अमरीकी गुरुद्वारे भारतीय राजनयिकों के लिए बंद

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- Author, सलीम रिज़वी
- पदनाम, न्यूयॉर्क से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
अमरीका में कई गुरुद्वारों में भारत सरकार के अधिकारियों और राजनयिकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. अमरीका में मौजूद कई सिख संगठन इस प्रतिबंध का समर्थन कर रहे हैं.
अमरीका स्थित कई सिख संगठन 1984 के सिख दंगों समेत कई मुद्दों पर भारत की सरकार से नाराज़ हैं.
अमरीका में कुल 96 गुरुद्वारों में अब भारत सरकार के अधिकारियों और राजनयिकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. इनमें न्यूयॉर्क, कैलिफोर्निया समेत कई शहरों के गुरुद्वारे शामिल हैं.
इस सिलसिले में अमरीका में गुरुद्वारों के दो बड़े सिख संगठन- सिख कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ इस्ट कोस्ट और अमरीकी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया है.

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प्रतिबंध लगाने के कारण गिनाये
इन संगंठनों ने प्रतिबंध लगाने के कई कारण बताए हैं जिनमें 1984 के सिख विरोधी दंगों में सिखों के कथित नरसंहार, अकाल तख्त जत्थेदार जगतार सिंह हवारा और अन्य सिखों को जेल में बंद किया जाना भी शामिल है.
न्यूयॉर्क में सिख कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ इस्ट कोस्ट के कनवीनर हिम्मत सिंह ने बीबीसी हिंदी से कहा कि यह प्रतिबंध सिर्फ़ भारत सरकार के सरकारी हैसियत से आने वाले अधिकारियों पर लगाया गया है.
प्रतिबंध सिर्फ भारतीय सरकारी अधिकारियों पर है
हिम्मत सिंह कहते हैं, "यह प्रतिबंध भारत सरकार के अधिकारियों पर लगाया गया है जिसमें वह गुरुद्वारों में प्रवेश नहीं कर सकते और नगर कीर्तन में भी शामिल नहीं हो सकते."
प्रतिबंध की वजह के बारे में हिम्मत सिंह कहते हैं, "1984 के सिख विरोधी दंगों के ज़िम्मेदार लोगों को कोई सज़ा नहीं दी गई, हमारे अकाल तख्त के जत्थेदार जगतार सिंह को तिहाड़ में कैद कर दिया गया है. हम जब यहां अमरीकी अदालतों में इस सिलसिले में कोई मुकदमा करते हैं तो उसमें भी भारतीय वाणिज्य दूतावास के अधिकारी रोड़े अटकाते हैं. भारत में सिखों को आर्टिकल 25 के तहत हिंदुओं के साथ मिला कर देखा जाता है."

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आने वाली पीढ़ियों को अवगत कराना भी मकसद
हिम्मत सिंह ने आरोप लगाया कि विदेशों में रहने वाले कई सिखों को भी भारत सरकार द्वारा गिरफ्तार कर के भारत की जेलों में बंद किया गया. वह कहते हैं कि अपनी आने वाली पीढ़ियों को भी इन मामलों से अवगत कराना भी एक मकसद है.
क्या कहा गया प्रस्ताव में?
गुरुद्वारों में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने वाले इस प्रस्ताव में आरोप लगाया गया है कि भारत में हरमिंदर साहिब समेत 40 अन्य गुरुद्वारों को क्षति पहुंचाए जाने के लिए भारत सरकार ज़िम्मेदार है.
इसके अलावा इस प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि भारत में भाजपा की सरकार आरएसएस के एजेंडे को बढ़ावा दे रही है और अल्पसंख्यकों को दबाने की कोशिश की जा रही है.

