क़तर को अलग-थलग करने के लिए सऊदी अरब खोदेगा नहर

इमेज स्रोत, FAYEZ NURELDINE/AFP/Getty Images
सऊदी अरब और क़तर की सरहद पर नहर की खुदाई का प्लान दोनों देशों के बीच चल रहे विवाद में एक नया मोड़ कहा जा सकता है.
साल 2017 के जून की शुरुआत में सऊदी अरब ने क़तर को खाड़ी देशों के साथ 'हुक्का-पानी बंद करने की कार्रवाई' शुरू की थी.
सऊदी अरब के इस क़दम में उसे बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और मिस्र का साथ मिला था.
क़तर पर सऊदी अरब के अंदरूनी मामलों में दखल देने, चरमपंथी संगठनों को मदद मुहैया कराने और ईरान के साथ नज़दीकियां बढ़ाने का आरोप लगाया गया.
लेकिन इस बहिष्कार के बावजूद क़तर ईरान और तुर्की के साथ नए कारोबारी रिश्तों बनाने में कामयाब रहा.

इमेज स्रोत, FAYEZ NURELDINE/AFP/Getty Images
सलवा नहर प्रोजेक्ट
सऊदी अरब और क़तर की सरहद पर सलवा नहर परियोजना की ख़बर खाड़ी देशों की मीडिया में छाई हुई है.
कहा जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट का मक़सद क़तर को भौगोलिक दृष्टि से अलग-थलग करने का है.
सऊदी अरब के अख़बार 'सबक़' का दावा है कि नहर परियोजना को सरकारी मंजूरी मिलने का इंतज़ार किया जा रहा है.
अख़बार के मुताबिक़ 750 मिलियन डॉलर की लागत से इस प्रोजेक्ट को साल भर के अंदर पूरा किया जा सकता है.
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार 60 किलोमीटर लंबा, 200 मीटर चौड़ा और 15 से 20 मीटर गहरा ये नहर क़तर को उसके दक्षिणी पड़ोसियों से अलग-थलग कर देगा.
सऊदी अरब के सलवा और खव्र अल-उदायद इलाकों के बीच खोदी जाने वाली ये नहर क़तर के साथ ज़मीनी रास्ते से होने वाले व्यापार को पूरी तरह बंद कर देगी.

इमेज स्रोत, AFP/Getty Images
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं
इस नहर परियोजना को लेकर खाड़ी देशों में ट्विटर पर गर्मागर्म बहस भी चल रही है.
क़तर के लोग इसे सऊदी अरब की तरफ़ से उकसावे की कार्रवाई की तरह देख रहे हैं और इससे खाड़ी संकट बढ़ने की आशंका जता रहे हैं.
क़तर का बहिष्कार कर रहे देशों में लोगों का कहना है कि सऊदी अरब की सल्तनत ने ये क़दम अपनी सरहदों की सुरक्षा के लिए उठाया है.
कुछ इसे क़तर को एक अलग-थलग द्वीप में बदलने की मुहिम के तौर पर भी देख रहे हैं.

इमेज स्रोत, KARIM JAAFAR/AFP/Getty Images
स्थायी अलगाव
फ़ोर्ब्स मैगज़ीन की रिपोर्ट के मुताबिक़ सऊदी अरब में कई लोग ये चाहते हैं कि रेगिस्तान में एक नहर की लकीर दोनों देशों के बीच एक स्थायी बाधा के तौर पर खड़ी हो जाए.
सबक़ अख़बार का कहना है कि इस परियोजना के लिए नौ स्थानीय फ़र्म्स की एक कंसोर्शियम इस प्रोजेक्ट से जु़ड़ी हुई है.
एक सवाल ज़रूर है कि नहर परियोजना से क्या हासिल होगा और इसकी वाकई में कितनी ज़रूरत है.
इस सरहदी इलाके की आबादी ज़्यादा नहीं है और सऊदी अरब के औद्योगिक इलाके भी यहां से काफी दूर हैं.
अगर ये मान भी लिया जाए कि क़तर की सीमाएं बंद कर दी जाएँगी तो किसी आर्थिक और पर्यटन गतिविधि के लिए नज़दीकी बाज़ार पूरी तरह ख़त्म हो जाएगा.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)


















