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तुर्कीः जीत से अर्दोआन को मिलेंगे ये 8 अधिकार
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दोआन को जनमत संग्रह में मिली लोकप्रिय जीत उन्हें वो इतनी ताक़त देगी जितनी देश के आधुनिक इतिहास में किसी नेता के पास नहीं थी.
संविधान के मुद्दे पर रविवार को जनमत संग्रह कराया गया था जिसमें अर्देआन को बहुमत से जीत मिली.
इसमें मतदाताओं के सामने राष्ट्रपति प्रणाली और संसदीय प्रणाली (वर्तमान) में विकल्प के चुनाव को रखा गया था.
मतदाताओं ने 51.3 प्रतोशत वोटों के साथ पहला विकल्प चुना.
अर्दोआन और तुर्की के लिए यह जीत मुख्य रूप से 8 बातों के लिए बहुत अहम हैं.
बन जाएंगे सबसे शक्तिशाली
- राष्ट्रपति द्वारा प्रस्तावित प्रणाली में प्रधानमंत्री के पद को हटा दिया गया है. ऐसा 2003 से 2014 के बीच अर्दोआन पहले ही अमल करते रहे हैं. राष्ट्रपति के हाथ में सत्ता पूरी तरह केंद्रित हो जाएगी.
- राष्ट्रपति कैबिनेट मंत्री और एक या अधिक उप राष्ट्रपतियों की नियुक्ति कर सकता है.
- आदेश जारी करने, ऊंची अदालतों में जजों की नियुक्तियों और संसद को भंग करने का अधिकार भी राष्ट्रपति के हाथ में होगा.
- इस प्रस्तावित संविधान सुधार के अनुसार, अगला राष्ट्रपति और संसदीय चुनाव की तारीख 3 नवंबर 2019 होगी. इसके अनुसार राष्ट्रपित का कार्यकाल पांच साल का होगा और एक राष्ट्रपति को अधिकतम दो बार चुना जाएगा.
- इसका मतलब कि अर्दोआन 2029 तक सत्ता में बने रह सकते हैं. उहोंने अपनी जीत को ऐतिहासिक बताया है.
- इसके अलावा राष्ट्रपति के पास ये अधिकार होगा कि वो न्यायपालिक में हस्तक्षेप कर सकता है. अर्दोआन ये आरोप लगाते रहे हैं कि न्यायपालिका स्व निर्वासित नेता फ़तुल्लाह गुलेन के प्रभाव में है. गुलेन पेनसिल्वेनिया में रह रहे हैं और बीती जुलाई में तख्तापलट की असफल कोशिशों उनके हाथ होने का अर्दोआन ने आरोप लगाया था.
- आलोचकों का कहना है कि नए संविधान से 'वन मैन सरकार' बन जाएगी, जोकि सच्चे लोकतंत्र के लिए ज़रूरी संतुलन को नकारती है.
- रविवार को हुए जनमत संग्रह में संबोधन में अर्दोआन ने इसे सज़ा-ए-मौत के लिए भी जनमत संग्रह बताया.
विरोधी भी मजबूत स्थिति में
हालांकि जीत का कम अंतर देश में ध्रुवीकरण की स्थिति को बताता है. वैसे भी विपक्षी पार्टियां इस चुनाव को रद्द करने की मांग कर रही हैं.
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तुर्की के प्रमुख शहरों अंकारा, इस्तांबुल और स्मर्ना में विरोधी मत की जीत हुई थी. आलोचकों का कहना है कि इस जीत ने अर्दोआन की वैधता पर भी सवाल खड़े किए हैं.
अर्दोआन का सेक्युलर तुर्की लोगों में काफी प्रभाव है. 2013 में उन्होंने शिक्षण संस्थाओं मे बुर्का पहनने पर बैन लगा दिया था.
अभी हाल ही में उन्होंने शराब और गर्भपात पर भी प्रतिबंध लगा दिया है.
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