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'बेसलान बंधक कांड रोकने में रूस रहा था नाकाम'
यूरोपीय मानवाधिकार अदालत ने 2004 के बेसलान स्कूल बंधक कांड के मामले में फ़ैसला सुनाते हुए कहा है कि रूस स्कूल बंधक कांड को रोकने में नाकाम रहा था.
रूस के बेसलान में 2004 में हुए इस स्कूल बंधक कांड में 330 लोगों की मौत हो गई थी.
इस बंधक कांड को ख़त्म करने के लिए भारी हथियारों के इस्तेमाल और बाद में मामले की जांच को लेकर कड़ी निंदा की गई थी.
चेचन अलगाववादियों ने इस स्कूल में 1000 से भी ज्यादा लोगों को बंधक बना लिया था.
चश्मदीदों के मुताबिक़ स्कूल पर विद्रोहियों के कब्ज़े को ख़त्म करने के लिए रूस के सुरक्षा बलों पने ज़रूरत से ज़्यादा बल का इस्तेमाल किया था.
हालांकि इस बंधक कांड को ख़त्म करने के दौरान हुई मौतों के लिए किसी रूसी अधिकारी को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया गया है.
क्या हुआ था बेसलान के उस स्कूल में?
2004 में बेसलान के एक स्कूल में कई नकाबपोश महिलाएं और पुरुष विस्फोटक बेल्ट पहने हुए और गोलियां चलाते हुए घुस गए थे.
अलगाववादियों ने बंधकों को स्कूल के स्पोर्ट्स हॉल में रखा था और बास्केबॉल कोर्ट पर विस्फोटक लगाए थे.
ये अलगाववादी चेचन्या से रूसी सुरक्षा बलों के हटने की मांग कर रहे थे.
बंधक संकट का अंत तीसरे दिन हुआ जब सुरक्षाकर्मियों को स्कूल पर धावा बोलना पड़ा और चरमपंथियों के साथ उनका जमकर संघर्ष हुआ.
रिपोर्टों के अनुसार इस दौरान रूसी सुरक्षा बलों ने जहरीली गैस का भी इस्तेमाल किया था.
क्या कहा है अदालत ने?
ये फ़ैसला स्ट्रासबर्ग स्थित अदालत ने सुनाया है जिसका संचालन यूरोपीय आयोग करता है और यूरोपीय देशों के मानवाधिकार के मामलों को देखती है. रूस भी इसका सदस्य है.
अदालत ने कहा कि रूस को बेसलान बंधक कांड की योजना के बारे में पहले से सूचना थी लेकिन इसे रोकने के लिए क़दम नहीं उठाए गए.
अदालत ने ये भी कहा है कि सूकल से अलगाववादियों के कब्ज़े को ख़त्म करने के लिए टैंक कैनन और ग्रेनेड लॉन्चर जैसे भारी हथियार इस्तेमाल किए गए जिस वजह से मरने वालों की संख्या बढ़ जाती है.
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