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चीन की छात्रा को चीनियों ने ही क्यों कहा देशद्रोही
एक चीनी छात्रा ने अमरीका में अपने ग्रेजुएशन भाषण पर उग्र प्रतिक्रियाओं के बाद माफ़ी मांग ली है.
मैरीलैंड यूनिवर्सिटी में भाषण देते हुए यांग शूपिंग ने अमरीका में 'लोकतंत्र की ताज़ा हवा' की तारीफ़ की थी. उन्होंने चीन के वायु प्रदूषण और वहां बोलने की आज़ादी पर पाबंदियों की तुलना की थी.
इस पर गुस्साए चीन के सोशल मीडिया यूज़र्स ने उन पर अपनी जन्मभूमि को नीचा दिखाने के आरोप लगाए और उनसे अमरीका में ही रहने को कहा.
लेकिन यूनिवर्सिटी ने यह कहते हुए छात्रा का बचाव किया कि अलग विचार सुनना बहुत ज़रूरी है.
'मीठी और ताज़ी हवा'
यांग को यूनिवर्सिटी ने ही बोलने के लिए चुना था. उन्होंने चीन के प्रदूषण में चेहरे पर मास्क पहनने के बरअक़्स अमरीका की 'मीठी और ताज़ी' हवा की बात की.
यूट्यूब पर पोस्ट किए गए भाषण में वह कहती हैं, 'एयरपोर्ट के बाहर जैसे ही मैंने सांस ली और छोड़ी, मैंने आज़ाद महसूस किया.'
उन्होंने आगे कहा, 'जल्दी ही दोबारा अलग क़िस्म की ताज़ी हवा से मेरा सामना होगा जिसके लिए मैं हमेशा आभारी रहूंगी. बोलने की आज़ादी की ताज़ी हवा और लोकतंत्र को हल्के में नहीं लिया जा सकता. लोकतंत्र और आज़ादी वो ताज़ा हवाएं हैं जो लड़ाई किए जाने के काबिल हैं.'
उनका यह भाषण चीन में सोशल मीडिया के सबसे चर्चित विषयों में बन गया. इसे 5 करोड़ से ज़्यादा बार देखा गया.
चीनी सहपाठियों ने लगाए आरोप
चीन के कई सोशल मीडिया यूज़र्स इससे नाराज़ थे. चाइना मॉर्निंग पोस्ट अख़बार के मुताबिक, नाराज़ होने वालों में मैरीलैंड यूनिवर्सिटी में यांग के चीनी सहपाठी भी शामिल थे, जिन्होंने यांग पर 'झूठ और धूर्तता' का आरोप लगाया.
यांग दक्षिण-पश्चिम चीन के कुनमिंग शहर की रहने वाली हैं. कुनमिंग प्रशासन का कहना है कि इस साल हवा की गुणवत्ता लगभग रोज़ अच्छी रही है. उनके मुताबिक, 'कुनमिंग में हवा बिल्कुल मीठी और ताज़ी ही है.'
चीन के 'पीपल्स डेली' अख़बार ने यांग पर पक्षपातपूर्ण भाषण देने का आरोप लगाया.
चौतरफ़ा आलोचना के बाद यांग ने चीनी माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म वीबो पर बयान जारी किया. उन्होंने कहा कि वह अपने भाषण पर आई प्रतिक्रियाओं से 'हैरान और विचलित' हैं और अपनी मातृभूमि से 'गहरा प्यार' करती हैं.
उन्होंने लिखा, 'मैं माफ़ी मांगती हूं और उम्मीद करती हूं कि सब लोग मुझे माफ़ कर देंगे. मुझे मेरा सबक मिल गया है.'
वहीं मैरीलैंड यूनिवर्सिटी ने बयान जारी कर यांग का बचाव किया. उन्होंने कहा, 'ख़ुद से असहमत लोगों को सुनना और सम्मानपूर्वक उनसे बातचीत करना, यूनिवर्सिटी कैंपस के भीतर और बाहर हमारी ज़रूरी प्रतिभाओं में से एक है. '
कुछ वीबो यूज़र्स ने इस पर सहमति जताई. एक ने लिखा, 'ऐसा लगता है कि चीन के लोग अमरीका जाएं, तब भी उनके पास बोलने की आज़ादी नहीं होती.'
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