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कास्त्रो को मारने की 'सुपारी' थी एक लाख डॉलर?
अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ़ कैनेडी की हत्या से जुड़ी 2800 गोपनीय फाइलें सार्वजनिक करने का आदेश दिया है.
इन फाइलों के सार्वजनिक होने के बाद एक तरफ जहां कैनेडी की हत्या की गुत्थी सुलझने की उम्मीद जगी है, वहीं कई दूसरी बातें भी सामने निकलकर आ रही हैं.
इनमें ख़ास है क्यूबा के क्रांतिकारी नेता और पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो की हत्या के लिए अमरीका द्वारा रची गई साजिशों की सच्चाई.
क्या थी कास्त्रो के सिर की कीमत?
कई सालों से क्यूबा की सरकार आरोप लगाती रही है कि अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए ने उनके कम्युनिस्ट नेता फिदेल कास्त्रो की हत्या का षडयंत्र रचा था.
कैनेडी की हत्या के पीछे एक तरफ तो जहां कास्त्रों का हाथ होने की बात कही जाती है, वहीं दूसरी तरफ यह भी कहा जाता है कि इस हत्या को उन लोगों ने योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया जो हवाना और वाशिंगटन के बढ़ते मेलजोल का विरोध कर रहे थे.
बॉस्टन कॉलेज में प्रेसिडेंसी इतिहास के प्रोफेसर पैट्रिक मैनी कहते हैं, ''मेरे ख़्याल से कास्त्रो की हत्या के लिए सीआईए की कोशिशों और कैनेडी की हत्या में कुछ न कुछ संबंध ज़रूर है. ली हार्वी ओसवाल्ड सीआईए की योजनाओं के बारे में जानते थे और शायद इसी वजह से वे कैनेडी की हत्या के लिए प्रेरित भी हुए."
गुरुवार को जारी किए गए दस्तावेजों से पता चला है कि अमरीकी ख़ुफ़िया विभाग और फ्लोरिडा से आए क्यूबा के प्रवासियों के बीच कुछ बैठकें हुई थी जिसमें फिदेल कास्त्रो की हत्या की साजिश रची गई थी.
एक दस्तावेज में क्यूबा के नेता फिदेल कास्त्रो समेत वहां के कई बड़े नेताओं को मारने की कीमत बताई गई है.
इसमें फ़िदेल कास्त्रो को मारने के लिए 1 लाख डॉलर, उनके भाई राउल कास्त्रो को मारने के लिए 20 हजार डॉलर और चे ग्वेरा को मारने के लिए 20 हजार डॉलर की रकम दिए जाने की बात लिखी गई है.
कैनेडी की हत्या की गुत्थी
अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी की हत्या को लेकर अलग-अलग धारणाएं बनी हुई हैं. इस घटना से जुड़ी गोपनीय फाइलें जारी होने के बाद क्या इस हत्या की गुत्थी सुलझेगी.
हालाँकि डोनल्ड ट्रंप ने सुरक्षा कारणों से कुछ अन्य फाइलों को जारी करने से मना कर दिया है. यह सभी दस्तावेज 50 लाख पेजों में हैं. इन्हें जारी करने की अंतिम तिथि 26 अक्टूबर 2017 थी.
फाइलों को सार्वजनिक करने के लिए ट्रंप ने कार्यकारी विभाग के प्रमुखों को निर्देशित करते हुए एक मेमो जारी किया.
इस मेमो में ट्रम्प ने लिखा कि अमरीकी जनता "इस महत्वपूर्ण घटना के सभी पहलुओं के बारे में पूरी तरह से सूचित" होने के योग्य है.
राष्ट्रपति ने लिखा, ''इसलिए मैं अंतत: पर्दा उठाने का आदेश दे रहा हूं.''
ये रिकॉर्ड नेशनल आर्काइव वेबसाइट पर जारी किए गए हैं.
कैनेडी की हत्या को लेकर अलग-अलग कहानियां सामने आई थीं. आधिकारिक रूप से ली हार्वी ओसवाल्ड को इस हत्या का ज़िम्मेदार ठहराया गया था.
हालांकि, इसमें एक और व्यक्ति के शामिल होने की संभावना भी जताई गई थी. हत्या को लेकर कई राज़ फाइलों में बंद थे जिनके अब खुलने की संभावना जताई जा रही है.
क्या था मामला?
जॉन एफ कैनेडी की हत्या 22 नवंबर 1963 को की गई थी, जब वे एक खुली कार में डलास के दौरे पर थे.
टेक्सस के गवर्नर जॉन खानोली कैनेडी के सामने बैठे हुए थे. उन्हें भी इस घटना में चोट आई थी.
इसके तुरंत बाद पुलिस ऑफिसर जेडी टिपिट की हत्या कर दी गई.
ली हार्वी ओसवाल्ड को कैनेडी और टिपिट की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. लेकिन, ओसवाल्ड ने इससे इनकार करते हुए खुद को निर्दोष बताया था.
24 नवंबर को ओसवाल्ड की डलास पुलिस विभाग के बेसमेंट में जैक रूबी ने हत्या कर दी थी. जैक स्थानीय नाइटक्लब के मालिक थे.
वॉरेन कमीशन की रिपोर्ट
सितंबर 1964 में प्रकाशित की गई वॉरेन कमीशन की रिपोर्ट में कहा गया था कि ली हार्वी ओसवाल्ड ने टेक्सस स्कूल बुक डिपॉजिट्री बिल्डिंग से गोली मारी थी.
कमीशन ने कहा था, ''इस बात के कोई सबूत नहीं है कि ली हार्वे ओसवाल्ड या जेक रूबी किसी घरेलू या विदेशी साजिश का हिस्सा थे.''
1979 में हाउस सलेक्ट कमिटी ने हत्या की जांच की थी. कमिटी ने कहा था कि हत्या की जगह पर दो लोगों के होने की बहुत अधिक संभावना है.
ली हार्वी ओसवाल्ड कौन थे ?
ली हार्वी ओसवाल्ड एक पूर्व नौसैनिक और स्व-घोषित मार्क्सवादी थे. उन्होंने 1959 में सोवियत संघ की यात्रा की और 1962 तक वहां रहे थे.
वह मिंस्क में एक रेडियो और टीवी फैक्ट्री में काम करते थे और इसी शहर में अपनी पत्नी से उनकी मुलाकात हुई.
वॉरेन कमीशन को पता चला कि कैनेडी की हत्या से दो दिन पहले हार्वी क्यूबा और रूस के दूतावासों में गए थे.
अन्य कहानियां
कुछ लोगों का कहना है कि वहां पर दूसरा शूटर हो सकता है और अन्य कहते हैं कि यह संभावना है कि कैनेडी को पीछे से नहीं सामने से गोली मारी गई हो.
ओसवाल्ड के गालों पर किए गए पैराफिन टेस्ट में ये बात सामने आई थी कि उन्होंने बंदूक नहीं चलाई थी. हालांकि, इस टेस्ट की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए गए थे.