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#ChristChurch: न्यूज़ीलैंड में बदलेगा बंदूक कानून
न्यूजीलैंड के शहर क्राइस्टचर्च की दो मस्जिदों में हुई गोलीबारी में 50 लोगों की मौत के बाद न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न ने बंदूकों से जुड़े कानून में बदलाव की घोषणा की है.
अर्डर्न ने कहा कि कानून में बदलाव के लिए सैद्धांतिक रूप से उन्हें कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है और वो जल्द ही इसकी पूरी जानकारी देंगी.
खुद को गोरा नस्लवादी कहने वाले 28 साल के ऑस्ट्रेलियाई नागरिक ब्रेन्टन टैरन्ट पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है.
पुलिस का कहना है कि हत्यारे ने सेना के इस्तेमाल वाले हथियार इस्तेमाल किया.
इसके साथ ही इन हथियारों को अधिक जानलेवा बनाने के लिए कुछ सुधार किए.
मौजूदा कानून के तहत इन हथियारों को रखना वैध है.
कैबिनेट की मंजूरी
सोमवार को एक प्रेस कानफ्रेंस में प्रधानमंत्री अर्डर्न ने कहा, "इस भयावह आतंकी घटना के 10 दिन के भीतर हम बंदूकों से जुड़े कानून में बदलाव की घोषणा करेंगे और मैं मानती हूं कि इससे हमारा समाज और सुरक्षित हो जाएगा."
अर्डर्न के साथ उप प्रधानमंत्री विंस्टन पीटर्स भी मौजूद थे, जो बंदूकों से जुड़े कानून में बदलाव का विरोध कर चुके हैं.
विंस्टन गठबंधन सरकार में एक घटक का प्रतिनिधित्व करते हैं.
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर वो पूरी तरह प्रधानमंत्री के साथ हैं
वह बताते हैं, "वास्तविकता ये है कि शुक्रवार को एक बजे के बाद, हमारी दुनिया पूरी तरह बदल गई है और इसलिए हमारे कानून भी बदल जाएंगे."
उन्होंने इस मामले की जांच की भी घोषणा कि ऐसी परिस्थिति में और क्या किया जा सकता था.
एक से अधिक बंदूकें इस्तेमाल की गईं
शनिवार को अर्डर्न ने कहा था कि संदिग्ध के पास नवंबर 2017 से ही बंदूक रखने का लाइसेंस था और उसके पास पांच बंदूकें थीं.
इससे पहले बंदूक विक्रेता गन सिटी ने कहा कि हथियारबंद व्यक्ति को चार हथियार ऑनलाइन बेचे गए थे, लेकिन उसने वह घातक हथियार नहीं बेचे, जिनका इस्तेमाल मस्जिद में हुआ.
कंपनी के सीईओ डेविड टिपल ने क्राइस्टचर्च में हुई प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान बताया कि कंपनी ने उसे केवल ए-कैटेगरी के हथियार ही बेचे थे.
न्यूजीलैंड में बंदूक रखने के कानून के तहत, ए कैटेगरी के हथियार सेमी-ऑटोमेटिक हो सकते हैं जिनमें एक बार में सात गोलियां भरी जा सकती हैं.
वीडियो फ़ुटेज में दिख रहा है कि संदिग्ध के पास बड़ी मैगज़ीन वाली बंदूक थी.
ये हथियार भी कानूनी रूप से देश में वैध है.
एक अनुमान के अनुसार देश में इस समय कुल 15 लाख हथियार हैं.
हमले के बाद सेमी ऑटोमेटिक हथियारों पर बैन की मांग बढ़ गई है.
इससे पहले भी कानून का शिंकजा कसने की कोशिश हुई थी लेकिन बंदूकों का समर्थक करने वाले वर्ग के तीखे विरोध के चलते ये प्रयास असफल हो गए.
इसके साथ ही न्यूजीलैंड में शिकार करने की संस्कृति भी बंदूकों पर लगाम लगाने की कोशिशों को असफल बनाने के लिए ज़िम्मेदार मानी जाती है.
बंदूक को लेकर न्यूज़ीलैंड का कानून
न्यूज़ीलैंड दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां बंदूक रखना आसान है.
यहां बंदूक रखने की न्यूनतम उम्र 16 साल और सेना जैसी सेमी-ऑटोमेटिक बंदूक रखने के लिए न्यूनतम उम्र 18 साल है. इस उम्र से ऊपर के लोग बंदूक रख सकते हैं.
इसके साथ ही बंदूक रखने के लिए लाइसेंस होना जरूरी है. व्यक्तिगत बंदूकधारियों के लिए पंजीकरण कराना ज़रूरी नहीं है.
हालांकि, न्यूजीलैंड की पुलिस ये जांच करती है कि बंदूक के लिए आवेदन करने वाला व्यक्ति नियमों पर खरा उतरता है या नहीं.
उदाहरण के लिए, लाइसेंस देने से पहले आपराधिक और मेडिकल रिकॉर्ड की छानबीन की जाती है.
एक बार लाइसेंस मिलने के बाद व्यक्ति चाहे जितनी चाहे उतनी बंदूकें खरीद सकता है.
सोशल मीडिया पर भी शिकंजा
पुलिस ने कहा है कि शूटिंग की लाईव वीडियो को आपत्तिजनक सामग्री मानते हुए इसके प्रसारित करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.
सोमवार को 18 साल के एक किशोर को पेश किया गया जिस पर इस वीडियो को फैलाने का आरोप था.
इस किशोर ने मस्जिद की फ़ोटो लगाते हुए लिखा था, 'लक्ष्य हासिल हुआ.'
अभियोजन पक्ष के अनुसार, उसे 14 साल की अधिकतम सज़ा मिल सकती है.
फ़ेसबुक ने कहा कि हमले के बाद 24 घंटे में इस फुटेज के 15 लाख कॉपियों को हटाया है.
अभी भी अस्पताल में 9 लोगों की हालत गंभीर हैं.
उधर हमलावर ब्रेन्टन ने सोमवार को अपने वकील को हटाते हुए कहा है कि वो खुद अपनी पैरवी करेगा.
सरकारी वकील रिचर्ड पीटर्स ने इसकी पुष्टि की है.
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