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ताइवान पर अमरीका के 'ट्रंप कार्ड' से चीन नाराज़
अगर राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ताइवान पर नए ट्रैवल क़ानून को मंजूरी देते हैं तो इससे अमरीका और चीन के रिश्तों को गंभीर नुक़सान पहुंचेगा.
शुक्रवार को चीन के विदेश मंत्री लु कांग ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में ये बात कही थी.
इस चेतावनी के बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप ने आख़िरी लम्हों में नए ट्रैवल क़ानून पर दस्तख़त कर दिए हैं.
माना जा रहा है कि इस कदम से अमरीका और चीन के बीच कूटनीतिक संकट की स्थिति पैदा हो सकती है.
क़ानून पर हस्ताक्षर के बाद अमरीका में चीनी दूतावास ने एक लंबा बयान जारी किया.
इसमें उनका कहना है कि इस क़ानून की धाराएं 'वन चाइना' के सिद्धांत का 'गंभीर रूप' से उल्लंघन करती हैं.
क्या है ट्रैवल क़ानून?
व्हॉइट हाउस के अनुसार, ट्रंप द्वारा जिस क़ानून को अनुमति दी गई है, उसके तहत अमरीकी अधिकारी ताइवान की यात्रा करेंगे और आपसी रिश्तों के लिए क्षेत्र के अधिकारियों से मिलेंगे.
अमरीकी सीनेट और हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स ने इस क़ानून को एक मार्च को अनुमति दी थी.
शुक्रवार तक ट्रंप के पास इसे पास करने या ख़ारिज करने का वक़्त था लेकिन उन्होंने इसे पास कर दिया.
अमरीकी प्रतिनिधि अब तक ताइवान जाते रहे हैं और वहां के अधिकारियों से मिलते रहे हैं और उनके अधिकारी व्हॉइट हाउस आते रहे हैं लेकिन आमतौर पर यह मुलाक़ातें निम्न दर्जे की हुआ करती थीं. ऐसा पहली बार हुआ है कि चीन को इस पर आपत्ति हुई है.
कहां है समस्या?
1950 में अलग होने के बाद चीन और ताइवान ख़ुद को वैध सरकार का वारिस समझते हैं. चीन ताइवान को एक अलगाववादी प्रांत मानता है.
हालांकि, अमरीका ने 1979 में ताइवान के साथ औपचारिक राजनयिक रिश्तों को तोड़ दिया था और उसके बाद से वह चीन के 'वन चाइना' का समर्थन करता रहा है.
वहीं, अमरीका ने हमेशा ताइवान के साथ व्यापारिक रिश्ते बहाल रखे और उसे हथियार बेचता रहा.
अमरीका और ताइवान के बीच राजनयिक रिश्ते समाप्त होने के बाद कभी भी किसी अमरीकी राष्ट्रपति ने ताइवान के नेता से संपर्क नहीं किया था.
दिसंबर 2016 में ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद उन्होंने ताइवानी राष्ट्रपति साइ इंग-वन से फोन पर बात की थी.
इंग-वन चीन से ताइवान की स्वतंत्रता की बात करती रही हैं और यही बात शी जिनपिंग सरकार को उकसाती रही है.
अब अमरीका की ऐसी तेज़ी के बाद चीनी विदेश मंत्री ने अमरीका के आगे औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है.
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