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क़तर संकट: क्या अल जज़ीरा के पर कतर देंगे अरब देश
- Author, केविन पोन्याह
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
सऊदी अरब ने क़तर के न्यूज़ नेटवर्क अल जज़ीरा के ऑफिस को बंद करने के साथ ही ब्रॉडकास्टिंग लाइसेंस को कैंसल कर दिया है.
वहीं, मिस्र, बहरीन, सऊदी अरब और सयुंक्त अरब अमीरात ने अल जज़ीरा की वेबसाइट को ब्लॉक कर दिया है.
तेल और गैस संपदा से धनी अरब देश क़तर को दुनिया के नक्शे पर एक पहचान दिलाने में अल जज़ीरा का एक विशेष योगदान रहा है. इसमें साल 2022 के फुटबॉल विश्व कप का आयोजन अधिकार हासिल करना भी शामिल है.
ऐसे में क़तर संकट सामने आने के बाद अब अल जज़ीरा के भविष्य पर भी प्रश्न चिह्न लगना शुरू हो गए हैं.
अरब देशों को क्यों नहीं पसंद अल जज़ीरा?
मिस्र से लेकर सऊदी अरब में अल जज़ीरा की पत्रकारिता पर सवाल उठते रहे हैं.
इसमें मिस्र के शासकों होस्नी मुबारक और मोहम्मद मोर्सी के सत्ता से अपदस्थ होने के दौरान हुई अल जज़ीरा की रिपोर्टिंग भी शामिल है.
सऊदी अरब ने कहा है कि ये हूती विद्रोहियों का समर्थन करता है जिनके खिलाफ सऊदी अरब यमन में संघर्ष कर रहा है.
हालांकि, अल जज़ीरा ने संपादकीय स्वतंत्रता का बचाव किया है.
क्या अल जज़ीरा को होगा नुकसान?
दोहा से बीबीसी अरब के विशेष संवाददाता फेरस किलानी बताते हैं कि सूत्रों के मुताबिक क़तर पर मीडिया में सुधार करने की शर्त लादी जाएगी, अलजज़ीरा को शायद बंद न किया जाए लेकिन इसकी संपादकीय नीतियों में परिवर्तन लाया जाएगा और लंदन में स्थित क़तर के नये नेटवर्क अल अरबया को बंद किया जा सकता है.
वह बताते हैं कि साल 2002 में सऊदी अरब इसरायल और फिलिस्तीन के बीच उसकी शांति योजना से जुड़ी रिपोर्टिंग पर इतना खफा हुआ है कि क़तर से अपने दूत को वापस बुला लिया था.
साल 2014 में क़तर ने राजनयिक संकट को दूर करने के लिए अपने अरब पड़ोसियों की घरेलू नीतियों में छेड़छाड़ नहीं करने का वादा किया था. इस दौरान सऊदी अरब, बहरीन और सयुंक्त अरब अमीरात ने अपने दूतों को वापस बुला लिया था.
किंग्स कॉलेज लंदन में क़तर विशेषज्ञ डेविड रॉबर्ट्स इस बात से सहमत हैं कि क़तर के साथ संबंध सुधारने की दिशा में अल जज़ीरा खाड़ी देशों और मिस्र की मांगों में भी शामिल होगा.
खबरों को किस तरह छापता है अल जज़ीरा अरब - नादा राशवान, बीबीसी मॉनिटरिंग
अल जज़ीरा अरब साल 2011 में सामने आई अरब क्रांति का पक्षधर था और नेटवर्क ने इस्लाम समर्थित लाइन ले ली थी.
इसके साथ ही अल जज़ीरा को क़तर की वैश्विक नीति का हिस्सा माना जाने लगा. साल 2013 में मोहम्मद मोर्सी के अपदस्थ होने की घटना के दौरान भी मिस्र और क़तर के बीच तनाव की वजह अल जज़ीरा ही था.
सीरिया और इराक में अल जज़ीरा की कथित इस्लामिक स्टेट चरमपंथी समूह से जुड़ी खबरें अन्य न्यूज नेटवर्कों से अलग रहीं.
मसलन, अल जज़ीरा इस संगठन को राज्य संगठन कहता है जो इस संगठन की परिभाषा से ज्यादा अलग नहीं है. ये परिभाषा सऊदी अरब की परिभाषा के विपरीत है.
साल 2015 में इस्लामिक स्टेट ने सुन्नी आतंकियों को सुन्नी क्रांतिकारी कहा जिसमें इस्लामिक स्टेट के चरमपंथी भी शामिल हैं.
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