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कहां होगी अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की मुलाक़ात?
- Author, एलिस्टर कोलमेन
- पदनाम, उत्तर कोरिया विशेषज्ञ
- मुलाक़ात की संभावनाएं
- वॉशिंगटन- राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की सुरक्षा, पर किम शायद ही राज़ी हों
- प्योंगयांग- किम जोंग उन की सुरक्षा, पर ट्रंप शायद ही राज़ी हों
- पनमुनजोम- उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा, दक्षिण कोरिया का दखल बढ़ने की आशंका
- चीन- बातचीत में चीन का दखल, ट्रंप को शायद ही पसंद आए
- फिर कहां- ?
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप कुछ शर्तों के साथ ही, लेकिन उत्तर कोरियाई शासक किम जोंग उन के साथ सीधी मुलाक़ात के लिए तैयार हो गए हैं.
ट्रंप ने और किम जोंग उन के बीच बहुचर्चित संभावित मुलाक़ात के बारे में अब यह शर्त लगा दी है कि पहले उत्तर कोरिया कुछ ठोस कदम उठाए, उसके बाद ही यह मुलाकात संभव हो सकेगी.
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता सैरा सैंडर्स ने कहा, "यह बैठक तब तक नहीं हो सकती जब तक कि उत्तर कोरिया कुछ ऐसे ठोस कदम न उठा ले जिसके बारे में उसने पहले से वादा किया हुआ है."
हालांकि सैंडर्स ने यह साफ़तौर पर नहीं बताया कि उत्तर कोरिया को किन वादों को पूरा करना है या इस बैठक के लिए उत्तर कोरिया को क्या कदम उठाने होंगे.
सैंडर्स ने कहा कि ट्रंप के साथ बैठक तभी होगी जब उत्तर कोरिया की कथनी और करनी में अंतर नहीं होगा.
सवाल ये है कि अगर ये दोनों नेता सीधी बातचीत करते हैं तो फिर उनकी मुलाक़ात की जगह कहां होगी?
किम जोंग उन सत्ता संभालने के बाद से आज तक उत्तर कोरिया के बाहर नहीं गए हैं. ऐसे में इस बात की संभावना है कि ये मुलाक़ात उत्तर कोरिया या सीमा पर हो सकती है.
इसके अलावा ये मुलाकात किसी तटस्थ देश या अमरीका में भी हो सकती है.
क्या उत्तर कोरिया में होगी मुलाकात?
अगर इस शिखरवार्ता को लेकर सहमति जारी रहती है तो दोनों देश उन स्थानों का नामांकन करेंगे जो उनके हितों और प्रौपेगेंडा के हिसाब से उचित होगा.
ऐसे में उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा सबसे ज़्यादा तटस्थ जगह रह जाती है. लेकिन झोपड़ीनुमा नीली इमारतोंसे सजी ये जगह शायद दोनों नेताओं को इस मौके के हिसाब से ठीक नहीं लगेगी, क्योंकि ये साल 2018 की सबसे बड़ी राजनीतिक घटना हो सकती है.
ऐसे में डोनल्ड ट्रंप प्योंगयोंग आने का निमंत्रण स्वीकार कर सकते हैं.
हालांकि, ट्रंप अमरीकी राष्ट्रपति के पद पर रहते हुए उत्तर कोरिया की यात्रा करके इतिहास रचना चाहेंगे, लेकिन ये आसान नहीं होगा.
साल 2017 के जून महीने में उत्तर कोरियाई जेल से रिहा होने के बाद अमरीकी छात्र ओट्टो बार्म्बियार की मौत हो गई थी.
इसके बाद अमरीकी विदेश मंत्रालय ने चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि अगर बेहद जरूरी हो तभी उत्तर कोरिया की यात्रा की जाए और जाने से पहले अपनी वसीयत बनवाई जाए.
अमरीकी पक्ष को मजबूती से रखने के लिए अमरीकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस ओट्टो के पिता फ्रेड वार्मिंबर को अपने साथ दक्षिण कोरिया में हुए ओलंपिक खेलों के उद्घाटन समारोह में अपने साथ ले गए. इसे उत्तर कोरिया की ओर से आए दल के ख़िलाफ़ एक संकेत की तरह देखा गया.
इस तरह सियासी ताकत के प्रदर्शन के बाद ट्रंप का प्योंगयोंग जाना एक राजनयिक भूल के रूप में देखा जा सकता है.
क्या ये 'निक्सन टू चाइना' है?
ट्रंप के प्योंगयांग जाने को पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की साल 1972 में चीन यात्रा के रूप में देखा जा सकता है.
