चेर्नोबिल में एक रोमांटिक वीकेंड

यह सड़क सीधी काले घने भोज वृक्षों से अटे बर्फ़ीले जंगल की ओर जाती है. माइनस पांच डिग्री का तापमान है. आसमान स्लेटी रंग सा धूसर हो रखा है और हम अनजान लोगों से भरी एक मिनी बस में सवार हैं.
आप सोच रहे होंगे कि यह बहुत रोमांटिक तो नहीं लग रहा, और मैंने आपको यह भी नहीं बताया कि हम जा कहां रहे हैं.
मेरी पत्नी, बी, ने अचानक ही नए साल के लिए ब्रेक लेने का सुझाव दिया था. उसने कहा कि बस हम दोनों, कोई बच्चे नहीं. इससे मुझे "बेहद आश्चर्य हुआ".
फिर एक दोस्त के 50वें जन्मदिन पर एक व्यक्ति से मेरी मुलाकात हुई. उन्होंने मुझे बताया कि किस तरह वो और उनकी गर्लफ्रेंड ने चेरनोबिल के सफ़र पर कितने मजे किये थे- जी हां, वही चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र जहां 26 अप्रैल 1986 को चार रिएक्टर में धमाके हुए और इसके निकली विकिरण पूरे यूरोप में फ़ैल गई. यह मानव इतिहास का सबसे बड़ा परमाणु हादसा बना.
अपने हाथों में शराब का एक बड़ा ग्लास लिए मेरे इस नए दोस्त ने कहा, "चिंता नहीं करें, अब यह सुरक्षित है."
खैर, उन्होंने कहा कि आपकी पत्नी इसे याद रखेंगी और यह उनके लिए यादगार रहेगा.

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बी को आश्चर्य हुआ
मैंने फ्लाइट बुक किया और चेरनोबिल का दौरा तय किया जहां से सोवियत संघ सरकार ने तीन लाख लोगों को बाहर निकाला था.
लेकिन जब मैंने अपनी कुछ महिला मित्रों को यह बताया तो उन्होंने मुझे दोबारा सोचने को कहा. कुछ ने इसे लेकर उत्तेजना में हंसते, मुस्कुराते कहा कि लगता है, इसे लेकर आप "गंभीर नहीं" हैं.
बी को भी बहुत आश्चर्य हुआ जब प्रस्थान गेट पर उन्हें यह पता चला कि हम कहां जा रहे हैं. उन्होंने भौं ऊपर उठाते हुए पूछा, "सच में? चेरनोबिल?"
प्लेन में बैठने के बाद उन्होंने माना कि ये दिलचस्प होगा, लेकिन कुछ उचित कारणों से वो थोड़ी चिंतित भी थीं.
मेरी तरह, उन्हें यह याद आया कि कैसे चेरनोबिल हादसे में हिरोशिमा और नागासाकी की बमबारी से 400 गुना अधिक निकले रेडियोधर्मी तत्व पूरे यूरोप से होते हुए ब्रिटेन पहुंचे थे.

लंदन से भी कम विकिरण
एक दिन बाद हम टूर बस में सवार थे. हमारी गाइड, अनास्तासिया, गाइगर-मूलर काउंटर (विकिरण की मात्रा को नापने वाला यंत्र) लेकर आईं ताकि रेडियोधर्मिता को मापा जा सके. इसने कीव के केंद्र में विकिरण 0.23 माइक्रोसिवर्ट प्रति घंटे दिखाया- यह लंदन से भी कम था.
उन्होंने हमें आश्वस्त किया कि यह "उस क्षेत्र में और भी कम होगा."
हालांकि इसके बावजूद हम सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे थे. क्लाशनिकोव राइफ़ल से लैस सैनिक मुख्य सड़क पर दो चौकियों पर आपके दस्तावेज़ों का निरीक्षण करते हैं और एक बार जब आप अंदर आते हैं तो यह अजीब और भयावह तरीके से आपको खाली दिखता है.
पहला पड़ाव एक किंडरगार्टन है जो उस रिएक्टर-4 से केवल कुछ मील की ही दूरी पर है जहां विस्फोट हुआ था. यहां हमसे पहले आया आगंतुक मलबे में तब्दील बिस्तरों पर गुड़ियों को कुशलता से रख कर गया था.
भावशून्य बी के साथ हम इस खाली पड़े इमारत में घुसे, लेकिन वो निश्चित रूप से मुग्ध लग रही हैं.

