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नार्वेः क्यों बरसों तक यौन शोषण झेलते रहे ये बच्चे और महिलाएं?
नार्वे की पुलिस ने दो हज़ार लोगों के एक छोटे से समुदाय में 151 यौन उत्पीड़न के मामले दर्ज किए हैं. इनमें बच्चों से बलात्कार के मामले भी शामिल हैं.
हैरान करने वाली बात ये है कि ये अपराध दशकों तक हो रहे थे, लेकिन इनके बारे में जानकारी हाल ही में सामने आई है. सवाल ये है कि इतने लंबे समय तक ऐसे गंभीर अपराध छिपे कैसे रहे?
टिसफ्यूड में रहने वाली और इस समुदाय से ताल्लुक रखने वाली नीना इवरसन बचपन में यौन उत्पीड़न का शिकार बनीं.
वह कहती हैं, "मैंने अपने साथ हुए ग़लत व्यवहार के बारे में हमेशा आवाज़ उठाई. मैं जब 14 साल की थी तब मैंने सोचा था कि मैं इस बारे में एक किताब लिखूंगी. मैं ये सब रोकना चाहती थी, लेकिन मैं ऐसा कभी कर नहीं पाई."
अपनी किशोरावस्था के बारे में बात करते हुए वो बताती हैं कि उनके समुदाय के युवा लोग एक दूसरे के अनुभवों को सुनते थे और उस पर यकीन करते थे, लेकिन बड़े-बूढ़ों ने कभी उनकी बातों को नहीं माना.
वह याद करती हैं, "हमें वेश्या और झूठा कहा गया. हममें से कई ऐसे थे जिनके साथ इस तरह का व्यवहार हुआ था. जब हम इस बारे में आवाज़ उठाने की कोशिश करते थे तो हमारे साथ लड़ाई-झगड़ा किया जाता था."
इवरसन का यौन उत्पीड़न उनके एक रिश्तेदार ने ही किया था, इसलिए उनका पारिवारिक जीवन हमेशा डर के साये में बीता.
अब वो 49 साल की हो गई हैं और अब तक कहीं भी सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं.
टिसफ्यूड दो भागों में बंटा है- एक हिस्सा ड्रैग है जो कि पश्चिमी छोर पर है और दूसरा हिस्सा पूर्व में केजोप्सविक है.
यहां रहने वाली करीब आधी आबादी सामी समुदाय की है. पुलिस ने जिन यौन उत्पीड़न, भेदभाव और जातिवाद के 83 पीड़ितों और 92 दोषियों की पहचान की है उनमें से दो-तिहाई सामी समुदाय से ही हैं.
2005 में नीना इवरसन मां बनीं. वो अपने बच्चे को कभी यौन उत्पीड़न का शिकार नहीं होने देना चाहती थीं. वो चाइल्ड वेलफेयर सर्विस के संपर्क में भी थीं. उन्होंने डॉक्टर को अपने अनुभवों के बारे में बताया.
वो कहती हैं, "मैंने सबको बताया. लेकिन आपकी बात तभी कोई सुनता है जब आप किसी अच्छे बैकग्राउंड से हों. मेरे जैसे ग़रीब परिवार से आने वाले लोगों की बातों को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है."
मदद के लिए लिखा था पत्र
इवरसन अकेली नहीं थीं जो सरकार का ध्यान इस समस्या की ओर दिलाने की कोशिश कर रही थीं. 2007 में सामी समुदाय से जुड़े एक महिला-पुरुष, जिनके बच्चे का यौन शोषण हुआ था, उन्होंने प्राधनमंत्री से मदद की गुहार लगाते हुए एक चिट्ठी लिखी थी. उस चिट्ठी ने मीडिया में काफी सुर्खियां बटोरी थीं.
उस समय नार्वे के एक चर्च के पादरी एना कुलजोक और उनके वकील पति इंगर ऐसे 20 परिवारों के संपर्क में आए, जिनके बच्चों के साथ यौन शोषण हुआ था. इस जोड़े ने कई ऐसी सार्वजनिक बैठकों में इस मुद्दे को उठाया जहां स्थानीय नेता, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौजूद होते थे.
समाज का डर और कानून पर भरोसा
ऐना ने कहा, "उन्हें लगा कि हम झूठ बोल रहे हैं. उन्होंने सोचा कि ये सच नहीं हो सकता कि इतने सारे बच्चों के साथ ऐसा हुआ हो."
टिसफ्यूड के मेयर भी उन बैठकों को याद करते हैं, लेकिन उनका इन मामलों को लेकर कुछ और ही कहना है.
वह कहते हैं, "वो चीज़ों को समझ नहीं पाए क्योंकि जिन लोगों के साथ यौन उत्पीड़न हुआ वह ख़ुद सामने नहीं आए. हम उनके घरों में जाकर नहीं देख सकते. लोगों को मदद के लिए ख़ुद आना होगा."
