वेनेज़ुएला: सैन्य अड्डे पर हमला करके 10 विद्रोही फरार

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वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने कहा है कि उन दस हथियारबंद लोगों की तलाश की जा रही है जो सैन्य अड्डे पर हमले के बाद फरार हो गए.
उन्होंने बताया कि उत्तर पश्चिमी शहर वेलेंसिया में करीब 20 लोगों ने यह हमला किया था. इनमें से दो को मार दिया गया, एक ज़ख़्मी है और सात लोग गिरफ़्तार किए गए हैं.
सरकारी टीवी पर राष्ट्रपति मादुरो ने सेना को इस हमले को नाकाम करने के लिए बधाई दी है.

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सत्ताधारी दल सोशलिस्ट पार्टी के उप नेता डियोसडादो काबेलियो ने ट्विटर पर इस घटना को 'आतंकी हमला' बताया है.
रिपोर्टों के मुताबिक काराबोबो राज्य के वेलेंसिया में सेना की एक बैरक पर हमला किया गया.
सोशल मीडिया पर इस मामले से जुड़ा एक वीडियो जारी हुआ है.
इस वीडियो में वर्दीधारी लोगों को ये कहते सुना गया है कि वे एक 'निर्दयी तानाशाही' के ख़िलाफ़ संघर्ष कर रहे हैं.

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वीडियो में एक नेता ने अपना नाम ख्वान कागुरिपानो बताते हुए कहा, "ये तख़्तापलट नहीं बल्कि कानून के राज को वापस लाने के लिए सेना और नागरिकों द्वारा उठाया गया कदम है."
सोशलिस्ट पार्टी के उप नेता डियोसडादो काबेलियो ने बताया है कि फ्वर्टे परामाके मिलिट्री बैरकों में पूरी तरह से नियंत्रण पा लिया गया है.
इसके पहले सशस्त्र बलों के कमांडिंग ऑफ़िसर रेमिख़िओ सेबायोस ने ट्वीट करके बताया था कि सात लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

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इससे पहले सोशल मीडिया पर गोलीबारी की खबरें सामने आईं थीं.
वहीं, कुछ अन्य लोगों का कहना है कि उन्होंने सैन्य अड्डे पर ऊंची आवाज में देशभक्ति के गाने सुने.

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ख्वान कागुरिपानो ने अपने छोटे से भाषण में कहा है कि उनका समूह जिसे वह 41वीं बिग्रेड कहते हैं राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की निर्दयी तानाशाही के ख़िलाफ़ खड़ा हो रहा है.

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वेनेज़ुएला में बीते अप्रैल से हर रोज़ विरोध प्रदर्शन देखे जा रहे हैं.
विपक्ष ने वामपंथी राष्ट्रपति मादुरो पर जरूरत से ज्यादा ताकत हासिल करने का आरोप लगाया है.

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बीते शनिवार को नई संविधान पीठ ने अपनी पहली कार्यवाही शुरू की और इसके तुरंत बाद मादुरो की पूर्व सहयोगी से आलोचक बनीं मुख्य वकील लुइसा ओर्टेगा को बर्खास्त करने पर मतदान किया गया.
इस संविधान पीठ के सदस्यों को बीते रविवार एक विवादित मतदान से चुना गया था जिसमें किसी भी विपक्षी नेता ने भाग नहीं लिया था. इससे मतदान में घालमेल करने के आरोप लगाए गए.

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इस नई संविधान पीठ के पास संविधान को नए सिरे से लिखने की शक्ति है. और, यह पीठ विपक्ष के नियंत्रण वाली राष्ट्रीय संसद को कमतर बना सकती है.
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