You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
सऊदी अरब में महिलाओं पर 'विदेशी ताक़तों' से संबंध का आरोप
सऊदी अरब में कथित तौर पर तीन और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है. ये कार्रवाई ऐसे समय की जा रही हैं जब कुछ हफ्तों बाद ही महिलाओं के ड्राइविंग पर लगा बैन हटाया जाना है.
मानव अधिकार समूहों का कहना है कि कम से कम 11 ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया गया है जो लंबे वक्त से ड्राइविंग के अधिकार के लिए अभियान चलाते रहे हैं. गिरफ्तार लोगों में ज्यादातर महिलाएं हैं. ये गिरफ्तारियां पिछले सप्ताह से हो रही हैं.
सऊदी अरब के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें शक़ है कि इन लोगों का "संबंध विदेशी ताकतों" से है, और ये देश को "अस्थिर" करने की कोशिश में लगे थे.
अन्य कार्यकर्ताओं का कहना है कि वो इन कार्रवाईयों से "हैरान" हैं और उन्होंने पहले कभी ऐसा होते हुए नहीं देखा.
अमरीका ने इन गिरफ्तारियों पर चिंता ज़ाहिर की है और कहा है कि वो सऊदी में सुधारों की प्रगति पर "नज़र नज़र बनाए हुए हैं".
किंग सलमान बिन अब्दुलअज़िज़ अल सऊद और उनके बेटे क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को पिछले साल दुनियाभर में उस वक्त काफी सराहना मिली जब उन्होंने महिलाओं के गाड़ी चलाने पर लगे दशकों पुराने प्रतिबंध को खत्म करने का इरादा जताया.
इस फ़ैसले का सऊदी महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी स्वागत किया था. लेकिन उन्होंने सऊदी में अब भी जारी दूसरे "भेदभावपूर्ण" कानूनों के ख़िलाफ़ अभियान जारी रखने का संकल्प लिया था.
इन कानूनों में महिलाओं के लिए एक ख़ास तरह का ड्रेस कोड, अनजान मर्दों से दूर रहना और कहीं यात्रा करने, काम करने या अस्पताल जाने से पहले अपने भाई, पति या पिता की लिखित अनुमति लेना शामिल है.
मार्च में अमरीकी दौरे से पहले सीबीएस न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में क्राउन प्रिंस ने कहा था, "सऊदी की महिलाओं को अब तक पूरे अधिकार नहीं मिले हैं. इस्लाम में जो अधिकार उन्हें दिए गए हैं वो अब तक उन्हें मिले नहीं है. उन्हें ये अधिकार दिलाने के लिए हमने एक लंबा सफर तय किया है. थोड़ा और सफर अभी बाकी है."
लेकिन शुक्रवार को पता चला कि सऊदी सरकार ने सात जाने-माने महिला अधिकार कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया है.
किंग को सीधे रिपोर्ट करने वाले प्रेसिडेंसी ऑफ द स्टेट सिक्योरिटी ने एक दिन बाद बयान जारी कर कहा, "गिरफ्तार लोगों पर "विदेशी पार्टियों से संबंध" होने के आरोप हैं, जिनके साथ मिलकर ये देश की "स्थिरता और सुरक्षा" को नुकसान पहुंचाने के लिए काम कर रहे थे."
सरकार समर्थित अखबारों और सोशल मीडिया अकाउंट्स पर इन लोगों के लिए "राजद्रोही" शब्द का इस्तेमाल किया जाने लगा.
ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा कि हिरासत में लिए गए लोगों में महिला अधिकारों की वकालत करने वाले लुज़ैन अल-हाथलौल, अज़ीज़ा अल-यूसेफ, इमान अल-नफजन, मोहम्मद अल-रबाया और मानव अधिकारों की वकालत करने वाले इब्राहिम अल-मोडाइमेघ शामिल हैं.
एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक सात महिलाओं और दो पुरुषों के अलावा "एक अज्ञात कार्यकर्ता" को हिरासत में लिया गया है.
एसोसिएटेड प्रेस ने बताया है कि हिरासत में लिए गए लोगों को वकील भी नहीं करने दिया गया है. "उन्हें एक हफ्ते पहले अपने परिवारों को सिर्फ एक फोन कॉल करने की इजाज़त दी गई थी. एक महिला को तो कथित तौर पर किसी से संपर्क नहीं करने दिया गया है."
एपी का कहना है कि कार्यकर्ताओं ने उन्हें कहा है कि हिरासत में लिए गए सात लोगों ने हाल ही में सराकर से एक ऐसा एनजीओ खोलने की अपील की थी जहां घरेलू हिंसा के पीड़ित को सहायता और शरण दी जा सके.
ह्यूमन राइट वॉच की मध्य पूर्व निदेशक साराह ली विट्सन ने कहा, "क्राउन प्रिंस, जो पश्चिमी सहयोगियों और निवेशकों के सामने खुद को सुधारक के रूप में पेश करते हैं, उन्हें कार्यकर्ताओं को सऊदी महिला अधिकार आंदोलन में सहयोग के लिए शुक्रिया अदा करना चाहिए. लेकिन इसके बजाए वो उन कार्यकर्ताओं को सज़ा दे रहे हैं."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)