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उर्दू प्रेस रिव्यू: कश्मीर पर यूएन की रिपोर्ट से पाकिस्तान ख़ुश
- Author, इकबाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में पूरे हफ़्ते पाकिस्तान में 25 जुलाई को होने वाले आम चुनाव, तालिबान पाकिस्तान के नेता मुल्ला फ़ज़लुल्लाह की मौत और कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार काउंसिल की रिपोर्ट से जुड़ी ख़बरें पहले पन्ने पर छाई रहीं.
सबसे पहले बात यूएन मानवाधिकार काउंसिल की ताज़ा रिपोर्ट की.
अख़बार द ट्रिब्यून एक्सप्रेस ने भारत प्रशासित कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार काउंसिल की ताज़ा रिपोर्ट का हवाला देते हुए लिखा है कि कश्मीरियों पर होने वाले कथित ज़ुल्म की जांच के लिए संयुक्त राष्ट्र ने एक अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग बनाने की अपील की है.
अख़बार के अनुसार 49 पन्नों पर आधारित इस रिपोर्ट में जुलाई 2016 से मार्च 2018 तक होने वाली घटनाओं का ज़िक्र किया गया है.
रिपोर्ट के अनुसार कश्मीरियों पर पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया जिसके कारण कई कश्मीरियों की आंखों की रोशनी चली गई और इस दौरान 145 बेगुनाह नागरिक मारे गए हैं.
पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट में दिए गए सुझावों का स्वागत किया है.
अख़बार के अनुसार पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि ये सभी सिफ़ारिशें वहीं हैं जिनका पाकिस्तान 2016 से अब तक मांग करता रहा है.
प्रवक्ता ने कहा कि भारत प्रशासित कश्मीर में हो रहे कथित भारतीय ज़ुल्म की तुलना पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में मानवाधिकार के कथित उल्लंघन के आरोपों से नहीं की जा सकती है.
लेकिन भारत ने इस रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों को ख़ारिज कर दिया है. अख़बार ने भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का हवाला देते हुए लिखा है कि भारत ने इस रिपोर्ट को गुमराह करने वाला और पक्षपातपूर्ण क़रार दिया है.
अब बात पाकिस्तान में होने वाले आम चुनाव की.
पूर्व क्रिकेटर और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ के मुखिया इमरान ख़ान कराची से और इस्लामाबाद दो जगह ने चुनाव लड़ेंगे.
अख़बार एक्सप्रेस के मुताबिक़ पीटीआई ने सिंध विधानसभा और सिंध की नेशनल एसेंबली की सभी सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है.
अख़बार का कहना है कि इमरान ख़ान ने कराची की नेशनल असेंबली सीट नंबर 243 और इस्लामाबाद की नेशनल एसेंबली सीट नंबर 53 से अपना पर्चा भरा है.
लेकिन दोनों ही सीटों पर इमरान ख़ान के एक विरोधी ने उनके नामांकन को चुनौती दी है. चुनाव अधिकारी ने इमरान ख़ान को नोटिस जारी कर 18 जून तक अपना जवाब दाख़िल करने का आदेश दिया है.
इमरान ख़ान की पार्टी के उम्मीदवारों की सूची जारी होते ही उन्हें सख़्त आलोचना का शिकार करना पड़ रहा है.
अख़बार जंग के संपादकीय पेज पर डॉक्टर लुब्ना ज़हीर ने इमरान ख़ान की जमकर आलोचना करते हुए एक कॉलम लिखा है, जिसका शीर्षक है, 'त्रासदी एक तहरीक की'.
डॉक्टर लुब्ना ज़हीर लिखती हैं कि इमरान ख़ान ने अपने तमाम दावों पर स्याही फेर दिया है. उनके अनुसार इमरान ख़ान ने जिन लोगों को टिकट दिए वो उसी आर्थिक और सामाजिक पृष्ठभूमि से आते हैं जिनकी इमरान ख़ान हमेशा से आलोचना करते आए हैं.
डॉक्टर ज़हीर के अनुसार इमरान ख़ान ने वो सब कुछ किया जिसके ख़िलाफ़ लड़ने का वो दावा करते आए हैं. लेखिका के अनुसार इमरान की कथनी और करनी का फ़र्क़ अब सबके सामने आ गया है.
अंत में बात तालिबान पाकिस्तान के प्रमुख मुल्ला फ़ज़लुल्लाह के मारे जाने की.
अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने ख़ुद पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा को फ़ोन कर मुल्ला फ़ज़लुल्लाह के मारे जाने की पुष्टि कर दी है.
इससे पहले अफ़ग़ानिस्तान में तैनात अमरीकी सेना ने दावा किया था कि 13 जून को अफ़ग़ानिस्तान के कंटर प्रांत में किए गए अमरीकी ड्रोन हमले में प्रतिबंधित संगठन तालिबान पाकिस्तान के एक वरिष्ठ नेता को निशाना बनाया गया था.
अमरीकियों ने मुल्ला फ़ज़लुल्लाह का नाम नहीं लिया था, लेकिन मीडिया में उनके मारे जाने की ख़बरें आने लगीं थी. अब अफ़ग़ानिस्तान सरकार ने फ़ज़लुल्लाह के मारे जाने की पुष्टि कर दी है.
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता के अनुसार फ़ज़लुल्लाह के मारे जाने से पाकिस्तान के पेशावर स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल में हुए हमले में मारे गए बच्चों के परिजनों ने राहत की सांस ली है.
अख़बार दुनिया के अनुसार मलाला यूसुफ़ज़ई पर हमले का मास्टरमाइंड अपने अंजाम तक पहुंचा और इस तरह पाकिस्तान को अपने सबसे बदतरीन दुश्मन से निजात मिल गई.
अख़बार लिखता है कि मुल्ला फ़ज़लुल्लाह 2009 से अफ़ग़ानिस्तान में छुपे हुए थे. 2013 में उन्हें तालिबान पाकिस्तान का प्रमुख बनाया गया था.
पाकिस्तान को जिन चरमपंथियों की तलाश दी मुल्ला फ़ज़लुल्लाह उनमें से एक थे और इसी साल अमरीका ने उनके सिर पर 50 लाख डॉलर की इनामी राशि रख दी थी.
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