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ट्रंप ने कहा, 'किम बहुत टैलेंटेड हैं, अपने देश से बहुत प्यार करते हैं'
सदी की सबसे बड़ी मुलाक़ात की अब तक की बड़ी बातें
- डोनल्ड ट्रंप और किम जोंग उन सैंटोसा द्वीप से निकले
- किम ने कहा, ''हमने अपना इतिहास पीछे छोड़ने का फ़ैसला लिया, दुनिया एक बड़ा बदलाव देखेगी.''
- ट्रंप ने कहा, ''हम एक विस्तृत दस्तावेज़ पर साइन करने वाले हैं''
- प्रतिनिधि मंडल की बैठक के बाद ट्रंप और किम पत्रकारों से बातचीत की
- होटल की लाइब्रेरी में दोनों नेताओं की मुलाक़ात
- व्हाइट हाउस ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच 38 मिनट तक बैठक चली
- किम और ट्रंप ने साथ में किया लंच, कुछ देर होटल के गार्डन में टहलते दिखे
- ट्रंप ने पत्रकारों से सिर्फ़ इतना कहा, ''हम कुछ साइन करने जा रहे हैं.''
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के बीच हुई ऐतिहासिक मुलाक़ात के बाद अब दोनों ही नेता सिंगापुर के सैंटोसा द्वीप से बाहर जाने की तैयारी में हैं.
ट्रंप ने कहा है कि वे कुछ देर में एक प्रेस वार्ता करेंगे जबकि किम जोंग उन कुछ ही घंटों से सिंगापुर से चले जाएंगे.
प्रतिनिधिमंडल की बैठक के बाद दोनों ही नेताओं ने एक संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित किया. इस प्रेस वार्ता में ट्रंप ने कहा ''आज जो कुछ भी हुआ हम उससे बहुत गर्व महसूस करते हैं, उत्तर कोरिया और कोरियाई प्रायद्वीप के साथ हमारे जो पुराने रिश्ते थे उनमें एक बड़ा बदलाव आएगा.''
ट्रंप ने कहा कि उनके और किम जोंग उन के बीच एक खास रिश्ता बन गया है. उन्होंने किम की तारीफ करते हुए कहा, ''वे बहुत ही टैलेंटेड व्यक्ति हैं और अपने देश से बहुत प्यार करते हैं.''
वहीं किम जोंग उन ने पत्रकारों से कहा कि दुनिया अब एक बड़ा बदलाव देखेगी. दोनों नेताओं ने समझौतों पर हस्ताक्षर किए और मुस्कुराते हुए हाथ मिलाया.
इसी दौरान दोनों नेता लंच के बाद बाहर निकलकर आए और कुछ देर होटल के गार्डन में टहलते रहे.
डोनल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि मुलाक़ात बेहद शानदार रही, जितना किसी ने भी सोचा होगा, उससे काफी हद तक बेहतर दिशा में हम लोग बढ़ रहे हैं.
इसके बाद ट्रंप ने कहा, ''हम अब साइन करने जा रहे हैं.''
हालांकि अभी इस बारे में स्पष्ट नहीं हो पाया है कि दोनों देशों के बीच क्या साइन होने वाला है.
इससे पहले डोनल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच आपसी मुलाकात हुई. मुलाक़ात समाप्त होने के बाद किम ने ट्रंप से अंग्रेजी में कहा, ''नाइस टू मीट यू , मिस्टर प्रेज़ीडेंट''.
सिंगापुर के सैंटोसा द्वीप में स्थित कैपेला होटल में हुई यह मुलाक़ात 38 मिनट तक चली. व्हाइट हाउस ने बैठक के समय की जानकारी दी है.
आपसी मुलाक़ात के बाद जब किम और ट्रंप बाहर निकले और सफ़ेद रंग के गलियारे से गुजरने लगे तो पत्रकारों ने चलते-चलते उनसे कुछ सवाल भी पूछे. एक पत्रकार ने किम जोंग उन से दो बार पूछा, ''चेयरमैन, क्या आप परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए तैयार हैं?''
एक अन्य पत्रकार ने भी किम से पूछा, ''मिस्टर किम, क्या आप अपने परमाणु हथियारों को नष्ट करेंगे?''
लेकिन उत्तर कोरियाई नेता ने इन सभी सवालों को नज़रअंदाज़ कर दिया. हालांकि तभी किम के साथ चल रहे अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि सभी चीज़ें बेहतरीन तरीके से चल रही हैं.
दोनों नेताओं की आपसी मुलाक़ात के बाद अमरीका और उत्तर कोरिया के वरिष्ठ सलाहकार और सहयोगियों के साथ भी दोनों नेताओं ने बैठक की.
अमरीका की तरफ से इस बैठक में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ विदेश मंत्री माइक पोम्पियो, व्हाइट हाउस के चीफ़ ऑफ स्टाफ जॉन कैली और सुरक्षा सलाहकार जॉन बॉल्टन शामिल हुए
वहीं दूसरी तरफ उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ उनके सबसे करीबी समझे जाने वाले किम योंग चोल के अलावा विदेश मंत्री री योंग हो और पूर्व विदेश मंत्री री सु योंग मौजूद रहे.
किम और ट्रंप के बीच हुई फ़ेस-टू-फ़ेस यानी आमने-सामने की मुलाक़ात होटल की लाइब्रेरी में हुई.