प्रिप्यात शहर
चेरनोबिल के मजदूरों के लिए बनाया गया प्रिप्यात शहर तो और भी शानदार है.
बस में अनास्तासिया ने चेरनोबिल के 1970 के दशक वाले रंगीन वीडियो दिखायेः ऊंची ऊंची इमारतें, साफ़ सुधरे रास्ते और हरे भरे खुले मैदान.
हंसते मुस्कुराते वहां के लोग साइकिल पर इधर उधर जा रहे हैं. वो कहती हैं, यह एक मॉडल टाउन था." विदेशी आगंतुकों को यहां यह देखने के लिए लाया जाता था कि पर्दे की दूसरी तरफ की ज़िंदगी कैसी है.
अब यह सोवियत संघ के पॉम्पेइ (इटली का एक उजड़ा शहर) के रूप में मौजूद है, सर्दियों में तो एक ही रूप रंग में दिखता है.
विशाल सेंटर स्क्वायर पर धीरे धीरे जंगल उग आया है. कंक्रीट और अलकतरे के बीच से होते हुए पेड़ उग आए हैं.

'परमाणु को सैनिक न बनाएं'
अनास्तासिया ने पुराने बड़े अपार्टमेंट पर लिखे शब्दों को दिखाया, जहां लिखा थाः "परमाणु को छोटे कार्यकर्ता ही रहने दें, न कि एक सैनिक बनाएं."
हमने वहां कुछ तस्वीरें लीं. लेकिन अनास्तासिया का गाइगर-मूलर काउंटर बता रहा था कि आज यहां मौजूद वास्तविक जोखिम से ज़्यादा इसकी तस्वीरें इसे बड़ा बना रही हैं.
रिएक्टर-4 के मलबे को आज 1211 करोड़ रुपये (1.7 बिलियन डॉलर) के नए ताबूत के रूप में संरक्षित किया गया है. इसे 100 साल तक विकिरण को समाहित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जबकि संयंत्र को ढहा दिया गया है.
यहां तक कि विशाल संयंत्र से 300 मीटर दूर संयंत्र को देखने वाले प्लेटफॉर्म पर विकिरण की मात्रा महज़ 0.94 माइक्रोसिवर्ट प्रति घंटे है.

लंबी दूरी की विमान यात्रा के दौरान भी आप इससे दो माइक्रोसिवर्ट अधिक रेडिएशन झेलते हैं.
इसके बाद हम तथाकथित परमाणु परिशोधन संयंत्र पर रुके, उस दुर्घटना के बाद सफ़ाई के दौरान जहां फायरमैन की मौत हुई थी.
यह कच्चे कंक्रीट की चीज़ है.

चेरनोबिल की यादें
अनास्तासिया हमें बताती हैं कि यहां उन नायकों की भयानक मौतें हुई थीं, उन्हें सोवियत अधिकारियों ने आपदा से निपटने में वास्तविक ख़तरों को लेकर गुमराह किया था.

अब शाम हो चुकी थी, हम अंतिम चेकपॉइंट से गुजर रहे थे. बी और मैंने चाय ख़रीदी और रिएक्टर-4 के खंडहर की तस्वीरों के साथ हम रेडियोएक्टिव फ़ोन स्टीकर और फ़्रीज मैग्नेट देख कर मुस्कुराते हैं.
मैंने तेज़ी से उनसे पूछा, "तो आपने क्या सोचा?"
हमारे चारों ओर बर्फ़ गिर रही है. बी अपनी गरम चाय धीरे धीरे पी रही हैं.
"तुम्हें पता है?" जाहिर है, इस पल का आनंद उठाते हुए वो कहती हैं. "मुझे लगता है कि यह दौरा हमें सिर्फ़ यह याद दिलाने के लिए है कि प्रकृति कितनी लचीली होती है."
वह एकटक मेरी ओर देखती है. लंबी खामोशी के बाद दोनों हंस पड़ते हैं.
मैंने झुक कर उन्हें चूमा.
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