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साजिद जावेद: वो पाकिस्तानी जो बने हैं ब्रिटेन के गृह मंत्री
पाकिस्तानी मूल के ब्रितानी राजनेता साजिद जावेद ने ब्रिटेन के गृह मंत्री का पद संभालकर एक इतिहास रच दिया है.
ब्रिटेन के इतिहास में साजिद ये मुकाम हासिल करने वाले पाकिस्तानी मूल के पहले राजनेता बन गए हैं.
48 वर्षीय साजिद का जन्म साल 1969 में ब्रिटेन के रोशडेल नामक कस्बे में हुआ था.
ये वो कस्बा है जहां पर आधुनिक सहकारिता आंदोलन ने जन्म लिया था.
विभाजन की त्रासदी झेलने वाला परिवार
साजिद के पिता अब्दुल ग़नी साल 1960 में पाकिस्तान के एक छोटे से गांव से काम की तलाश में ब्रिटेन पहुंचे थे.
लेकिन साजिद का परिवार उन सैकड़ों परिवारों में शामिल है जिन्होंने भारत-पाकिस्तान विभाजन की त्रासदी को झेला था.
उनके माता-पिता का जन्म भारत में ही हुआ था और विभाजन के बाद उनका परिवार पाकिस्तान पहुंचा था.
लेकिन साल 1960 में उनके पिता ने 17 साल की उम्र में पाकिस्तान छोड़कर ब्रिटेन जाने का फ़ैसला किया था.
साजिद ने अंग्रेज़ी अख़बार 'द गार्डियन' से बात करते हुए बताया था कि जब उनके पिता ब्रिटेन पहुंचे थे तो उनकी जेब में मात्र एक पाउंड था.
लेकिन फिर बदलने लगी कहानी
साजिद ने साल 2012 में अंग्रेज़ी अख़बार 'इवनिंग स्टैंडर्ड' को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता ने ब्रिटेन आने के बाद किस तरह काम को लेकर संघर्ष किया.
साजिद कहते हैं, "रोशडेल में बसने के साथ ही वह कपड़े की मिल में काम करने लगे. लेकिन वे बहुत ही महत्वाकांक्षी थे और उन्होंने देखा कि बस ड्राइवरों की ज़्यादा कमाई होती है. उनके दोस्तों के बीच उन्हें मिस्टर नाइट एंड डे कहकर पुकारा जाता था क्योंकि वह पूरे टाइम काम में लगे रहते थे."
बस ड्राइवर के रूप में कुछ समय काम करने के बाद साजिद के पिता ने ब्रिस्टल में एक महिलाओं के अंत: वस्त्र बेचने वाली दुकान खोली. इसी दुकान के ऊपर दो कमरों के घर में साजिद का पूरा परिवार रहता था.
बचपन मेंबेहद शरारती थे साजिद
अब्दुल ग़नी के पांच बेटों में से एक साजिद जावेद का बचपन ब्रिस्टल में ही बीता. यहीं पर डाउनएंड स्कूल में उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई की.
साल 2014 में डेली मेल को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बाताया था कि उनका स्कूल बेहद सख़्त था लेकिन वह बेहद शरारती हुआ करते थे.
वह बताते हैं कि जब उनके पिता ने रॉयट एक्ट (दंगा कानून) पढ़ा तो उनकी ज़िंदगी बदलना शुरू हो गई.
उनके पिता ने साजिद से कहा, "मैंने ये सब कुछ झेला है और मुझे निराश मत करना."
साजिद कहते हैं कि उन्हें ये सुनकर बहुत दुख हुआ और इसके बाद उन्होंने पढ़ाई के क्षेत्र में सफलताएं हासिल करना शुरू कर दिया.
साल 2010 में पहली बार बने सांसद
अपने ऑफिस में ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मार्गरेट थेचर की तस्वीर लगाने वाले साजिद जावेद साल 2010 में पहली बार सांसद बने थे.
इससे पहले 25 साल की उम्र में वह चेज़ मैनहट्टन बैंक के उपाध्यक्ष के पद तक पहुंचे थे. और सांसद बनने से ठीक पहले डॉयच बैंक में प्रबंध निदेशक के पद तक पहुंचे थे.
एक मंत्री के रूप में उन्होंने अपना कार्यकाल वित्त मंत्रालय से शुरू किया.
बीबीसी की राजनीतिक मामलों की संपादक लॉरा क्वुन्सबर्ग के मुताबिक़, साजिद जावेद ने अपने कैबिनेट रोल्स में अब तक बड़े विवादों से किनारा किया है, हालांकि बिज़नेस सेक्रेटरी के रूप में टाटा स्टील संकट के दौरान और ग्रेनफेल हादसे के दौरान कम्यूनिटीज़ सेक्रेटरी रहते हुए विवादों का सामना किया था.
विंडरश विवाद सुलझाने की चुनौती
गृह मंत्री के रूप में साजिद के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये होगी कि उन्हें विंडरश विवाद का समाधान निकालना होगा. क्योंकि इसी विवाद के चलते पूर्व गृह मंत्री अंबर रड को अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा है.
अंबर रड ने ये कहते हुए अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है कि उन्होंने इमिग्रेशन के लक्ष्यों के बारे में सांसदों को अनजाने में भ्रमित किया.
इस इस्तीफ़े से पहले विंडरश परिवारों के साथ हुए बुरे बर्ताव को लेकर ख़बरें आती रही थीं. विंडरश वे लोग हैं जो जंग के बाद ब्रिटेन में क़ानूनी रूप से बसे, लेकिन उनके यहां रहने के अधिकार को लेकर सवाल खड़े किए गए और सरकार की इमिग्रेशन पॉलिसी पर भी सवाल खड़े हुए.
साजिद ने हाल ही में संडे टेलीग्राफ़ से कहा था कि विंडरश स्कैंडल से उन्हें व्यक्तिगत रूप से आघात पहुंचा है क्योंकि वो इमिग्रेंट परिवार से ताल्लुक रखते हैं, उनके माता-पिता इस देश में विंडरश पीढ़ी की तरह पाकिस्तान से आए थे. हालांकि विंडरश समुदाय दक्षिण एशिया की जगह कैरिबियाई हिस्से से आए थे. लेकिन इसके अलावा उनमें और साजिद का परिवार लगभग हर तरह से समान है.
आख़िर क्या है विंडरश विवाद
ब्रिटेन में साल 1973 में क़ानूनी रूप से ब्रिटेन आने वाले लोगों को अवैधानिक अप्रवासियों का दर्जा दिया जा रहा है. इसमें वे लोग होंगे जिन्होंने पहले ब्रितानी पासपोर्ट के लिए आवेदन नहीं किया था या फिर उनके पास ऐसे दस्तावेज़ नहीं हैं जो ये बताएं कि वो तब से लेकर अब तक ब्रिटेन में ही रह रहे हैं.
जातिगत अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले पहले गृह मंत्री जावेद ने इस मुद्दे पर संडे टेलीग्राफ़ से कहा है कि इस मामले ने उन्हें बेहद प्रभावित किया है क्योंकि उन्हें लगा कि इस मामले में संघर्ष करने वालों में उनके पिता, चाचा या वो ख़ुद शामिल हो सकते थे.
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