इस यात्रा में अमरीका के तेज-तर्रार राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने चीन में एक हफ़्ता बिताते हुए माओ से मिलकर दोनों देशों के बीच एक नया रिश्ता शुरू किया था.
इसके बाद 'निक्सन टू चाइना' मुहावरा गढ़ा गया जिसका आशय किसी राष्ट्रपति द्वारा अपने स्वभाव के विपरीत काम करना था.
ऐसे में अपने मनमौजी स्वभाव के लिए चर्चित अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप प्योंगयोंग जाने का फैसला करके इसे अपना निक्सन मूमेंट कह सकते हैं.
प्योंगयांग के लिए ऐसी यात्रा मुफीद साबित होगी. क्योंकि जनवरी की शुरुआत से ही उत्तर कोरिया ने कोरियाई प्रायद्वीप में रिश्ते सुधरने को लेकर माहौल बनाया हुआ है.
उत्तर कोरिया ने शीत ओलंपिक से संबंधित कूटनीति पर भी अपना नियंत्रण रखा हुआ है जिसमें सारी निगाहें किम जोंग उन की बहन किम यो-जोंग और उत्तर कोरियाई चीयरिंग स्कवैड पर टिकी हैं.
विंटर ओलंपिक खेलों की पूर्व संध्या पर प्योंगयांग में सैन्य परेड के दौरान छह ह्वासोंग 15 मिसाइलों का प्रदर्शन भी क्षेत्रीय राजनीति का मुद्दा बना रहा.
ट्रंप के उत्तर कोरिया जाने का फैसला करने पर इस शिखर वार्ता का नियंत्रण प्योंगयांग के हाथों में चला जाएगा. इससे उसे अपने देश में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों और ढांचागत कमियों को छुपाकर खुद को शानदार अंदाज़ में दिखाने का मौका मिल जाएगा.
क्या कोई थर्ड पार्टी ऑप्शन है?
साल 1983 में अमरीकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने आईलैंड में सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाच्योब से मुलाकात की. इसे रेकजाविक शिखर सम्मेलन कहा गया जिसने परमाणु हथियार संधि का रास्ता खुला.
इस मामले में कोई तटस्थ क्षेत्र किम-ट्रंप की मुलाकात की जगह बन सकता है, लेकिन उत्तर कोरिया इससे इनकार कर सकता है.
किम जोंग उन ने यूरोप में पढ़ने के बावजूद सत्ता संभालने के बाद से अब तक एक भी विदेश यात्रा नहीं की है.
साल 2015 में किम ने चीनी सरकार की ओर से आए एक निमंत्रण पद को अस्वीकार कर दिया था.
इसकी जगह कोए रयोंग हे को द्वितीय विश्व युद्ध में जापान पर चीन की जीत को लेकर आयोजित होने वाली विक्टरी डे परेड के मौके पर भेजा था.
इसी साल किम जोंग उन ने मास्को की विक्टरी डे परेड में शामिल होने का निमंत्रण स्वीकार किया. लेकिन किम जोंग उन इस आयोजन में शामिल नहीं हुए.
कहा जा रहा है कि अब किम जोंग उन के पास इतनी सियासी ताकत है कि वह उत्तर कोरिया छोड़कर जा सकते हैं. ऐसे में किम जोंग उन के सामने अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विकल्प खुल सकते हैं.
अमरीका या फ्लोरिडा?
इस बात की संभावना बेहद कम है कि किम जोंग उन इस शिखर वार्ता के लिए अमरीका की यात्रा करेंगे.
ऐसी यात्रा पर प्योंगयांग के नियंत्रण की संभावना बेहद कम रहेगी. ऐसे में उत्तर कोरिया ऐसी स्थिति से बचने की कोशिश करेगा जहां उनके नेता को प्रदर्शनकारियों का सामना करना पड़े.
कभी इंटरव्यू ना देने वाले किम जोंग-उन और मन में कॉमेडी फ़िल्म द इंटरव्यू की ताज़ा यादों के साथ किम जोंग-उन को वॉशिंगटन के पत्रकारों के सवाल-जबाव पसंद नहीं आएंगे.
हालांकि, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग फ्लोरिडा में ट्रंप के मालिकाना हक वालो 'मार-ए-लागो' पहुंचे थे. लेकिन उम्मीद नहीं है कि उत्तर कोरियाई नेता ये फ़ैसला करेंगे.
ऐसा लगता है कि सभी विकल्प खुले हैं. कुछ विकल्प दोनों में से किसी देश के लिए जोखिम से भरे हैं. हालांकि, ये तब है जब तक दोनों नेताओं की मुलाकात से पहले ही शांति प्रक्रिया भंग ना हो जाए.
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