इससे पहले दोनों नेता एक दूसरे की तरफ़ बढ़ते हुए आए और उन्होंने गर्मजोशी से हाथ मिलाया. उनके पीछे उत्तर कोरिया और अमरीका के झंडे लगे हुए थे.
ट्रंप ने किम जोंग उन के कंधे पर हाथ रखा और फिर दोनों ने आपस में कुछ बात की. इसके बाद दोनों नेता थोड़ी देर के लिए मीडिया की तरफ़ मुख़ातिब हुए.
एक छोटी सी प्रेस कॉन्फ्रेंस में डोनल्ड ट्रंप और किम जोंग उन ने अपने विचार रखे.
इस दौरान डोनल्ड ट्रंप ने कहा, ''मैं बहुत ही अच्छा महसूस कर रहा हूं. हमारे बीच शानदार बातचीत होने वाली है और मुझे लगता है कि यह मुलाकात ज़बरदस्त रूप से कामयाब रहेगी. यह मेरे लिए बहुत ही सम्मानज़नक है और मुझे इसमें कोई शक़ नहीं कि हमारे बीच बेहतरीन संबंध स्थापित होंगे.''
वहीं किम जोंग उन ने कहा, ''यहां तक पहुंचना आसान नहीं था, हमारा इतिहास...और हमारे पूर्वाग्रह इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए रोड़े बने हुए थे. लेकिन हम उन सभी को पार कर आज यहां मौजूद हैं.''
किम जोंग-उन से मुलाक़ात के ठीक पहले अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक ट्वीट किया, जिसमें इस बैठक को लेकर ख़ुद ट्रंप की आशंकाओं की झलक मिल रही थी. ट्रंप ने लिखा कि स्टाफ़ के सदस्यों और प्रतिनिधियों के बीच सबकुछ बहुत अच्छा रहा लेकिन ये बहुत मायने नहीं रखता. बहुत जल्द ये पता चल जाएगा कि इस मुलाक़ात में कोई असल समझौता हो पाता है या नहीं.
किम को लेकर सिंगापुर में उत्साह
आशंकाएं अपनी जगह हैं लेकिन उम्मीदें भी कम नहीं हैं. दुनिया में बहुत लोग ये चाहते हैं कि 18 महीने पहले तक एक दूसरे को हमले की धमकी दे रहे देश, साथ मिलकर शांति स्थापित करने की ओर बढ़े. इसीलिए कल जब किम जोंग उन सिंगापुर घूम रहे थे तो वहां लोगों ने उन्हें देखकर ज़बरदस्त उत्साह दिखाया.
किम ने भी सिंगापुर वासियों को निराश नहीं किया और मुस्कुराकर, हाथ हिलाकर उनका अभिवादन किया.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप इस मुलाक़ात को शांति कायम करने का "एक और मौका" मान रहे हैं वहीं दुनिया से अलग-थलग रहने वाले उत्तर कोरिया के लिए यह दुनिया से जुड़ने का एक सुनहरा मौक़ा है.
इस मुलाक़ात में परमाणु कार्यक्रमों पर बात होनी तय है. अमरीका को उम्मीद है कि इससे उस प्रक्रिया को शुरू करने में मदद मिलेगी जिसके नतीजे में उत्तर कोरिया परमाणु हथियारों का अपना कार्यक्रम बंद कर देगा.
वहीं उत्तर कोरिया का कहना है कि वह परमाणु कार्यक्रम बंद करने को तो तैयार है लेकिन ये सब कैसे होगा, ये अभी तक स्पष्ट नहीं है. इसके साथ ही ये भी स्पष्ट नहीं है कि उत्तर कोरिया ऐसा करने के बदले में क्या मांग रखेगा.
संभावनाओं से भरी मुलाक़ात
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने दोनों नेताओं की मुलाक़ात को एक सार्थक पहल बताते हुए कहा कि दोनों ही नेता पिछले साल उपजे तनाव को दूर करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं. दोनों का ही मकसद शांति स्थापित करना होना चाहिए. जैसा कि मैं पिछले महीने ही दोनों नेताओं को ख़त लिखकर बोल चुका हूं कि यह रास्ता आपसी सहयोग, त्याग और एक उद्देश्य की मांग करता है. ज़ाहिर है इसमें कई तरह के उतार-चढ़ाव होंगे, असहमतियां होंगी और कठिन समझौते होंगे.
अमरीकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने दोनों नेताओं की इस मुलाक़ात को संभावनाओं से भरा हुआ बताया है.
पॉम्पियो ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप इस मुलाक़ात के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. हम चाहते हैं कि कह होने वाली मुलाक़ात का सार्थक परिणाम सामने आए जो दोनों देशों के हित में हो. यह बिल्कुल नई तरह की कोशिश है.
किम के संदर्भ में जानकारों का कहना है कि अब वो अपना ध्यान देश की अर्थव्यवस्था पर लगा रहे हैं और चाहते हैं कि उनके देश पर लगाए गए प्रतिबंध हटाए जाएं. उत्तर कोरिया में अंतरराष्ट्रीय निवेश हो और ये मुलाक़ात इस लिहाज़ से भी काफी अहम है. सबसे अहम सवाल यही कि क्या यह बातचीत उस तनाव को कम करने में कामयाब होगी जो उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षणों और परमाणु कार्यक्रम से पनपा था और जिसने एक समय समूची दुनिया को अपनी ज़द में ले लिया था.
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