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अमरीका : प्रवासी बच्ची की हिरासत में मौत के बाद ट्रंप की सख़्त नीति पर सवाल
अपने पिता के साथ अवैध रूप से अमरीका में दाख़िल हुई एक सात साल की बच्ची की बॉर्डर पेट्रोल पुलिस की हिरासत में मौत हो गई. इसके बाद से अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की सख़्त प्रवासन नीति पर नए सिरे बहस शुरू हो गई है और कई लोग इसे लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं.
बच्ची की मौत के कारणों की जानकारी के लिए जांच भी की जा रही है. शुरुआती रिपोर्टों में जानकारी दी गई थी कि बच्ची की मौत डिहाइर्डेशन की वजह से हुई है लेकिन अधिकारियों ने दावा किया है कि हिरासत में रखे जाने के दौरान उन्हें खाना और पानी मुहैया कराया गया था.
डिपार्टमेंट ऑफ़ होमलैंड सिक्यूरिटी (डीएचएस) ने शुक्रवार को जानकारी दी कि इस बच्ची की मौत आठ दिसंबर को हुई थी. अमरीकी मीडिया ने ग्वाटेमाला से आई इस बच्ची का नाम जेकलिन काल मैक्विन बताया है.
ये बच्ची न्यू मैक्सिको के रेगिस्तानी इलाक़े से अपने पिता और काफ़िले में शामिल अन्य लोगों के साथ अमरीका में दाख़िल हुई थी, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया था.
डीएचएस ने एक बयान जारी कर बताया है, "लड़की के पिता का कहना है कि लंबी दूरी और सूखे इलाक़े से दिनभर की ख़तरनाक़ यात्रा करने वाली इस बच्ची ने कई दिनों से कुछ खाया पिया नहीं था और वो उल्टियां कर रही थी. बच्ची सदमे में थी और उसे आपातकालीन इलाज दिया गया था. इसके बाद भी उसकी मौत हो गई."
बच्ची को पहले बॉर्डर पेट्रोल पुलिस ने आपात इलाज देने की कोशिश की थी. बाद में उसे हेलिकॉप्टर के ज़रिए टेक्सस प्रांत के एल-पेसो के एक अस्पताल ले जाया गया था जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया.
व्हाइट हाउस ने जताया शोक
डीएचएस के मुताबिक लड़की और उसके पिता को 163 लोगों के काफ़िले के साथ 6 दिसंबर को न्यू मैक्सिको के एन्टेलेप वेल्स के पास हिरासत में लिया गया था.
डीएचएस के मुताबिक, प्रवासियों के स्वास्थ्य की जांच के दौरान लड़की के पिता ने ख़ुद को और बेटी को स्वस्थ बताया था और भरे गए फ़ार्म पर भी यही कहा था.
डीएचएस का कहना है कि इस दौरान बच्ची और उसके पिता को पानी, खाना और आराम करने की जगह दी गई थी.
सुबह पांच बजे के करीब लड़की के पिता ने बॉर्डर पेट्रोल पुलिस को उसके बीमार होने के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वो उल्टियां कर रही है.
व्हाउट हाउस की डिप्टी प्रवक्ता होगान गिडली ने बच्ची की मौत को दुखद और अफसोसनाक परिस्थिति कहा है.
उन्होंने कहा, "ये एक ग़ैरज़रूरी मौत है और इसे रोका जा सकता था. हमें लोगों को ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से सीमा पार करने से हतोत्साहित करना चाहिए और उन्हें क़ानूनी तरीकों से सीमा पर पहुंचकर शरण मांगने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए."
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सख़्त नीति पर सवाल
सात बरस की जेकलिन की मौत के बाद राष्ट्रपति ट्रंप की सख़्त प्रवासन नीति पर सवाल उठ रहे हैं. मध्य अमरीका के देशों से अमरीकी सीमा की ओर आ रहे प्रवासियों को लेकर ट्रंप ने बहुत सख्त रुख अपनाया हुआ है.
इस साल ग्वाटेमाला से हज़ारों प्रवासी अमरीकी सीमा पर पहुंचे हैं. उनका कहना है कि वो ग़रीबी और हिंसा की वजह से अपना देश छोड़कर भाग रहे हैं.
ग्वाटेमाला के अलावा होंडुरास और एल-सल्वाडोर के लोग भी बड़ी तादाद में अमरीका पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं.
इनमें से कई ने अमरीकी सीमा तक पहुंचने के लिए चार हज़ार किलोमीटर से लंबा सफ़र काफ़िलों में तय किया है.
अमरीका पहुंचने के बाद भी इनके सामने गिरफ़्तारी, जेल भेजे जाने और वापस देश भेज दिए जाने का ख़तरा है. बावजूद इसके ये लोग अमरीका पहुंचने की कोशिशों में लगे हैं.
हाल के सप्ताहों में ही साढ़े सात हज़ार से अधिक प्रवासी मैक्सिको-अमरीका सीमा पर पहुंचे हैं. बीते सप्ताह ही अमरीका में घुसने की कोशिश कर रहे एक समूह पर बॉर्डर पेट्रोल पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया था. इस समूह में बच्चे भी शामिल थे.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का कहना है कि वो प्रवासियों को अमरीका में नहीं घुसने देंगे.
ट्रंप का कहना है कि अदालत से शरण लेने की मंज़ूरी मिलने के बाद ही लोगों को अमरीका आने दिया जाएगा. क़ानूनी तौर पर शरण लेना एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है.
आलोचक ट्रंप प्रशासन पर प्रवासियों के साथ सख्ती का आरोप लगा रहे हैं. वहीं मेक्सिको ने पूरे मामले की जांच की मांग की है.
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