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वो आठ मई जब दुनिया ने ली थी राहत की सांस
आठ मई, 1945. उस दिन भी मंगलवार ही था.
लेकिन पूरी दुनिया ने उस दिन राहत की सांस ली थी क्योंकि उस दिन द्वितीय विश्वयुद्ध के समापन की घोषणा हुई थी.
इस घोषणा से क़रीब छह साल से चली आ रही तबाही का दौर ख़त्म हो गया था, जश्न के लिहाज से इस दिन को पूरे यूरोप में विक्ट्री इन यूरोप (वीई) डे के तौर पर मनाया गया था.
कैसे ख़त्म हुआ था दूसरा विश्वयुद्ध
दरअसल 30 अप्रैल, 1945 को हिटलर ने आत्महत्या कर ली थी, इसके बाद से ही अनुमान लगाया जा रहा था कि अब दूसरा विश्वयुद्ध लंबा नहीं चल पाएगा. मित्र देशों की सेना के सामने मंडराते हार के ख़तरे के चलते ही हिटलर ने आत्म हत्या की थी, उन्हें इस बात का डर भी सता रहा था कि गिरफ़्तार किए जाने की सूरत में उन्हें कैसी सज़ा मिलेगी?
हिटलर के बाद ग्रैंड एडमिरल डोनिट्ज़ ने एक सप्ताह के अंदर ही आत्म समर्पण की घोषणा कर दी, पहले उन्होंने सात मई को फ्रांस के राइम्स शहर में जनरल आइज़नहॉवर के मुख्यालय में जाकर समर्पण किया.
इसके बाद आठ मई को बर्लिन में ब्रिटेन, अमरीका, रूस और फ्रांस के सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी में उन्होंने बिना किसी शर्त के आत्म समर्पण करने की घोषणा की.
हालांकि जर्मनी के नेतृत्व में शामिल जापान ने युद्ध समाप्ति की घोषणा नहीं की थी लेकिन जर्मनी की ओर से आत्म समर्पण के बाद इसे ही द्वितीय विश्वयुद्ध का अंत मान लिया गया.
नौ मई को भी जश्न
हालांकि आठ मई को जब जर्मनी के राष्ट्र प्रमुख आत्म समर्पण की घोषणा कर रहे थे तब सोवियत संघ में नौ मई का दिन शुरू हो गया था, लिहाजा सोवियत संघ समर्थक देशों में द्वितीय विश्वयुद्ध के अंत होने का जश्न नौ मई को मनाया जाता है.
दूसरे विश्वयुद्ध में अगर केवल यूरोप की बात करें तो पहले विश्वयुद्ध की तुलना में जान माल का नुकसान कम हुआ था. लेकिन फिर भी पांच लाख से ज्यादा घर तबाह हो गए थे. लाखों लागों की जान गई थी और लाखों हमेशा के लिए अपंग हो गए थे.
इतना ही नहीं सालों तक आम लोगों को राशनिंग में जीवन जीना पड़ रहा था. बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के दौरान ब्रिटेन में लोगों के सामने नहाने के पानी तक का संकट था, कुछ अंडों पर गुजारा करना पड़ रहा था और तो और खाने के लिए केला तक नहीं मिल पा रहे थे.
इसलिए लंदन में लोग जश्न मनाने के लिए सड़कों पर उतर आए थे. बीबीसी हिस्ट्री की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने दोपहर के तीन बजे रेडियो ब्राडकास्ट में इसकी जानकारी दी थी.
लोगों के जश्न को देखते हुए किंग जॉर्ज VI और महारानी बकिंघम पैलेस की बालकनी में आठ बार दिखाए दिए थे. वहीं तब की राजकुमारी मारग्रेट और एलिज़ाबेथ (जो मौजूदा महारानी हैं) आम लोगों के साथ जश्न में शरीक भी हुई थीं.
जापान ने अगस्त में किया समर्पण
वहीं बाद में ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने हेल्थ मिनिस्ट्री की बॉलकनी से भी आम लोगों को संबोधित करते हुए कहा था, "ये आप लोगों की जीत है."
अमरीका में इसको लेकर हर जगह पर जश्न का माहौल दिखा था. हालांकि जापान 8 मई, 1945 तक आत्म समर्पण करने को तैयार नहीं हुआ था, जिसके चलते ही अमरीका ने 6 अगस्त, 1945 को हिरोशिमा में और 9 अगस्त को नागासाकी पर परमाणु बम का इस्तेमाल किया था.
वैसे दूसरे विश्वयुद्ध में कुल मिलाकर 5.5 करोड़ लोग मारे गए थे, 3.5 करोड़ लोग जख़्मी हुए जबकि तीस लाख लोग लापता हो गए थे. इस वजह से इसे आज भी दुनिया का सबसे भयावह युद्ध माना जाता है.
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