ़ प्रधानमंत्री थे तो जो लोग उन्हें मोदी का यार कह रहे थे उनमें बिलावल भी सबसे आगे-आगे थे.
अब यही गीतमाला ख़ुद बिलावल के गले में पड़ गई.
अभी एक हफ़्ते पहले ही तो मोदी के नए यार ने मोदी के पुराने यार से जेल में मुलाक़ात की है. मुझे यक़ीन है कि नवाज़ शरीफ़ ने इस बालक को सिर्फ़ ग़ौर से देखा होगा. मुंह से कुछ न कहा होगा.
कुछ यही कहानी सीमा पार की भी है. वैसे भी पाकिस्तान भारतीयों के किसी काम का हो न हो मगर चुनाव में अक्सर पाकिस्तान ही काम आता है.
यहां बिलावल मोदी के नए यार हैं तो वहां राहुल पाकिस्तान के यार कहे जा रहे हैं.
क्योंकि जिस तरह बिलावल ने अतिवादी संगठनों की कार्रवाई पर सवाल उठा दिया है, उसी तरह राहुल ने बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठा दिया है.
मगर राहुल अकेले थोड़ी हैं. जब से मोदी ने 23 मार्च के राष्ट्रीय दिवस पर इमरान ख़ान को बधाई दी है तब से कांग्रेस की नज़रों में मोदी भी ये 'लव लेटर' लिखने के बाद पाकिस्तान के यार हो चुके हैं.
पर एक बात समझ में नहीं आई कि अगर राष्ट्रीय दिवस पर पाकिस्तान को बधाई दे ही दी थी तो फिर मोदी सरकार ने दिल्ली में पाकिस्तानी हाई कमीशन के रिसेप्शन का बायकॉट क्यों कर दिया?
मोदी और राहुल पाकिस्तान के यार और नवाज़ शरीफ़ और बिलावल भारत के यार तो फिर झगड़ा किस बात पर है?
कैसी अच्छी बात है कि बुरे वक़्त में दोनों देशों के नेता ही एक दूसरे से यारी निभाते हैं. और मूर्ख दुनिया समझती है कि दोनों एक-दूसरे के दुश्मन हैं.
ख़ैर दुनिया का क्या है? वो तो वर्ल्ड रेसलिंग फ़ेडरेशन की कुश्तियों को भी असली समझती है.
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