क्या मोदी-जिनपिंग ने सुलझा दिया डोकलाम विवाद?

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सरहद पर विवाद के बाद भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ये पहली द्विपक्षीय मुलाक़ात थी.
डोकलाम को लेकर तीन महीने तक दोनों देशों के बीच खींचतान जारी रही, ऐसे में चीन के शहर शियामेन में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में दोनों की बैठक पर दुनिया की निगाह टिकी थी.
चीनी सरकारी मीडिया के मुताबिक जिनपिंग ने मोदी से कहा कि चीन और भारत के बीच 'मज़बूत और स्थिर' रिश्ते ज़रूरी हैं.
म्यांमार रवाना होने से पहले ये ये मोदी की आखिरी बैठक थी.
चीनी की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक एक घंटे से ज़्यादा वक़्त तक चली इस बैठक में जिनपिंग ने भारत के साथ रिश्तों को 'सही दिशा' में बढ़ाने पर ज़ोर दिया.
जिनपिंग ने क्या कहा?

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दूसरी ओर मोदी ने जिनपिंग को तीन दिन चले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के सफ़ल आयोजन पर बधाई दी.
संवाददाता सम्मेलन में भारत के विदेश सचिव एस जयशंकर ने कहा कि दोनों देश एक-दूसरे को सम्मान देते हुए आगे बढ़ेंगे.
उन्होंने डोकलाम विवाद की ओर इशारा करते हुए कहा, ''दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि उनके बीच बेहतर संचार और सहयोग होना चाहिए ताकि इस तरह की घटनाएं फिर ना हों.''

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भारत-चीन सीमा पर डोकलाम गतिरोध के बाद दोनों नेताओं के बीच पहली बार शियामन में बात हुई है.
इससे पहले सोमवार को दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से हाथ मिलाया था. मंगलवार को दोनों नेताओं के बीच हुई बीतचीत का ब्योरा विदेश सचिव एस जयशंकर ने प्रेस वार्ता में दिया.
उन्होंने बताया की प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक एक घंटे से थोड़ी ज़्यादा चली और सकारात्मक रही. बातचीत में दोनों नेताओं ने संबंधों को मज़बूत बनाने और आगे बढ़ाने की बात कही.
बैठक के पहले हिस्से में ब्रिक्स से जुड़े मुद्दों पर बात हुई. जिसके बाद दोनों देशों के आपसी रिश्तों से संबंधित मुद्दों पर बात हुई.
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मोदी-जिनपिंग वार्ता के मुख्य तथ्य -
- जून में अस्ताना में दोनों देश राज़ी हुए थे कि उनके बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन वो कभी तनाव का रूप नहीं लेंगे. दोनों देश सहमत हुए थे कि बदलते विश्विक माहौल को देखते हुए भारत-चीन अपने संबंधों में मज़बूती रखेंगे. इस पर दोनों नेता फिर एक बार सहमत हुए हैं.
- सौहार्दपूर्ण रिश्तों के लिए ज़रूरी है कि दोनों देशों की सीमाओं पर शांति बनी रहे. ऐसे में दोनों देशों को आपसी भरोसे को और मज़बूत बनाने की दिशा में काम करना होगा.

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- पड़ोसी और बड़ी ताकतें होने के नाते यह लाज़मी है कि दोनों देशों में मतभेद होंगे. ऐसी स्थिति में शांतिपूर्वक और आपसी सम्मान को बनाए रखते हुए उसका निपटारा होना चाहिए और इसके लिए कोशिश की जानी चाहिए.
- सेना के अधिकारियों के बीच आपसी बातचीत को अधिक महत्व देने की ज़रूरत है ताकि डोकलाम जैसी तनाव की स्थिति दोबारा न पैदा हो.

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- दोनों देशों को अपने रिश्तों को मज़बूत करने के लिए ब्रिक्स और ज्वाएंट इकनॉमिक ग्रुप जैसे प्लैटफ़ॉर्म पर भी बातचीत की ज़रूरत है.
- विदेश सचिव ने बताया कि दोनों नेताओं में चरमपंथ को ले कर कोई बातचीत नहीं हुई. हालांकि उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर पहले ब्रिक्स में बात हुई है जिस पर ब्रिक्स के सभी सदस्य राज़ी हुए हैं.
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