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पाकिस्तान के पेशावर में बड़े सिख लीडर की हत्या
वो सिख थे, अपनी दुकान पर बैठे हुए थे... और अनजान हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी.
पाकिस्तान के पेशावर शहर के इंक़लाब पुलिस थाने के कोहाट रोड पर जिस शख़्स को गोली मारी गई, उनका नाम चरणजीत सिंह था.
पेशावर में सिख समुदाय के लोगों ने बताया कि शहर के स्कीम चौक के पास ये घटना मंगलवार को हुई.
चरणजीत सिंह की पहचान एक आम पेशावरी की नहीं थी. वे एक सामाजिक कार्यकर्ता थे और ख़ैबर पख़्तूनख्वाह में अल्पसंख्यकों के लिए काम करते थे.
पुलिस ने बताया कि हमलावर गोली मारकर मौका-ए-वारदात से फरार हो गए. घटनास्थल पर ही चरणजीत सिंह की मौत हो गई.
हालांकि उन्होंने केस दर्ज कर लिया है और जांच की कार्रवाई शुरू कर दी है.
पाकिस्तान में सिखों के ख़िलाफ़ हिंसा
अप्रैल, 2014 में ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह में सिखों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ गई थी. इस सिलसिले में पेशावर में सिखों के इलाके में स्थित जोगनशाह गुरुद्वारे में बीबीसी संवाददाता रिफ़तुल्लाह ओरक़ज़ई ने उस वक्त उनसे मुलाक़ात की थी.
तब चरणजीत सिंह ने उनसे कहा था, "पाकिस्तान हमारा देश है, हमारे पूर्वज यहाँ रहते आए हैं. ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह का कबायली इलाका हमारा अपना घर है. यहाँ हम पले बढ़े हैं. ये हमारी अपनी मिट्टी है. लेकिन हमें अफसोस है कि यहाँ हमारे साथ बहुत बुरा बर्ताव हो रहा है."
"हम पहले भी ये स्पष्ट कर चुके हैं कि हम किसी दूसरे देश से भागकर यहां नहीं आए हैं बल्कि हम इसी देश के निवासी हैं और हमारा जीना-मरना भी यहीं है."
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं
चरणजीत सिंह की मौत पर पाकिस्तान और भारत दोनों ही जगहों पर लोग सोशल मीडिया पर अपनी संवेदनाएं प्रकट कर रहे हैं.
शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल ने चरणजीत सिंह के परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की है.
तारेक फतह ने लिखा है, "चरणजीत सिंह पश्तून सिखों के नेता थे और उन्हें हमेशा याद किया जाएगा."
ट्विटर हैंडल maXes_MB से लिखा गया है, "चरणजीत सिंह की आत्मा को शांति मिले. तुम्हारे कातिल नरक की आग में सड़ें."
पेशावर में वरिष्ठ पत्रकार रहिमुल्ला युसुफ़ज़ई ने ट्वीट किया है, "हम ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह और फाटा के लोग हमेशा गर्व से कहते थे कि सिख तिराह घाटी जैसे बियाबान इलाकों में भी सुरक्षित हैं. चरणजीत के कत्ल ने साबित कर दिया है कि पख्तून दिखने वाले और पश्तो बोलने वाले सिख भी अपने पूर्वजों के मुल्क में अब सुरक्षित नहीं रहे."
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