You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
ट्रंप के बयान से फ़्रांस में भड़का ग़ुस्सा
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की एक टिप्पणी के बाद फ्रांस के लोग ग़ुस्से में हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि यदि लोगों के पास बंदूकें होती तो साल 2015 में पेरिस पर हुए हमले रोके जा सकते थे.
राष्ट्रपति ट्रंप ने हमलावर की नकल करते हुए कहा कि हमलावरों ने मृतकों को एक-एक करके बुलाया और गोली मार दी.
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने हाथ से गोली चलाने का इशारा भी किया.
वास्तव में हमलावरों ने सेमी-ऑटोमैटिक बंदूकों से अंधाधुंध गोलियां चलाईं थीं और विस्फ़ोटकों से भरी बेल्टों से धमाके किए थे.
फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पीड़ितों को सम्मान के साथ याद किया जाना चाहिए.
विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की पेरिस में 13 नवंबर 2015 को हुए हमलों के बारे में की गई टिप्पणी पर फ्रांस अस्वीकृति ज़ाहिर करता है और मृतकों को सम्मान से याद किए जाने की मांग करता है."
फ्रांस में ग़ुस्सा
हमलों के वक़्त फ़्रांस के राष्ट्रपति रहे फ़्रांस्वा ओलांद ने ट्रंप के बयान को शर्मनाक कहा है. उन्होंने कहा कि ये टिप्पणी बताती है कि ट्रंप फ्रांस के लोगों और यहां के मूल्यों के बारे में क्या सोचते हैं.
फ़्रांस के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमेनुएल वाल्स ने एक ट्वीट में कहा, "अशोभनीय और अयोग्य. इससे ज़्यादा मैं क्या कहूं?"
डलास प्रांत में नेशनल राइफल एसोसिएशन (एनआरए) के एक कार्यक्रम में दिए गए इस भाषण में ट्रंप ने चाकू हिंसा को लेकर ब्रितानी राजधानी लंदन की आलोचना करते हुए लंदन के एक अस्पताल की तुलना युद्धक्षेत्र से की.
उन्होंने कहा, "पेरिस, फ़्रांस में दुनिया के सबसे कठोर बंदूक क़ानून लागू हैं. पेरिस में किसी के पास भी बंदूक नहीं है, किसी के भी और हम सब उन 130 से अधिक लोगों को याद करते हैं और उन लोगों को भी जो बड़ी तादाद में बुरी तरह से घायल हुए थे. बहुत बुरी तरह से. क्या आपने ग़ौर किया है कि कोई उनके बारे में बात नहीं करता है?"
"उन्हें बंदूकधारी हमलावरों के एक छोटे से दल ने बर्बरता से मार दिया था. हमलावरों ने पूरा समय लिया और एक-एक करके उन्हें मारा."
"लेकिन अगर किसी एक कर्मचारी या किसी एक व्यक्ति के पास बंदूक होती और यहां मौजूद कोई व्यक्ति वहां अपनी बंदूक के साथ होता, दूसरी ओर निशाना लगाए हुए, तो आतंकवादी भाग जाते या उन्हें गोली मार दी जाती."
13 नवंबर 2015 को क्या हुआ था?
फ़्रांस में हुए इस सबसे बड़े हमले में हमलावरों ने बाटाक्लां कंसर्ट हॉल में आए रॉक फैंस पर हमला किया था और 89 लोगों को मार दिया था.
हमलावर या तो मौके पर ही मारे गए थे या उन्हें सुरक्षाबलों ने गोली मार दी थी. एक संदिग्ध सालाह अब्देसलाम बच गए थे और अब फ्रांस की जेल में हैं.
क्या राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने प्रतिक्रिया दी है?
हाल ही में वाशिंगटन में अमरीकी राष्ट्रपति से दोस्ताना बातचीत करने वाले फ़्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. हालांकि फ़्रांसीसी विदेश मंत्रालय ने तुरंत ट्रंप के बयान को ख़ारिज कर दिया है.
विदेश मंत्रालय ने कहा, "बंदूकों को लेकर सभी देश अपने क़ानून स्वतंत्रता से बनाते हैं, जैसे कि वे दूसरे क्षेत्रों में करते हैं. फ्रांस में बंदूक हासिल करना और उसे साथ लेकर चलने को लेकर सख़्त नियम हैं और हमें इस पर गर्व है."
फ्रांस की मेयर एन हिडाल्गो ने कहा है कि 2015 के हमलों का राष्ट्रपति ट्रंप का विवरण "घृणित और अयोग्य है."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)