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#100Women: इन औरतों को मां बनने का अफ़सोस क्यों है?
फ्रेंच लेखिका कोरिन मेरी के दो बच्चे हैं और वो कहती हैं कि वो अपनी बच्चों की देखरेख करते-करते 'थक चुकी हैं और दिवालिया हो चुकी' हैं.
उन्होंने "मां-बाप बनने को लेकर जो एक आदर्शवादी नजरिया है," उसकी आलोचना की है.
उनकी आलोचना ने दुनिया में कई जगह माता-पिता के बीच एक नई बहस को जन्म दिया है.
इस बहस में हर तरह के नज़रिए सामने आए हैं. एक नज़रिया है कि मां-बाप बनने को लेकर किसी भी तरह का अफ़सोस नहीं है, वहीं दूसरा नज़रिया उन लोगों का है जो महसूस करते हैं कि उन्होंने बच्चे को जन्म देकर अपनी ज़िंदगी तबाह कर ली.
एक तीसरी तरह का नज़रिया भी है. इसके मुताबिक लोगों की इस बारे में मिली-जुली प्रतिक्रिया है, थोड़ी ख़ुशी, थोड़ी नाराज़गी. एक नज़र इन तीनों तरह के नजरिए पर-
अफ़सोस करने वाले
अमरीका के टेक्सास प्रांत के शहर सैन एंटोनियो में रहने वाली एलेक्स का कहना है, "यह जानकर बहुत अच्छा लगा कि मां बनने के बाद ख़ुद के बिल्कुल बेकार हो जाने की सोच सिर्फ़ मेरी ही नहीं है. और भी लोग ऐसा सोचते हैं. मैं अपने बच्चों से बहुत प्यार करती हूं लेकिन मुझे लगता है कि उन्हें नहीं होने चाहिए था."
उनका कहना है, "सिर्फ़ ऐसा ही नहीं है कि उनका पालन-पोषण एक महंगा काम है, बल्कि इसकी क़ीमत एक औरत को अपना करियर गंवा कर चुकानी पड़ती है. कम से कम औरतों को 35 की उम्र तक तो इंतज़ार करना ही चाहिए. बहुत सारी ऐसी वजहें हैं जिनसे लगता है कि एक मां बनना कितना ही सुखद एहसास हो, लेकिन इस वजह से मैं ख़ुद को बहुत थकी हुई और अधूरा महसूस करती हूं."
जर्मनी के कोलोन शहर की एक मां (जो नाम नहीं बताना चाहती हैं) कहती हैं, "मैं कभी भी बच्चों के लिए अच्छी नहीं रही हूं और अब तक अच्छी नहीं बन पाई हूं. मेरा बच्चा छह साल का है और मैं अब भी उससे और उसके दोस्तों के साथ ख़ुद को जोड़ नहीं पाई हूं. एक मां के तौर पर बहुत समय देना पड़ता है. मैं बिल्कुल भी मां बनना पसंद नहीं करती हूं. मैं एक मां के रोल में ख़ुद को फ़िट नहीं मानती हूं. मैं स्कूल में दूसरी सभी मांताओं के बीच ख़ुद को अलग-थलग पाती हूं क्योंकि स्कूल की गतिविधियों में वे काफी सक्रिय होती हैं."
स्कॉटलैंड के एडिनबरा की मेरी कहती हैं, "यह कहना तो मुश्किल है कि मुझे बच्चों को लेकर कोई अफ़सोस है क्योंकि मैं उन्हें प्यार करती हूं. लेकिन अगर मुझे अपनी ज़िंदगी पीछे ले जाने का मौका मिला, तो मैं यह बात यकीनी तौर पर नहीं कह सकती कि मैं बच्चे पैदा करूंगी. कुछ समय के लिए तो यह एक 'शानदार' अनुभव रहता है. बच्चों के बिना मेरे पास पैसा होता, आज़ादी होती और ज़िंदगी में कम परेशानी होती."
मिली-जुली एहसास वाले
स्कॉटलैंड के ट्रून शहर की जेन कहती हैं, "मैं माता-पिता बनने की भावना का सम्मान करती हूं. हालांकि यह कहने में मुझे अजीब लग रहा है कि मैं अपने बच्चों के लिए ऐसा नहीं चाहती हूं. अब दुनिया बड़ी तेज़ी से बदल रही है. आज की दुनिया में बिना शादी किए और परिवार बसाए भी आप एक शानदार ज़िंदगी जी सकते हैं. आप दूसरों का ख़्याल रखने के दबाव के बिना, एक ख़ुशहाल और भरी-पुरी ज़िंदगी जी सकते हैं. आने वाली पीढ़ी की खुशहाल ज़िंदगी के लिए दोस्त, पालतू जानवर और एक अच्छी नौकरी ही काफी होगी.
नीदरलैंड के मैस्ट्रीक्ट की एंजा कहती हैं, "मेरे दो बेटे हैं और मैं उनसे बेइंतहा प्यार करती हूं. हां कभी-कभी मैं थक जाती हूं. मैं अक्सर धैर्य के साथ ही रहती हूं और दिमागी तौर पर सजग रहती हूं. लेकिन लगता है कि अब परेशान होने लगी हूं. उन्हें खाना खिलाना, उनके साथ खेलना, उन्हें सुलाना यह सब नियमित होता है. जब मैं इन सब से थकने लगती हूं तो मुझे लगता है कि बच्चे होने ही नहीं चाहिए. लेकिन जब वो मुझे गले लगाते हैं या मुझे चूमते हैं या फिर पहली बार कुछ ऐसा ही शानदार अनुभव देते हैं तो मुझे लगता है कि मैं उन लम्हों को किसी और चीज के लिए बिल्कुल नहीं छोड़ सकती हूं.
जिन्हें कोई पछतावा नहीं है
ओहियो की ब्रायन कहती हैं, "बच्चे होना मेरे लिए दुनिया का सबसे बेहतरीन एहसास है. साथ ही साथ बच्चे संभालना एक मुश्किल काम भी है. मैं नहीं जानता कि किसने इसे ख़ुशी का एहसास देने वाला आसान काम बताया होगा. किसी भी हालात में ख़ुश रहने लिए आपको लंबा समय देना ही होता हैं."
वहीं वर्जिनिया की कैरेन कहती हैं, "मैं बिना बच्चों के अपनी ज़िंदगी के बारे में सोच ही नहीं सकती हूं. वो मुझे अपने टीचर्स, कोच और दूसरे बच्चों के मां-बाप के साथ व्यस्त रखते हैं."
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