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ऑस्ट्रेलिया: बुर्क़ा पहनकर पहुंची सांसद
ऑस्ट्रेलिया की संसद में गुरुवार को दक्षिणपंथी नेता पॉलिन हैनसन जैसे ही पहुंचीं, वहां मौजूद सभी नेता दंग रह गए. हैनसन सीनेट में बुर्क़ा पहनकर पहुंची थीं.
दरअसल, हैनसन ऑस्ट्रेलिया में बुर्क़े पर प्रतिबंध लगाने की अपनी पार्टी की मांग के तहत बुर्क़ा पहनकर पहुंची थीं.
जहां विपक्षी पार्टी के नेताओं ने हैनसन की खड़े हो कर सराहना की, वहीं मंत्री जॉर्ज ब्रैंडिस ने हैनसन के इस स्टंट की निंदा की और धार्मिक समूहों के ख़िलाफ़ किसी भी तरह के अपराध के ख़िलाफ़ चेताया.
अपने भावनात्मक भाषण में ब्रैंडिस ने कहा कि हैनसन के इस तरह बुर्क़े में आने से इस्लाम में विश्वास रखने वाले लगभग 5 लाख ऑस्ट्रेलियाइयों के अलगाव का ख़तरा पैदा हुआ है.
धार्मिक कपड़े का मजाक उड़ाना भयावह
ब्रैंडिस ने कहा, "उस समुदाय का उपहास करने और उसके धार्मिक कपड़े का मज़ाक उड़ाना एक भयावह बात है और मैं आपसे यह पूछता हूं कि आपने ये क्या किया है."
साथ ही उन्होंने यह साफ़ कर दिया कि वो बुर्के पर प्रतिबंध नहीं लगाएंगे. उन्होंने कहा, "नहीं, सीनेटर हैनसन, हम बुर्के पर प्रतिबंध नहीं लगाएंगे."
ब्रैंडिस ऑस्ट्रेलिया के अटॉर्नी जनरल हैं.
सदन में हांफते हुए पहुंची हैनसन
ऑस्ट्रेलियाई ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन के अनुसार सदन में प्रवेश के दौरान हैनसन हांफते हुए पहुंची और उस दौरान एक सीनेटर ने चौंकते हुए कहा- "ओह, ये क्या हुआ".
सीनेट प्रमुख स्टीफन पैरी ने स्पष्ट किया कि चेंबर में घुसने से पहले उनकी पहचान कर ली गई थी. हैनसन ने बाद में बुर्क़े को हटा दिया.
बुर्क़े पर प्रतिबंध लगाने की उनकी मांग पर सीनेट पर बाद में बहस होगी.
उन्होंने एक बयान में कहा, "जनता के बीच चेहरे को पूरी तरह ढंकना आधुनिक ऑस्ट्रेलिया का महत्वपूर्ण मुद्दा है."
लेबर, ग्रीन पार्टियों ने किया ब्रैंडिस का समर्थन
दूसरी तरफ़, ब्रैंडिस के भाषण का लेबर और ग्रीन पार्टियों ने समर्थन किया, जिन्होंने खड़े होकर उन्हें बधाई दी.
लेबर सीनेटर पेनी वोंग ने कहा, "पोशाक को धार्मिक विश्वास के रूप में पहनना एक बात है, और इस कमरे में एक स्टंट के रूप में इसे पहनना दूसरी."
ग्रीन्स के नेता रिचर्ड डी नटाले ने कहा कि ब्रैंडिस ने "मज़बूत, भावनात्मक और व्यक्तिगत प्रतिक्रिया" दी है.
विवादों से रहा है हैनसन का नाता
1996 में पहली बार सीनेट के लिए चुने जाने के बाद से हैनसन कई बार विवादों में रही हैं.
2016 में उन्होंने एक सबसे विवादित भाषण में कहा था कि ऑस्ट्रेलिया मुसलमानों से भर गया है. दो महीने पहले ही उनसे तब माफ़ी मांगने की मांग भी की गई थी जब उन्होंने ऑटिज़्म के छात्रों को क्लासरूम से हटा दिए जाने का सुझाव दिया था.
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