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एक मासूम भालू से क्यों चिढ़ा चीन?
चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ने संविधान के उस हिस्से को हटाने का प्रस्ताव दिया है, जो राष्ट्रपति के कार्यकाल को दो कार्यकालों तक सीमित बनाता है.
इसका ये मतलब हुआ कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग साल 2023 में अपना कार्यकाल ख़त्म होने के बाद भी इस पद पर बने रह सकते हैं.
इस विवादित कदम ने चीन के सोशल मीडिया पर चर्चा छेड़ दी है. और इसकी वजह से चीनी सरकार इससे जुड़ी चीज़ों को सेंसर करने का अभियान शुरू कर दिया है.
क्या चल रहा है चीन में?
चीन के ट्विटर ब्लॉग जैसी साइट सिना वीबो पर कई टर्म (शब्दों) को भारी सेंसरशिप का सामना करना पड़ा है.
चाइना डिजिटल टाइम्स और फ़्री वीबो जैसी सेंसरशिप मॉनिटरिंग वेबसाइट के मुताबिक इन शब्दों को वहां के सोशल मीडिया में पाबंदी झेलनी पड़ रही है:
- मैं सहमत नहीं हूं
- माइग्रेशन
- इमिग्रेशन
- रीइलेक्शन
- इलेक्शन टर्म
- संविधान में संशोधन
- संवैधानिक नियम
- ख़ुद को राजा घोषित करना
- विनी द पूह
लेकिन आख़िर वहां ये सब क्यों हो रहा है? बाकी सब बातें फिर भी समझ आती हैं लेकिन विनी द पूह का चीन की राजनीति से क्या लेना-देना है?
शी और विनी का क्या लेना-देना है?
एक मासूम भालू को सोशल मीडिया पर इतना क्यों इस्तेमाल किया जा रहा है और चीन की सरकार इस बात से इतना क्यों चिढ़ रही है कि पाबंदी लगाने तक की नौबत आ गई.
दरअसल, ये मासूम भालू विनी द पूह है और बच्चे इससे अच्छी तरह वाक़िफ़ हैं. लेकिन चीन में इसका इस्तेमाल विरोध जताने के लिए होता है.
लोग शी जिनपिंग का मज़ाक बनाने के लिए इसी भालू की तस्वीरें शेयर करते हैं.
पिछले साल जुलाई में भी ऐसा ही कुछ हुआ था. वीबो पर जो लोग पूह के चीनी नाम लिटल बियर विनी के साथ कमेंट कर रहे थे, उन्हें एरर मैसेज आ रहे थे. इसके अलावा करेक्टर का जिफ़ भी ऐप वीचैट से हटा दिया गया था.
भालू तंज़ का हथियार
इसके लिए पहले भी कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया था लेकिन इस भालू को नियमित रूप से जिनपिंग का मज़ाक बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है.
चीन में सोशल मीडिया पर पैनी निगाह रखी जाती है. हालांकि, ये कंपनियां निजी हाथों में हैं लेकिन उन्हें कम्युनिस्ट पार्टी की ख़्वाहिशों का पूरा ख़्याल रखना होता है.
साल 2018 और 2017 के अलावा 2013 और 2017 में भी विनी द पूह पर गाज गिर चुकी है. ये पाबंदियां मुख्य रूप से वीबो पर लागू होती हैं जो फ़ेसबुक की तरह है. मासिक आधार पर 34 करोड़ लोग इस पर आते हैं.
जब यूज़र शी जिनपिंग ओबामा विनी द पूह सर्च करते हैं, तो कोई नतीजा सामने नहीं आता. इसके बदले लिखा आता है, ''प्रासंगिक नियम और कानूनों के मुताबिक इसका रिजल्ट नहीं दिखाया जा रहा.''
शी की क्या कोशिश?
लेकिन ये सब अभी क्यों हो रहा है. दरअसल, शी जिनपिंग चीन की सत्ता पर अपनी पकड़ मज़बूत बना रहे हैं और अगर उनकी कोशिश सफल रही तो वो साल 2023 के बाद भी पद पर बने सकते हैं.
1990 के दशक में चीन में राष्ट्रपति के कार्यकाल को दस साल तक सीमित रखने की परंपरा शुरू हुई. लेकिन साल 2012 में जब से शी जिनपिंग सत्ता में आए हैं, वो अपने नियम ख़ुद लिखने में लगे हैं.
लेकिन कई जानकार शी जिनपिंग को 'आजीवन राजा' बनाए जाने के प्रयासों पर हैरान हैं और उनका कहना है कि ऐसा होने पर चीन विकास के मामले में एक सदी पीछे जा सकता है.
चीन में लाखों लोग इंटरनेट की गतिविधियों पर निगाह रखने और सेंसर करने के काम में लगे हैं. इसलिए कुछ पोस्ट को ब्लॉक किए जाने पर कोई हैरानी नहीं होती.
युआन शिकाई कौन हैं?
एक यूज़र ने लिखा है, ''साम्राज्यवाद को उखाड़ने में सौ साल लगे, 40 साल सुधार में लगे, ऐसे में हम दोबारा इस सिस्टम की तरफ़ से नहीं लौट सकते.''
एक और ने लिखा, ''ज़्यादातर मुल्क़ों ने कार्यकाल को सीमित बनाने का सिस्टम इसलिए अपनाया है क्योंकि हमें नए ख़ून की ज़रूरत होती है ताकि अलग-अलग लोगों के मतों के बीच संतुलन बना रहे.''
राजाओं का ज़िक्र हो रहा है तो 19वीं सदी के युआन शिकाई की बात होनी ज़रूरी है, जिनकी तुलना शी जिनपिंग से की जा रही है.
झांग चाओयांग ने लिखा है, ''कल शाम युआन शिकाई को दोबारा मातृभूमि पर काबिज़ होने का ख़्वाब आया. ''
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