समाज के डर से कई बार पीड़ित अपने साथ हुए ग़लत व्यवहार के बारे में खुलकर सामने नहीं आ पाते. लेकिन टाइसफ्योर्ड में इनके सामने नहीं आने का एक और कारण ये हैं कि सामी लोग पुलिस और प्रशासन पर कुछ मामलों में भरोसा नहीं करते हैं.
वहीं, नीना इवरसन जैसे कुछ लोगों ने जब अपनी कहानी सुनानी चाही तो कई लोगों ने अनसुना कर दिया.
कैसे आया बदलाव?
मीडिया में ये मामला उठने के बाद भी एक दशक यूं ही बीत गया. वो साल नीना इवरसन के लिए अकेलेपन से भरा और मुश्किल था. वह अवसाद में थी. उन्होंने फ़ेसबुक पर यौन शोषण को लेकर एक कविता भी लिखी, जिसमें उन्होंने गुस्से के साथ 'TYSFJORD' को बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा.
एक अन्य स्थानीय महिला जिनका अनुभव भी कुछ ऐसा ही था, उन्होंने नीना का पोस्ट देखकर उनसे संपर्क किया. उन्होंने नीना को बताया कि वो इस बारे में दो स्वतंत्र पत्रकारों से बात कर रही हैं. इसके बाद नीना ने ऐसी ही कुछ और पीड़िताओं से संपर्क किया.
11 जून 2016 को एक राष्ट्रीय अख़बार वर्डेंस गैंग में टाइसफ्योर्ड में यौन उत्पीड़न पर कहानी छपी. इस कहानी को 11 महिलाओं और पुरुषों से बात कर तैयार किया गया था.
इस ख़बर का तुरंत असर हुआ. घर पर वीकेंड मना रही नोर्डलैंड पुलिस की डिस्ट्रिक्ट चीफ़ ख़बर पढ़ते ही उठकर ऑफिस पहुंची.
"ये बहुत ही गंभीर मामला था. अब हमारा उद्देश्य था कि हम टिसफ्यूड में यौन शोषण की और घटनाएं ना होने दें. अगले सोमवार से ही हमने जांच दल का गठन कर दिया."
एक पुलिस अधिकारी को सामी लोगों से बात करने और उनका भरोसा जीतने का काम सौंपा गया.
उन्होंने कहा, "ये बहुत ही पेचीदा था. कई ऐसी चीज़ें थी जिसे पुलिस पहले से नहीं जानती थी- मसलन पारिवारिक संबंध, धर्म. लोग अपनी परेशानियों को लेकर ओझा के पास जाते थे. वो बात करने में शर्म महसूस करते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि हम समझ नहीं पाएंगे. लेकिन हमने उन्हें भरोसा दिलाया कि हम समझते हैं."
पुलिस ने लोगों का भरोसा जीतना शुरू किया. जिसकी बदौलत पहला मामला रोशनी में आया. ये मामला एक ऐसी महिला से जुड़ा था जिसका एक ओझा बाबा ने 'इलाज' करने की एवज़ में यौन शोषण किया. इस आदमी को साढ़े पांच साल की सज़ा हुई.
नार्वे में सामी
- नार्वे में करीब 60,000 सामी लोग रहते हैं.
- कई सामी लोग 1960 और 70 के दशक में अंदरूनी इलाकों से टिसफ्यूड में आ बसे.
- सरकार सामी परिवारों के बच्चों को नार्वे की भाषा बोलने के लिए प्रोत्साहित करती है, ताकि वो पूरी तरह से नार्वे के हो जाएं.
- नार्वे में स्थानीय नामों वाले लोग ही संपत्ति खरीद सकते हैं और सिर्फ वहीं लोग ज़मीन खरीद सकते हैं जिन्हें वहां की भाषा बोलनी आती है.
2016 में नीना इवरसन का शोषण करने वाले शख्स की मौत हो गई. इसलिए उन्हें कोर्ट से कभी न्याय नहीं मिल पाएगा.
लेकिन वो पुलिस का सहयोग करके ख़ुश हैं. इस बीच राष्ट्रीय अख़बार में स्टोरी छपने के बाद 40 पीड़ितों ने स्थानीय डॉक्टर की मदद ली. इसमें सबसे कम उम्र की पीड़ित 10 साल और सबसे ज़्यादा उम्र की 80 साल की थीं.
एक स्थानीय डॉक्टर ने बताया, "हमें उन्हें काफ़ी मेडिकल और मानसिक सहयोग देना पड़ा. युवा लोग इससे बाहर आ जाएंगे और एक मज़बूत और सम्मान भरा जीवन जी लेंगे. लेकिन जो लोग 50 या 60 साल के हैं और बेरोज़गार और दिमाग़ी रूप से बेहद परेशान हैं, उनकी परेशानी शायद ख़त्म नहीं होगी."
उन्होंने कहा, "हमें खुद का आलोचक होना चाहिए, और हम हैं भी. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि हम हर चीज़ के लिए खुद को ही दोष देने लगें. जो कुछ भी टिसफ्यूड में हुआ उसकी तुलना हम #MeToo मूवमेंट से नहीं कर सकते. क्यों दुनिया की सबसे शक्तिशाली महिलाएं चुप रहीं? क्या हमें उन्हें इसके लिए ग़लत ठहराना चाहिए? बेशक नहीं. उनके नहीं बोलने के पीछे कई कारण रहे होंगे - उन्हें कुछ डर होंगे."
