फ़िनलैंडः बिना एक्ज़ाम वाले स्कूल, जहां न दीवारें हैं, न मेज कुर्सियां

इमेज स्रोत, KUVATOIMISTO KUVIO OY
- Author, मार पिशेल
- पदनाम, बीबीसी मुंडो
फ़िनलैंड की पहचान दुनिया भर में सबसे बेहतरीन शिक्षा व्यवस्था के लिए होती है. अलग-अलग देश फ़िनलैंड की इस शिक्षा व्यवस्था को सीखने के लिए वहां का दौरा भी करते हैं.
यहां बच्चे की शिक्षा 7 साल की उम्र से शुरू होती है, वहां बच्चों को स्कूलों में ज़्यादा काम नहीं दिया जाता, उनके स्कूल के घंटे भी कम ही होते हैं और छुट्टियां अधिक होती हैं. सबसे दिलचस्प बात है कि फ़िनलैंड की शिक्षा व्यवस्था में परीक्षाएं आयोजित नहीं की जातीं.
यहां के शिक्षा मॉडल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सबसे क़ामयाब करार दिया गया है. फिर भी यह देश अपनी शिक्षा व्यवस्था में लगातार बदलाव कर रहा है.
बंद क्लासरूम की जगह ओपन स्पेस
एक साल पहले इस उत्तरी यूरोपीय देश में 'फ़िनॉमिना लर्निंग' का तरीक़ा शुरू किया गया था. इसमें पारंपरिक विषयों की जगह थीम आधारित प्रोजेक्ट की शिक्षण पद्धति अपनाई गई.
इसके तहत छात्र पढ़ाई की पूरी प्रकिया की ज़िम्मेदारी खुद निभाते हैं. डिज़िटल तकनीक के इस्तेमाल से छात्रों की किताबों पर निर्भरता ख़त्म हो गई.
उन्हें किताबों और क्लासरूम से मुक्त कर दिया गया.

इमेज स्रोत, KUVATOIMISTO KUVIO OY
यहां स्कूलों में बंद दीवारों वाले क्लासरूम के पुराने तरीकों को बदलकर ओपन प्लान यानी 'खुली जगह की योजना' को लागू किया गया.
पुराने क्लासरूम को मल्टीमॉडल स्पेस में तब्दील किया गया, ये मल्टीमॉडल कमरे कांच की दीवारों से बंटे होते हैं. ये दीवारें एक स्थान से दूसरे स्थान तक खिसकाई जा सकती हैं.
क्लासरूम में डेस्क और बेंच की जगह सोफ़ा और गद्दे रखे गए हैं. यहां के नेशनल एजुकेशन एजेंसी के आर्किटेक्ट तपानिनेन ने बीबीसी को बताया कि इन तरीकों से छात्र और शिक्षक अपनी सुविधानुसार स्थान चुन सकते हैं.
यदि कोई अकेले काम करना चाहता है या फिर टीम के साथ तो इसी तरह वे अपनी जगह भी चुन लेते हैं.
मानसिक दायरा भी खुलता है
फ़िनलैंड में फर्म एफसीजी में सलाहकार राइला ओकसानेन कहते हैं, "ओपन स्पेस के ज़रिए न सिर्फ़ क्लास के दायरे को खोला जाता है बल्कि छात्रों के मानसिक दायरों को भी बड़ा किया जाता है."
उनके मुताबिक, "इस तरीक़े से छात्र ज़िम्मेदार बनते हैं, वे अपनी शिक्षा की ज़िम्मेदारी खुद उठाने लगते हैं, वे अपने लक्ष्य निर्धारित करते हैं और उन्हें हासिल करने के प्रयास भी करते हैं."

इमेज स्रोत, KUVATOIMISTO KUVIO OY
यहां ओपन स्पेस का विचार कोई नया नहीं है. लगभग 60 और 70 के दशक में ऐसे स्कूल खुलने लगे थे. उस समय बड़े-बड़े हॉल को पर्दों से बांट दिया जाता था.
लेकिन एक ही हॉल में बैठने से शोर अधिक होता था, इसलिए 1980 और 1990 के दशकों में बंद क्लासरूम बनने शुरू हो गए.
स्कूल की पढ़ाई को सिर्फ़ किताबों तक ही सीमित नहीं रखा गया है, छात्रों को प्रकृति के नजदीक जाने का मौका दिया जाता है, उन्हें म्यूजियम और अन्य जगहों पर घुमाया जाता है.
चुनौतियां
ओपन स्पेस तरीके में हालांकि कुछ चुनौतियां भी शामिल हैं. जैसे शोर को कम करना. इसके लिए स्कूलों ने क्लासरूम में बिना जूतों के आने की बात रखी. इससे क्लासरूम में कहीं घूमने-फिरने पर आवाज न आए और आसानी से सभी अपनी पढ़ाई कर सकें.

इमेज स्रोत, KUVATOIMISTO KUVIO OY
क्लासरूम के फर्श पर भी कालीन बिछाई गई, इससे भी शोर को कम करने में मदद मिली.
ओपन क्लासरूम में सुरक्षा का मुद्दा भी काफी महत्वपूर्ण है. साल 2007 में एक 18 वर्षीय छात्र ने अपनी क्लास के 8 बच्चों को गोली मार दी थी.
इसलिए स्कूलों में सुरक्षा के लिए कड़े निर्देश दिए गए हैं.
फ़िनलैंड में 4800 प्राइमरी, सैकेंडरी और हाईस्कूल हैं. इनमें से अधिकांश स्कूल ओपन स्पेस के मॉडल को अपना रहे हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












