फ़ेसबुक लाइव के दौरान पत्रकार की गोली लगने से मौत

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निकारगुआ में स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार सरकार के ख़िलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन में एक पत्रकार की गोली लगने से मौत हो गई है.
स्थानीय पत्रकार और एल मेरीदिआनो प्रोग्राम के निर्देशक एंजेल गहोना देश के दक्षिणी कैरीबियाई तट स्थित ब्लूफील्ड्स शहर से लाइव रिपोर्टिंग कर रहे थे.
रिपोर्ट के अनुसार, गहोना सोशल मीडिया फ़ेसबुक पर लाइव ब्रॉडकास्ट करते समय मारे गए.
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जो स्थानीय मीडिया के अनुसार गहोना का बताया जा रहा है.

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वीडियो में रिपोर्टर (गहोना) लोगों के प्रदर्शन के दौरान मेयर कार्यालय को हुए नुकसान के बारे में बता रहे थे.
अचानक वहां एक गोली चलती है और वो नीचे गिर जाते हैं. हालांकि अभी ये साफ़ नहीं हो पाया है कि गोली किसने और क्यों चलाई.
सोशल मीडिया ट्वीटर के एक यूजर बताते हैं, ये एंजेल गहोना है. इनकी मौत फ़ेसबुक लाइव के दौरान हुई है. ब्लूफील्ड में पुलिस और प्रदर्शकारियों के बीच तनाव फैलने पर गोली चलती है और वे वहीं गिर जाते हैं.
वे आगे लिखते हैं कि एंजेल गोली लगने से पहले अपने लाइव में बताते है कि 'पुलिस आ रही है और हमें सहारे की ज़रूरत है.'
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बीते शनिवार दोपहर तक सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस प्रदर्शन में 10 लोगों मौत की बात कही जा रही है. लेकिन मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इसमें 25 से भी अधिक लोग मारे गए हैं.
बुधवार से निकारगुआ में सामाजिक सुरक्षा और पेंशन में सुधार के लिए सरकार के विरोध में प्रदर्शन किया जा रहा है.
दरअसलन मजदूरों और नौकरीपेशा लोगों की पेंशन में मिलने वाले लाभ में 5 प्रतिशत की कमी की गई है. इसके विरोध में प्रदर्शन हो रहा है.
राष्ट्रपति डेनियल ऑर्टेगा ने घोषणा की थी कि इसमें सुधार करने के लिए इस पर विचार किया जायेगा. लेकिन इसके बावजूद भी निकारगुआ में सरकार के खिलाफ़ प्रदर्शन जारी रहा.

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राष्ट्रपति ऑर्टेगा ने बात करने का प्रस्ताव रखा था लेकिन प्रदर्शनकारियों के नेता ने इसे मानने से मना कर दिया. उनका कहना है कि पहले पुलिस द्वारा की जा रही हिंसा को रोका जाए.
विरोध प्रदर्शन में सरकारी बिल्डिंग को भी आग लगा कर क्षति पहुंचाई गई गई है. कई शहरों में सेना को तैनात किया गया है.
मांगुआ की पॉलिटेक्निक यूनिवर्सिटी के छात्रों ने अपने कैंम्पस को चारों तरह से घेर लिया था. लगभग 100 लोगों के घायल होने की भी ख़बर है.
पोप फ्रांसिस ने पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुए मतभेद और हिंसा को शांति से खत्म करने के लिए कहा है.

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2007 में पदभार संभालने के बाद से ऑर्टेगा के विरोध में ये प्रदर्शन सबसे बड़ी चुनौती बन गई है.
उन्होंने कहा कि नये नियम एक जुलाई से शुरू होंगे. इसलिए सरकार और निजी क्षेत्र के बीच बातचीत करने का समय है.
विरोध प्रदर्शनकारियों ने हिंसा के लिए पुलिस और सरकारी समर्थकों को ज़िम्मेदार ठहराया.
देश के कई हिस्सों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प के कई मामले हुए.
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