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परमाणु कार्यक्रम पूरा करके अमरीकी फौज की बराबरी करेंगे: उत्तर कोरिया
ताज़ा मिसाइल परीक्षण पर चौतरफ़ा निंदा के बाद भी उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन ने देश के परमाणु कार्यक्रम को पूरा करने की बात दोहराई है.
उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया ने यह ख़बर दी है. समाचार एजेंसी केसीएनए के मुताबिक, किम जोंग-उग ने कहा है कि इस कार्यक्रम का मक़सद अमरीकी फौज़ के मुक़ाबले में 'संतुलन' बनाना है.
केसीएनए के मुताबिक, किम जोंग-उन ने कहा, 'हमें इन बड़ी ताक़त वाले देशों को दिखाना है कि हमारा देश उनकी असीम पाबंदियों और अड़चनों के बावजूद कैसे अपना परमाणु कार्यक्रम पूरा करता है.'
उन्होंने यह भी कहा कि हमारा मक़सद 'अमरीकी फ़ौज़ के मुक़ाबले अपना संतुलन बनाना है, ताकि अमरीकी शासक सैन्य विकल्प के बारे में सोचने की हिम्मत भी न कर सकें.'
संयुक्त राष्ट्र की बैठक में निंदा
इससे पहले उत्तर कोरिया के हालिया मिसाइल परीक्षण को बड़े उकसावे वाली कार्रवाई बताते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् ने इसकी कड़ी निंदा की. गुरुवार को उत्तर कोरिया ने जापान की ओर अपनी अब तक की सबसे लंबी दूरी की मिसाइल का परीक्षण किया था.
इसके बाद सुरक्षा परिषद् की बुलाई गई आपात मीटिंग में प्योंगयांग से इस तरह की कार्रवाई को तत्काल रोकने को कहा गया.
मिसाइल परीक्षण के तुरंत बाद तीखे बयानों के बाद, अमरीका, चीन और रूस इस मुद्दे पर साथ नज़र आए. बयान में सदस्य देशों से प्रतिबंधों को कड़ाई से लागू करने को कहा गया है.
अमरीका की सैन्य कार्रवाई की चेतावनी
सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष टेकेडा एलेमू ने बयान में कहा, "परिषद् डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ कोरिया के बैलिस्टिक मिसाइल लांच की उकसावे वाली कार्रवाई की निंदा करती है. सुरक्षा परिषद का मानना है कि सभी सदस्य देश पूरी तरह और तत्काल, परिषद् के प्रस्तावों को लागू करें. परिषद् इस ज़रूरत पर भी जोर देती है कि कोरिया परमाणु निःशस्त्रीकरण की प्रतिबद्धता के प्रति ठोस कार्रवाई के ज़रिए गंभीरता दिखाए और कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव को कम करने के लिए काम करे."
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत निकी हेली ने कहा कि अगर कड़ी आर्थिक पाबंदियां कारगर नहीं होती हैं तो वॉशिंगटन के पास सैन्य कार्रवाई के और विकल्प भी मौजूद हैं.
हालांकि संयुक्त राष्ट्र में रूसी राजदूत वैसिली नेबेंज़िया ने कहा कि कूटनीति ही इस संकट का एकमात्र रास्ता है.
और पाबंदियां नहीं
उन्होंने कहा, "सबसे पहले तो, हम समझते हैं कि धमकियां, परीक्षण, मिसाइल लॉन्च और एक दूसरे को धमकियां देना बंद होनी चाहिए. हमें नतीजे देने वाली बातचीत में शामिल होना चाहिए. मेरे हिसाब से सभी लोग इस बात को समझते हैं कि अंत में इसका दूसरा कोई और रास्ता नहीं है."
बैठक से पहले अमरीका और चीन और रूस के बीच इस मुद्दे पर तब विवाद पैदा हो गया था जब अमरीका ने इसकी सारी ज़िम्मेदारी रूस और चीन पर डाल दी थी.
अमरीका ने कहा था कि उत्तर कोरिया को समझाने की पूरी ज़िम्मेदारी उसके क़रीबी सहयोगी चीन पर है.
अभी हाल ही में परिषद ने उत्तर कोरिया पर लगे प्रतिबंधों को और कड़ा करने का फैसला किया था. लेकिन ताज़ा बयान में और पाबंदियों का ज़िक्र नहीं किया गया है.
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