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सिखों को डराने का माहौल
अमरीकी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अवतार सिंह पन्नु ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि, "भारत सरकार के अधिकारी गुरुद्वारों में समुदाय से मिलने के नाम पर अमरीका में पनाह लेने वाले सिखों को डराने का माहौल बना रहे हैं."
वहीं सिख कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ इस्ट कोस्ट नामक संगठन के प्रवक्ता हरजिंदर सिंह ने बीबीसी हिंदी से बात करते हुए कहा कि कई भारतीय एजेंट अमरीका के गुरुद्वारों में सिखों के बीच विवाद पैदा करने का भी काम करते हैं.
लेकिन हरजिंदर सिंह इस आरोप का कोई सबूत नहीं पेश कर सके.
हरजिंदर सिंह ने साफ़ तौर पर यह ज़रूर कहा कि सारे गुरुद्वारों में कोई भी आ सकता है, और प्रतिबंध सिर्फ़ भारत सरकार के अधिकारियों और राजनयिकों को उनके सरकारी ओहदे की हैसियत से लागू है, व्यक्तिगत तौर पर वह लोग गुरुद्वारों में प्रवेश कर सकते हैं.
इसके अलावा इस सिलसिले में हरजिंदर सिंह ने कहा कि सिख संगठन भारत सरकार के अधिकारियों से बातचीत करने के लिए तैयार हैं.

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अमरीका में हैं 100 से अधिक गुरुद्वारे
हरजिंदर सिंह ने कहा, "प्रतिबंध लगाने संबंधी इस प्रस्ताव में जो सिखों के ख़िलाफ़ अन्याय के मामले शामिल किए गए हैं, उन मामलों पर अगर भारतीय सरकार कोई कदम उठाने की इच्छा रखती है तो उसके लिए हम बातचीत करने को तैयार हैं."
लेकिन सभी गुरुद्वारों में इस तरह का प्रतिबंध नहीं लगाया गया है. वॉशिंगटन, न्यूयॉर्क और कनेक्टिकट समेत कई प्रांतों में कुछ गुरुद्वारों ने भारतीय सरकारी अफ़सरों के प्रवेश पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है.
एक अनुमान के मुताबिक अमरीका में करीब 5 लाख सिख रहते हैं. यहां के कई प्रांतों में सिखों की आबादी फैली है जहां 100 से अधिक गुरुद्वारे भी बनाए गए हैं.
न्यूयॉर्क और कैलिफोर्निया में सबसे अधिक सिख समुदाय के लोग रहते हैं. कैलिफोर्निया में 50 से अधिक गुरुद्वारे हैं जबकि न्यूयॉर्क में करीब 40 गुरुद्वारे बनाए गए हैं.

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खालिस्तान की मांग को लेकर होता रहा है प्रदर्शन
अमरीका में रहने वाले सिखों में से कुछ लोग पिछले कई वर्षों से सिख विरोधी दंगों के सिलसिले में दोषियों को सज़ा दिलाए जाने और एक अलग राज्य खालिस्तान की मांग से संबंधित प्रदर्शन भी करते रहे हैं.
चाहे वह संयुक्त राष्ट्र महासभा का वार्षिक अधिवेशन का मौका हो या किसी भारतीय राजनेता का अमरीकी दौरा हो, इस प्रकार के प्रदर्शन किए जाते रहे हैं.
इन प्रदर्शनों में सैकड़ों लोग शामिल होते हैं जो भारतीय सरकार के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी करते हैं और हाथ में भारत-विरोधी नारे लिखे हुए बौनर और पोस्टर भी थामे होते हैं.
इसके अलावा कई शहरों में वार्षिक सिख परेड भी आयोजित की जाती हैं जिनमें भारत-विरोधी नारे लिखी झांकियां भी शामिल की जाती है.
पिछले कई वर्षों में अमरीका के कई शहरों की अदालतों में भी कुछ सिख अमरीकी संगठनों ने कुछ भारतीय नेताओं के ख़िलाफ़ सिख विरोधी दंगों के सिलसिले में मुकदमे भी दायर किए थे.
अब भारतीय राजनयिकों और अधिकारियों पर गुरुद्वारों में प्रवेश पर पाबंदी भी उसी विरोध के सिलसिले की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है.
इसकी शुरुआत कनाडा में सिखों द्वारा की गई थी, जो आयोजकों के अनुसार अब अमरीका समेत, ब्रिटेन, यूरोप के अन्य देशों में भी शुरू की जा रही है.
