"कुछ ऐसा ही यहां भी हुआ. जब लोगों को लगा कि उन्हें सुना जा रहा है, तो उन्होंने बोलना शुरू कर दिया, और फिर छह दशकों से उत्पीड़न की जो कहानियां दबी पड़ी थीं वो एकसाथ निकलकर सामने आने लगीं."
"1,000 से ज़्यादा पीड़ित, चश्मदीद और आरोपियों से पुलिस ने पूछताछ की. लेकिन टिसफ्यूड में दर्ज किए गए 151 मामलों में से कुछ ही कोर्ट पहुंच पाएंगे, क्योंकि कईयों की समय-सीमा निकल चुकी है. इसका मतलब ये कि कई कथित यौन शोषक अब भी इस छोटे से समुदाय में खुले घूम रहे हैं."
कुछ समय पहले, नीना इवरसन टिसफ्यूड गईं. दोपहर के समय जब वो एक स्थानीय स्कूल के नज़दीक पहुंचीं तो उन्होंने देखा कि कुछ आरोपी प्राथमिक स्कूल के गेट के पास घूम रहे थे.
उन्होंने बताया, "वहां कुछ बच्चे थे जो घर की ओर लौट रहे थे और ये लोग वहां घूम रहे थे. ये बहुत ही परेशान करने वाला था."
दुख और गुस्सा
एक पुलिस अधिकारी ऐसे पुरुषों और कुछ महिलाओं पर नज़र रख रहे हैं.
उन्होंने बताया, "उन लोगों को हमने चेतावनी दी है कि वो पीड़ितों से संपर्क करने की कोशिश ना करें. अगर वो ऐसा करते हैं तो हम उन पर कार्रवाई करेंगे."
ऐसा लगता है कि टिसफ्यूड में हर शख़्स किसी ना किसी ऐसे इंसान को जानता है जो या तो पीड़ित रहा है या अपराधी. कई अपराधी ऐसे हैं जो ख़ुद पीड़ित रहे हैं.
पादरी एना कुलजोक एक छोटे से चर्च में बैठकों का आयोजन करती हैं, जिनमें सामी समुदाय के कई लोग आते हैं.
वह बताती हैं, "हम यहां अपनी भावनाओं और उन्हें संभालने के बारे में बात करते हैं. लोगों के दिल में बहुत दुख और गुस्सा है."
लेकिन यौन उत्पीड़न करने वालों को अलग-थलग कर देना कोई विकल्प नहीं. सामी की संस्कृति सभी लोगों को साथ लेकर चलने वाली है और यहां मान्यता है कि ज़िन्दगी एक चक्र है जिसमें भगवान, लोगों, जानवरों और प्रकृति सबको अपनाया जाता है.
वह कहती हैं, "हमें साथ रहने का रास्ता खोजना होगा, क्योंकि यहां हर एक शख़्स ज़िन्दगी के उस चक्र का हिस्सा है."
2017 के नवंबर में जब ये पुलिस रिपोर्ट छपी, तो पुलिस चीफ टोन वेगेन ने टिसफ्यूड के लोगों से माफ़ी मांगी.
उन्होंने कहा, "2016 के जून तक पुलिस जिस तरह काम कर रही थी वह काफ़ी नहीं था. कई लोग लंबे समय तक अपराध का शिकार होते रहे."
समय के साथ टिसफ्यूड में विश्वास का एक माहौल बन रहा है. बच्चों की सुरक्षा के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है. सरकार लोगों में भरोसा जगाने के लिए कई प्रोजेक्ट चला रही है. नार्वे और सामी लोग मिलकर समुदायिक आयोजनों का हिस्सा बनने लगे हैं. इस महीने की शुरुआत में हुए एक सामी म्यूज़िक और सांस्कृतिक कार्यक्रम में 700 लोगों ने शिरकत की.
मेयर एक और बदलाव महसूस कर रहे हैं. वह कहते हैं, "अब लोग एक दूसरे से अच्छे से रहते हैं - वो एक दूसरे का पहले से ज़्यादा ध्यान रखते हैं."
मामले सामने आने के बाद समुदाय में बहुत कुछ हुआ. कई लोगों ने घर छोड़ दिए, कई ज़िन्दगियां टूटीं, कम से कम दो लोगों ने आत्महत्या कर ली. नीना इवरसन का अनुभव इतिहास में कहीं दब कर रह गया है, लेकिन जिस तरह 11 पीड़ितों ने अपनी कहानियां लोगों के सामने रखीं, उससे नीना को लगता है कि आख़िरकार ज़िन्दगी सही दिशा में चलने लगी है.
वह कहती हैं, "आज मैं कह सकती हूं कि हमने जो कुछ भी किया उसपर मुझे गर्व है. अब वो हमारे दर्द को सुन रहे हैं. वह हम पर भरोसा कर रहे हैं."